किसी ने क्या खूब कहा है कि वक्त नूर को बेनूर कर देता है कौन चाहता है बेकार और घर पर बैठना लेकिन वक्त सबको मजबूर कर देता है । वैश्विक महामारी के संक्रमण से बचने के लिए सोशल डिस्टेंस ही दवा ओर उपाय है इसको मध्य नज़र रखते हुये पूरी दुनिया के साथ-साथ भारत में भी लॉक डाउन लागू किया गया जिसके परिणामस्वरूप मानो देश ठहर सा गया हो । वैश्विक महामारी औऱ उसके चलते लॉकडाउन और लॉक डाउन के चलते लोगों की, आम जनता की जिंदगी और दिनचर्या में परिवर्तन विशेषकर बच्चों की दिनचर्या में परिवर्तन और यह परिवर्तन भी ऐसा परिवर्तन के लोगों को घरों में कैद करके रख दिया । सभी वर्गों पर चाहे नौकरी पेशा हो, युवा हो ,बुजुर्ग हो या फिर बच्चे इस लॉक डाउन है प्रभावित है । सभी की दिनचर्या में परिवर्तन आया है ।

अब बचपन तो बचपन होता है बचपन में शैतानीयां न हो, बचपन में उछल कूद ना हो, तो मानो बच्चों का बचपन छिन सा जाता है । इस दौर में न स्कूल जाना , न घर से बाहर निकलना। ऐसी परिस्थितियों में बच्चों में मानसिक तनाव होना स्वभाविक है । यह एक बड़ी समस्या है कि इस विकट समय को जब घरों में कैद रहना पड़ रहा हो बच्चे अपना वक्त कैसे गुजारे । अभिभावक भी चिंतित कि इस मुश्किल दौर में बच्चों को कैसे स्वस्थ रखें, कैसे उनका रचनात्मक और क्रियात्मक विकास किया जाए, स्कूल बन्द होने से पढ़ाई से मानो सारे संबंध टूट सा गये हो। ऐसे दौर में पढ़ाई के साथ उनको कैसे जोड़ा रखा जाए ।

इस प्रकार करें बच्चों की दिनचर्या का निर्धारण ,कभी नही होगें बच्चे बोर,बल्कि उनका विकास भी होगा ।

लॉक डाउन के इस वक्त में जब बाहर आ जा नहीं सकते जब सभी को विशेषकर बच्चों को पूरा वक्त घर में रहकर बिताना है तो क्यों न इस प्रकार बिताया जाए ताकि वक्त भी गुजर जाए , बच्चे बोर भी नही हो, उनका मानसिक विकास भी हो, और हमें जिंदगी में कुछ नया सीखने को भी मिले ।

1 इस भागदौड़ की जिंदगी में आज के बच्चे मानो बुजुर्गों से दूर से हो गए हो , इस लोक डाउन में एक बार फिर अवसर मिला है कि बच्चों को अपने घर के बड़े बुजुर्गों के साथ वक्त गुजारने को प्रेरित किया जाए इससे बच्चों का वक़्त भी गुजरेगा , बच्चों -बुजुर्गो के बीच आई दूरियों को खत्म करने में मदद मिलेगा और उन्हें कुछ अच्छे संस्कार भी सीखने को मिलेंगें ।

2 हर बच्चे में प्रतिभा होती है, लॉक डाउन के दौर में उसे प्रतिभा को निखारने का अवसर उपलब्ध कराएं, जैसे उन्हें ड्राइंग बनाना ,कविताएं लिखना , केरम खेलना, जैसे कार्यों को अपनी रूचि के अनुसार करने को प्रेरित करें। इससे बच्चों में रचनात्मक ,क्रियात्मक, सृजनात्मकता विकास होगा ।

3 लॉक डाउन के चलते अभी जब स्कूल बन्द हैं तो बच्चे घर पर ही है बच्चे है तो शैतानी तो करेंगे ही क्यो न अपने खाली वक़्त को उनके साथ गुजारे छुटियां है तो उनको पढाने व सिखाने की पूरी जिम्मेदारी पैरेंट्स पर आजाती है । अगर बच्चे छोटे हैं तो ये जिम्मेदारी और भी बढ जाती है । ऐसे में उन्हें पढाने के लिए रूचिकर तरीके अपनाएं जो उनको पसंद आए साथ ही आप अपने बचपन की घटना या लाइफ के अनुभव जिनसे आपने कुछ सीखा या जिनमें आपको खुशी मिली, बच्चों से जरूर शेयर करें। बच्चों से आप कुछ ऐसा सिखाने के लिए कहें जिनमें वो एक्सपर्ट हों या बच्चों को वो काम करना पसंद हो इस खाली वक़्त में बच्चों को कुछ नया सिखाएं जैसे किचन के काम मे हेल्प लें, कोई नई रेसिपी बनाने में या उनकी फेवरेट डिश बनाने मे उनकी मदद लें , उन्हें घर पर कुछ नया करने की जिम्मेदारी सौपें , पढने की आदत के लिए बच्चों को प्रेरित करे । घर के बड़ो को वे अपने जीवन के उद्देश्य , सपने व सघर्ष के बारे मे भी अपने बच्चों से बात करना चाहिए। इससे दोनों के बीच कम्युनिकेशन गैप दूर होगा तो बच्चों की शिकायतें भी दूर होगी कि माता पिता उनको वक़्त नही देते इन सब से आपका वक्त भी कटेगा बच्चों के साथ आपका जुड़ाव भी होगा और बच्चों में रचनात्मकता और सृजनात्मकता का विकास भी होगा ।

