अजमेर जिले के अंतिम छोर और अजमेर- टोंक -सवाईमाधोपुर मार्ग (SH116) पर बसा ऐतिहासिक बघेरा कस्बा धर्म, आध्यत्म, ऐतिहासिक और पौराणिक दृष्टि से महत्व रखता आया है और आज भी यह ऐसी रूप में अपना महत्व और पहचान रखता है। वर्तमान दौर में यह कस्बा एक बार फिर से अपनी पहचान नए रूप में स्थापित कर रहा है, कारण है यहाँ का ग्रेनाइट व्यवसाय और क्षेत्र में रोजगार के अवसर संभावना।

क्या है ग्रेनाइट ?

ग्रेनाइट मार्बल की तरह ही एक प्राकृतिक पत्थर है जो भिन्न-भिन्न कलर्स में भी हो सकता है । जिसका उत्पादन खनन के माध्यम से किया जाता है । यह एक कठोर पत्थर होता है जो की ब्लॉक्स के रूप में खदान से निकाले जाते हैं । खनन के पश्चात इनकी कटिंग की जाती है अंतिम रूप से इस पर पॉलिश करके इसे एक चमकीले ग्रेनाइट का रूप दिया जाता है । इसकी मार्केट में आज मांग को देखते हुये इस क्षेत्र में विकास की अपार संभावना नजर आती हैं ।

बघेरा में ग्रेनाइट व्यवसाय

बघेरा कस्बे और आसपास के क्षेत्रों में ग्रेनाइट की भरपूर मात्रा में उपलब्ध होता है क्षेत्र में इस व्यवसाय की संभावना को बल प्रदान लड़ती है । कहीं पर कम गहराई पर तो कभी कहीं अधिक गहराई पर यह पाया जाता है पिछले काफी दिनों से यहां पर ग्रेनाइट खनन का व्यवसाय बड़े जोरों पर चल रहा है । यहाँ के ग्रेनाइट की क्वालिटी, इसका रंग रूप इसकी मजबूती सहज ही हर किसी का ध्यान अपनी और आकर्षित कर लेती है । इस व्यवसाय से जुड़े लोगों की माने तो वर्तमान समय में बघेरा और आस पास के क्षेत्र में एच. एम.ग्रेनाइट, कल्याण ग्रेनाइट्स श्री वराह ग्रेनाइट, शांतिनाथ ग्रेनाइट, अनिरुद्ध ग्रेनाइट, सालासर ग्रेनाइट,पिंकी, ग्रेनाइट सहित करीब 15 से 16 खदानों में खनन का कार्य हो रहा है । और इसके अतिरिक्त इससे कहीं अधिक करीब 70-80 की संख्या में खदानों के लीज होने की प्रक्रिया जारी है । इस बाबत और अधिक जानकारी के लिये आप संबंधित विभाग से विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं ।

लोगो मे भी है इस व्यवसाय की ओर रुझान

बघेरा कस्बे और आस पास में कई ग्रेेेनाइट स्टोन की खदानें हैं। क्षेत्र में इसकी उपलब्धता को देखते हुये लोगो मे मानो मशीनों से जमीन के नीचे तक जांच करवाने की मानो बाढ़ सी आ गई । कई खातेदार ने मशीनों से अपनी जमीन की जांच करवाई तो नीचे ग्रेनाइट की पूरी स्लैब व खदान होने का पता लगा। साथ ही पिछले दिनों सरकारी भूमि लीज/नीलाम की निविदा मांगी गई थी। ग्रेनाइट की उपलब्धता और व्यावसायिक लोगी की रुचि को देखते हुए इसमें और अधिक इजाफा होने की अपेक्षा की जा सकती है ।

बघेरवाल पत्थर आज बना पेंथर ग्रेनाइट

इस ग्रेनाइट की उपलब्धता आज से ही नही है वरन सेकड़ो वर्षों से ही थी । बघेरा कस्बे में बहुतयात मात्रा में पाए जाने वाला यह ग्रेनाइट्स बघेरा और आसपास के क्षेत्र में प्राचीन समय से ही बघेरवाल पत्थर के नाम से जाना जाता रहा है जो स्थानीय स्तर पर भी आज भी इसी नाम से जाना जाता है । प्राचीन मंदिर, किले, ऐतिहासिक इमारतों पर बड़े-बड़े ब्लॉक्स जिसे लागड़िया कहा जाता था आज भी इस बात का गवाह है । इस पत्थर इसकी बनावट, रंगरूप और क्वालिटी उपलब्धता के आधार पर इसे पेंथर के नाम से जाना जाने लगा है ।

