(16 सितंबर ) -हमारे देश में धरती को मां और आसमान को पिता का दर्जा दिया जाता है इन दोनों के तालमेल की वजह से ही इस धरा पर जीवन संभव हो पाया है अगर इस तालमेल को बिगड़ दिया गया तो इस धरती पर किसी भी प्रकार के जीवन की संभावना की कल्पना भी बेमानी साबित होगा।

 कहा जाता है कि धरती किसी समय पृथ्वी का गोला हुआ करता था इस पर जीवन संभव नहीं था धीरे-धीरे यह धरती ठंडी होती गई और इस पर जीवन की उत्पत्ति हुई इन सब में लाखों-करोड़ों वर्ष लगे मानव ने इस धरती पर रहकर ही अपना विकास किया विकास की गति इतनी तेज हो गई कि मानव ने प्रकृति के साथ खिलवाड़ शुरू कर दिया आज भी जारी है इसका दुष्परिणाम आज हम स्वयं भुगत रहे हैं और आने वाली पीढ़ीयां भी  दुष्परिणाम भोगटेगी  अगर अभी भी नहीं जागे तो इसके परिणाम और भी गंभीर हो सकते है।

  • बिगड़ रहा है धरती आसमान का संतुलन


आज धरती आसमान के इस तालमेल को बिगाड़ा जा रहा है इसको किसी की नजर लग गई है इस बिगड़ते तालमेल में मानव की दोषपूर्ण नीतियां ही सबसे बड़ी जिम्मेदार कारण है हालांकि विश्व बिरादरी को इस खतरे का आभास जरूर है समय-समय पर इसे बचाने की प्रयास भी करते हैं यहां यह कहने में हमें कोई अतिशयोक्ति नहीं कि जब पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में विश्व के विभिन्न राष्ट्र स्वयं ही आपस में वैचारिक संतुलन नहीं बना पा रहे हैं तो ग्लोबल वार्मिंग के बारे में तालमेल कैसे बनाए रख सकते हैं यही वजह है कि विश्व बिरादरी द्वारा किए गए प्रयासों का आज तक कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया।

पृथ्वी के वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा निरंतर बढ़ने से ग्लोबल वार्मिंग का संकट भी गहराता जा रहा है जिस मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन हो रहा है उसी अनुपात से पृथ्वी का तापमान भी बढ़ रहा है जैसा कि पर्यावरणविदों का मानना है कि इस तापमान वृद्धि के कारण ग्रीनलैंड और आर्कटिक सागर की बर्फी गली शुरू हो जाएगी जिसके परिणाम स्वरूप समुंदर का जलस्तर बढ़ जाएगा संभव हो सकता है कि इसके कई दुष्परिणाम भुगतने पड़े समुंदर के किनारे पर कई राष्ट्रों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाए  मानव की भौतिकवादी दिनचर्या प्रकृति के प्रति उसकी गैर जिम्मेदाराना कार्य के परिणाम स्वरूप पृथ्वी की रक्षा कवच ओजोन परत को  भारी नुकसान पहुंच रहा है।

  • क्या है ओजोन परत–


ओज़ोन परत पृथ्वी के वायुमंडल की एक परत है जिसमें ओजोन गैस की सघनता अपेक्षाकृत अधिक होती है। ओज़ोन परत के कारण ही धरती पर जीवन संभव है।
ओजोन (O3) का एक अणु आॅक्सीजन के तीन अणुओं के जुड़ने से बनता है। इसका रंग हल्का नीला होता है और इससे एक विशेष प्रकार की तीव्र गंध आती है। भूतल से लगभग 50 किलोमीटर की ऊंचाई पर वायुमंडल ऑक्सीजन, हीलियम, ओजोन, और हाइड्रोजन गैसों की परतें होती हैं, जिनमें ओजोन परत धरती के लिए एक सुरक्षा कवच का कार्य करती है क्योंकि यह ओजोन परत सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैगनी किरणों से धरती पर मानव जीवन की रक्षा करती है। सूरज से आने वाली ये पराबैगनी किरणें मानव शरीर की कोशिकाओं की सहन शक्ति के बाहर होती है।

