एक किंवंदती के अनुसार ढोला-मारू का विवाह अजमेर जिले के  अंतिम छोर पर बघेरा गांव में हुआ था जहां आज भी पत्थर (पाषाण) का तोरण द्वार उनके प्रेम का मूक साक्षी है। रेतीले धोरों में उपजे प्रेम को ढोला-मारू ने बघेरा में ही परिणय के अटूट बंधन के रंग में रंगा था।  धोरा की धरती राजस्थान में अजमेर मेरवाड़ा में  केकडी उपखंड में बघेरा एक ऐतिहासिक और पौराणिक ग्राम है जो इतिहास ,आध्यत्मिक और प्रेम के अद्भुत स्मृतियों को अपने आप मे समेटता हुआ अपनी गवाही खुद ब खुद ही बयां कर रहा है।

धरोहर संरक्षण अधिनियम 1961 के तहत नीला बोर्ड लगा कर इस तोरण द्वार को संरक्षित घोषित जरूर कर रखा है लेकिन यह नीला बोर्ड केवल औपचारिकता मात्रा प्रतीत होता है यह उस पुत्र की तरह नजर आता है जिसे गोद लेकर उसका अपने आपको संरक्षक घोषित कर उसे अपने हाल पर लावारिश की तरह छोड़ दिया जाये।

   करीब 1000 से अधिक वर्षों से धूप -छाया- वर्षा की प्राकृतिक मार झेलता हुआ यह गौरव इतिहास और गांव का गौरव बढ़ाता आ रहा है लेकिन क्योकि इस इमारत के एक खंभे में बहुत चौड़ी दरार पड़ चुकी है, जिससे यह ऐतिहासिक स्मारक कभी भी धरासायी हो सकता है । यह गौरव आज जर्जर होकर अपने अस्तित्व के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है कोई इसकी सुध लेने वाला नही |

वह आम जनता जो कभी इसे अपना गौरव समझती थी उसके द्वारा की जाने वाली उपेक्षा या फिर नीला बोर्ड लगाकर अपने आपको इसका संरक्षक घोषित करने वाला विभाग और सरकार | जिम्मेदार जो कोई भी हो, कारण जो कुछ भी हो लेकिन यह गोरव आज स्वयं ही मजबूर होकर अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष कर रही है और अपनी इस दुर्दशा पर खुद ही आंसू बहाने को मजबूर हो रही है। अजीत जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है ।

जगह-जगह इसमें दरारें पड़ चुकी हैं न जाने कब यह धरोहर धराशाई हो जाए इस बात का हमेशा ही अंदेशा बना रहता है । इंतजार है आज भी उस वक्त की जब विभाग और सरकार इसकी की सुध लेगी इंतजार है आज भी उन लोगों का जो इस धरोहर की कद्र करके इसे बचाने में अपना योगदान देंगे ।

इंतजार है आज भी उस मसीहा का जो इस तोरण द्वार के दर्द को महसूस कर सके इंतजार है आज भी जो इस तोरण द्वार की दशा और पीड़ा को समझ सके इन्तजार है आज भी उस व्यक्ति की जो इस धरोहर की संरक्षण की मांग को धरोहर संरक्षण प्राधिकरण ,सरकार और संबंधित विभाग तक पहुंचाएं। 

सरकार, प्रशासन से विनम्र निवेदन


वर्तमान पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव 2020  में लालाराम जी जाट बघेरा के सरपंच निर्वाचित हुए हैं  साहब नष्ट हो रही इस ऐतिहासिक धरोहर की पीड़ा को समझते हुए सरकार तक अपनी बात पहुंचाई है और इस धरोहर के संरक्षण के लिए प्रयास करेंगे । व्यास और विश्वास करता हूं कि अगर हम गांव के नवनिर्वाचित सरपंच साहब इस बात को मंत्री महोदय और सरकार तक पहुंचाएं तो इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाया जा सकता है । 


अभी भी वक़्त है इसको बचाने के लिये ….जागो अगर इस धरोहर की यूं ही उपेक्षा होती रही तो वह दिन दूर नहीं जब आने वाली पीढ़ियां यह कहा करेगी कि यहां कभी ढोला मारू की शादी का प्रतिक तोरण द्वार हुआ करता था .अगर अब भी इसकी सुध नहीं ली गई तो इसे केवल इतिहास के पन्नों में ही पढ़ा जाएगा यह इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह जाएगा ।इतिहास हमे कभी माफ नही करेगा ओर फिर बघेरा के इतिहास, प्रेम के इतिहास में रहेगी तो सिर्फ इसकी यादे, व इसके अवशेष ।

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