4 लॉक डाउन का असर न केवल बड़े बल्कि बच्चों को भी प्रभावित कर रहा है। उनकी मानसिकता पर तो इसका गहरा असर पड़ रहा है क्योंकि लॉक डाउन के चलते बच्चों की दिनचर्या में अचानक आये बदलाव के कारण एक तरफ स्कूल बंद है तो दूसरी तरफ उनको घर में कैद रहने को मजबूर होना पड़ रहा है । इस बात का विशेष ध्यान रखते हुए हमें बच्चों के साथ व्यवहार पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है । उन्हें अपने बायोलॉजिकल शेड्यूल के अनुसार अपनी दिनचर्या को पूरी करने दे उन पर आप दिनचर्या को न थोपे लॉक डाउन के इस समय में बच्चों को ज्यादा प्यार और परवाह की आवश्यकता है ,इस बात को ध्यान में रखते हुए अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों से ऐसी गतिविधियां कराई जिसमें उनकी रूचि हो वह उसमें मन लगा सके जिससे वे तनाव से दूर भी रहे और खेल-खेल में उन्हें कुछ सीखने को भी मिले । हमें कुछ वक्त बच्चों के साथ बिताने की भी आवश्यकता है उनसे बात करने की भी आवश्यकता है अगर बच्चा परिवार में किसी के साथ गलत व्यवहार करता है या शैतानी करता है तो उस पर गुस्सा न करें बल्कि उसके गुस्से की वजह को जानकर उसे समझाने का प्रयास करें क्योंकि हो सकता है लॉक डाउन के चलते अपने घर में कैद रहने के कारण बच्चों में तनाव और निराशा उत्पन्न हो सकती है ।

5 लॉक डाउन के चलते बच्चे अपने दोस्तों अपने हम उम्र साथियों से दूर है इसलिए इस दूरी को खत्म करने के लिए और बच्चों का अपने दोस्तों साथियों से संपर्क बनाए रखने के लिए फोन कॉल, वीडियो कॉल के माध्यम से उन्हें बात करने दे । विचारों का आदान प्रदान करने दें, इससे बच्चे खुशनुमा माहौल भी मिलेगा और उन्हें उचित और सकारात्मक वातावरण भी मिलेगा ।

6 अच्छे स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के लिए उन्हें योग और हल्के-फुल्के व्यायाम करने के लिए प्रेरित करें साथ ही सुबह उठकर व्यायाम और योगा करने की आदत डालनी चाहिये ।

7 बच्चों को घर के कार्यों विशेषकर बागवानी करने, घर के कार्यों में व्यस्त रखने का प्रयास करें ताकि बच्चे घर में रहकर बोरियत महसूस ना करें ।

8 घर में बिखरी हुई चीजों को व्यवस्थित करने, अनुशासन पूर्वक रहकर कार्य करने और घरेलू कार्यों का महत्व बताने के लिए उन्हें व्यस्त रखें ,एक दूसरे के सहयोग के साथ काम करने की आदत का विकास करें ।

9 बच्चों को अपनी पसंद का टीवी प्रोग्राम ,कार्टून, वीडियो गेम्स देखने दे। उन पर किसी प्रकार के दबाव का प्रयोग ना करें अगर बच्चे इस वातावरण में चिड़चिड़ा महसूस करें तो उन्हें प्रेम से समझाएं क्योंकि इस वातावरण में बच्चों में तनाव होना स्वभाविक है।

10 लॉक डाउन के इस वक्त का सदुपयोग विद्यार्थीयो को अध्ययन में करना चाहिए ताकि उनको लाभ मिल सके ओर साथ में ज्ञान में वर्द्धि भी कर सके ।विद्यार्थीगण एवं प्रतियोगी छात्र इस समय Online Education के माध्यम से इस न सिर्फ़ लॉकडाउन का फ़ायदा उठा सकते है बल्कि घर बैठे बैठे फ़्री वक़्त में बहुत कुछ Knowledge अर्जित कर सकते हैं। इसके लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने बहुत सारी वेबसाइट फ़्री कॉर्सेज के लिए ओपन कर दी है,प्रतियोगी परीक्षा वाले छात्र भी You Tube की मदद से अपनी तैयारी जारी रख सकते हैं।स्कूल से जुड़े विद्यार्थीयो के लिए भी सलाह है कि वे भी इस वक़्त का उपयोग खेल के साथ साथ अध्ययन में करे ।

11 टीवी देखना बच्चों की पहली पसंद होती है लेकिन लॉक डाउन और कोरोना महामारी के इस दौर में अभिभावक इस बात का विशेष ध्यान रखें कि कोरोना संक्रमण होने के कारण मरने वालों की खबरें, नकारात्मकता पैदा करने वाली खबरों से उनको दूर ही रखें क्योंकि इससे उनके मस्तिष्क पर नकारात्मक प्रभाव हो सकता है।

12 मुश्किलो भरा ये दौर घर पर ही गुजारना जितना कठिन है बड़ो के लिये है उससे भी कठिन बच्चों के लिए है । इसलिये घर के बड़ो, अभिभावकों का दायित्व बनता है की वो बच्चों के साथ अपना वक़्त गुजारे, उनके साथ खेले, उनको प्रेरणादायक कहानियां सुनाये ।

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