   यह परत सूर्य के उच्च आवृत्ति के पराबैंगनी प्रकाश की 93-99 % मात्रा अवशोषित कर लेती है, जो पृथ्वी पर जीवन के लिये हानिकारक है। पृथ्वी के वायुमंडल का 91% से अधिक ओज़ोन यहां मौजूद है।

  • ओज़ोन परत के संरक्षण हेतु जागरुकता

विश्व ओजोन दिवस : विश्व ओज़ोन दिवस या ‘ओज़ोन परत संरक्षण दिवस’ 16 सितम्बर को पूरे विश्व में मनाया जाता है।
वर्ष 1995 के बाद से हर साल 16 सितम्बर को ओजोन परत के संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय ओजोन दिवस का आयोजन किया जाता है।

  • कौन है जिम्मेदार ओजोन के नुकसान के

ओज़ोन परत में होने वाले नुकसान का कारण   मानव खुद ही  है, उसके के क्रियाकलापों  जीवन शैली से जीव-जगत की रक्षा करने वाली इस परत को नुकसान पहुँच रहा है। मानवीय क्रियाकलापों ने वायुमंडल में कुछ ऐसी गैसों की मात्रा को बढ़ा दिया है जो पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करने वाली ओज़ोन परत को नष्ट कर रही हैं।
ओज़ोन परत में हो रहे क्षरण के लिये क्लोरो फ्लोरो कार्बन गैस प्रमुख रूप से उत्तरदायी है। इसके अलावा हैलोजन, मिथाइल क्लोरोफॉर्म, कार्बन टेट्राक्लोराइड आदि रासायनिक पदार्थ भी ओज़ोन को नष्ट करने में योगदान दे रहे हैं। क्लोरो फ्लोरो कार्बन गैस का उपयोग हम मुख्यत: अपनी दैनिक सुख सुविधाओं के उपकरणों में करते हैं, जिनमें एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर, फोम, रंग, प्लास्टिक इत्यादि शामिल हैं।

 सूर्य की पराबैंगनी प्रकाश(UV Rays) के संपर्क में आने के कारण,सांस की बिमारी, ब्लडप्रेशर की परेशानी, मोतियाबिंद के विकास और त्वचा के कैंसर के खतरे में बृद्धि हुई है। त्वचा के कैंसर के शुरुआती चरणों में इलाज करना संभवत होता है। हालांकि, इसके आगे के चरणों में यह स्थिति घातक हो सकती है। मोतियाबिंद के कारण देखने संबंधित परेशानी होती है और यहाँ तक यह अंधेपन में भी बदल सकती है।

       हर व्यक्ति को हर देश को अपनी जिम्मेदारी का एहसास होना चाहिए उन कारणों पर जो ओजोन परत को नुकसान पहुंचा रहे हैं आपस में मिलजुल कर ही सुधार और उपाय करने होंगे प्लास्टिक रसायन अवशिष्ट पदार्थों के निस्तारण के लिए भी उपाय ढूंढने होंगे व्यक्ति को अपनी जीवनशैली बदलनी होगी

 भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा भी एक ऐसा अनुपम प्रयास पूरे भारत में 2 अक्टूबर 2019 से किए जाने का आह्वान किया है हर व्यक्ति इस प्रकार अपनी जिम्मेदारी समझे तभी हम ओजोन परत रक्षा कवच की रक्षा कर पाएंगे अन्यथा इसके परिणाम बहुत गंभीर हो सकते हैं आओ मिलकर संकल्प ले कि हमें ओजोन को बचाना है तभी हम बच पाएंगे।

प्रयास  भले छोटा ही सही एक शुरुआत तो होनी चाहिए।

 कब तक अंधेरे में रहोगे अब तो एक दीपक जला लेना चाहिए ।।

  जला है आज दीपक तो कल  एक मशाल जलनी चाहिए।

 किसका इंतजार है अब एक छोटा सा बदलाव होना चाहिए
।।

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