बघेरा की तरफ ग्रेनाइट व्यावसायिकों का बढ़ता रुझान

बघेरा कस्बे और आसपास के क्षेत्र में ग्रेनाइट की उपलब्धता, क्वालिटी और राज्य राजमार्ग 116 पर जहा से अजमेर, टोंक, जयपुर ब्यावर, सवाईमाधोपुर,मार्ग पर होने के कारण ग्रेनाइट व्यवसायियों का रुझान दिनों दिन काफी देखने को मिल रहा है । आने वाले समय मे इसके और अधिक विकसित होने की संभावना नजर आती है ।

कैसे पहुँच सकते है बघेरा

बघेरा भारत के राजस्थान राज्य के अजमेर जिले की केकडी तहसील का एक कस्बा है। जो कि अजमेर संभाग के अंतर्गत आता है। बघेरा के पूर्व की ओर टोडा रायसिंह तहसील, पूर्व की ओर देवली तहसील, उत्तर की ओर मालपुरा तहसील पश्चिम दिशा में केकड़ी शहर, सरवाड तहसील है। यह जिला मुख्यालय अजमेर से पूर्व की ओर करीब 97 KM दूर स्थित है। केकड़ी से 20 किमी. राज्य की राजधानी जयपुर से 130 किमी। यहां से टोंक 65 km है । यहां पहुंचने के लिए जयपुर,अजमेर, टोंक सवाई माधोपुर ,मालपुरा ,देवली नसीराबाद, ब्यावर से वाहन सुविधा उपलब्ध रहती है। अजमेर, नसीराबाद तक रेल सेवा उपलब्ध है।

क्या है लीज की पूरी प्रक्रिया ?

खदान लीज पर दिए जाने से पहले सम्बधित विभाग जमीन का सीमांकन जिला कलेक्टर व राजस्व विभाग के अधिकारी की निगरानी में करवाता है। इसके साथ साथ रिकॉर्ड जांच करेंगे कि जमीन किसके नाम है। इसकी स्क्रूटनी के बाद वन विभाग का क्षेत्रफल देखा जाता है कि खदान के 500 मिटर केे क्षेत्र में यदि वन्य या चरागाह क्षेत्र है तो इसका जिला प्रशासन व वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया जाता है। फाइल पर्यावरण विभाग को भेजकर मंजूरी ली जाती है कि इससे पर्यावरण को नुकसान नहीं होगा इसके सत्यापन के बाद एलओई यानी मंशा पत्र जारी होता है। केकड़ी न्यायालय परिसर और बघेरा क्षेत्र में उपलब्ध जानकर और कानूनी सलाहकार की सेवा का लाभ भी लिया जा सकता है ।

इन क्षेत्रों में है रोजगार की अपार संभावनाएं

1 होटल व्यवसाय
2 मेकेनिकल क्षेत्र का व्यवसाय
3 रेस्टोरेंट व्यवसाय
4 गिट्टी क्रेसर
5 ग्रेनाइट कटर व्यवसाय
6 खुदरा व्यापार
7 पर्यटन क्षेत्र
8 स्थानीय रोजगार
9 परिवहन
10 मजदूर वर्ग
11 स्वरोजगार

इन क्षेत्रों में सुधार और विकास की जरूरत

बघेरा कस्बा जो कि राजस्थान राज्य उच्च मार्ग 116 पर स्थित है।प्राचीन समय से ही यह कस्बा धर्म और अध्यात्म का केंद्र रहा है ।जहां पर सैकड़ों की संख्या में पर्यटक आते रहते हैं साथ ही आज ग्रेनाइट व्यवसाय भी जिस प्रकार से फल-फूल रहा है उसको देखते हुए आवश्यकता महसूस की जाती है कि

  • बघेरा में चिकित्सा व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए यहां के अस्पताल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में क्रमोन्नत किया जाए, साथ ही यहां पर एक ट्रोमा सेंटर स्थापित हो ।
  • आगमन की सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए रोडवेज बसों का संचालन ,यातायात के साधनों में वृद्धि की जाए।
  • क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए बघेरा पुलिस चौकी को थाने में तब्दील/ क्रमोन्नत किया जाने की आज आवश्यकता महसूस की जा रही है ।
  • फलते फूलते ग्रेनाइट व्यवसाय के कारण क्षेत्र में खनन विभाग का एक क्षेत्रीय कार्यालय और चौकी की स्थापना की जाने की आवश्यकता है।
  • प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए बघेरा में तहसील कार्यालय खोले जाने की आज आवश्यकता है।

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