सामाजिक सहयोग को नकारा नही जा सकता

पिछले दिनों माननीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ रघु शर्मा जी की अनुशंसा पर शिक्षा विभाग द्वारा बघेरा बालिका माध्यमिक  स्कूल को उच्च माध्यमिक विद्यालय में क्रमोनत की जाने की घोषणा की ।इससे ग्रामीणजनो में उल्लास है अभिभावकों को खुशी है । सरकार और मंत्री महोदय का यह घोषणा एक काबिल ऐ तारीफ निर्णय है। इससे बालिका शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा । भविष्य में इस स्कूल के लिए एक बड़े परिसर की जरूरत पड़ेगी  जो गांव की चार दिवारी या इसके आस पास ही हो तो ठीक रहे ऐसा हर जागरूक,और सकारात्मक सोच रखने वालों की है। 

  • बालिका स्कूल के लिये जगह हो तो बताना जरूर

आज सबसे बड़ी आवश्यकता यह है कस्बे की मुख्य बस्ती में ही कहीं न कहीं बालिका स्कूल का नवीन भवन निर्माण हो जहां बालिकाओं की पहुंच आसान हो,उचित वातावरण हो, इस सच्चाई से कोई भी मुंह नहीं मोड़ सकता।  कैसा बड़ा दुर्भाग्य की बात है कि गांव की मुख्य बस्ती में ऐसी कोई उपयुक्त जगह नजर नहीं आती।  जहां एक सीनियर सेकेंडरी स्कूल के लिए मापदंडानुसार भवन निर्माण हो सके । अगर किसी को जानकारी हो तो बताओ पूरा गांव आपके विचार ,सलाह का दिल से, मनोयोग से स्वागत करेगा ।

  • गांव से बाहर भवन बनाना कितना उचित कितना अनुचित

कस्बे के टोडा बाईपास और केकड़ी बाईपास के बाहर स्कूल बनाई जाती है क्योकि गांव में तो ऐसी कोई जगह नजर नही आती तो जरा विचार कीजिए क्या यह उचित होगा? क्या एक अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने के लिए सहमत हो पाएंगे ?

सोचो अगर बालिका स्कूल  के लिये गांव में जगह नही मिलती है तो क्या स्कूल को आप कहीं जंगल में बाईपास पर या गदिया के पेटे में, तालाब के पेटे में, बागरिया की ढाणी में ,सूरजपुरा गेट पर, टोडा बाईपास पर, भेजना चाहते हो क्या ?  अगर नहीं तो गांव में ऐसी उचित जगह बता दो जहां एक सीनियर सेकेंडरी स्कूल का निर्माण हो सके, जहां बालिका पढ़ सके , जहां बालिका अकेली जा सके आ सके, जहां बालिकाओं को उचित वातावरण मिल सके ।

  • इस स्थान की हो रही है चर्चा

पिछले दिनों बालिका स्कूल के नए भवन बनाए जाने और उपयुक्त स्थान के लिए गांव के ही कुछ व्यक्तियों जिनमें समाज के वरिष्ठ नागरिक भी हैं और युवा वर्ग भी, वर्तमान अस्पताल भवन परिसर में बनाए जाने की बात कर रहे है । अगर यहां बालिका स्कूल बनाए जाने की बात कितनी सही है कितनी नही यह आपको सोचना है । सवाल यह उत्पन्न होता है कि अस्पताल को कहां बनाया जाए और क्या उसके लिए ग्रामवासी और विभाग तैयार हो पाएंगे। 


1.अस्पताल परिसर में -भविष्य में इस स्कूल के लिए एक बड़े परिसर की जरूरत पड़ेगी  जो गांव की चार दिवारी या इसके आस पास ही हो ताकि बालिकाओं को आने जाने में कोई परेशानी न हो । अगर इस परिसर को खाली किया जााता है तो वर्तमान अस्पताल परिसर बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय के लिए सबसे उपयुक्त स्थान हो सकता है।  गांव के बिल्कुल नजदीक और खेल मैदान के दाएं बाएं दोनों सीनियर सेकेंडरी स्कूल का होना इसका एक प्लस पॉइंट भी है।

2.राम तलाई के आसपास की चर्चा – गांव के ही कुछ युवा बालिका स्कूल के नए भवन के लिए राम तलाई के आसपास वहीं कहीं पर बनाए जाने की पुरजोर मांग करते है । एक दृष्टि से देखा जाए तो इस संभावना से नकारा नही जा सकता है ।

3 देवगांव गेट की चर्चा- चर्चा यह भी की जाती है कि देवगांव गेट बस स्टैंड पर उचित होगी आपका विचार भी उचित हो सकता है पर शायद यह जगह कम है ।

4.स्कूल के बाग की चर्चा– कुछ लोगो द्वारा स्कूल के बाग में भी बनाया जाने की बात होती है सलाह,विचार दिया जाता है यह कितना सही है कितना नही विचारणीय है ।

5.सामाजिक सरोकार – समाज के एक ऐसे अंग जिसका सामाजिक सरोकार से बहुत ही गहरा नाता रहा है। उनके सहयोग की संभावनाओं को भी नकारा नहीं जा सकता । बस आवश्यकता है तो समाज के लोगों और स्थानीय प्रशासन के द्वारा एक सकारात्मक प्रयास व पहल करने की ।

सवाल यह भी है और किया भी जा रहा है कि  चिकित्सा विभाग अपनी जमीन देगा ?अरे भाई विभाग जमीन देगा या नहीं देगा ? माना प्रक्रिया थोड़ी कठिन है लेकिन यह सरकार और विभाग व जन प्रतिनिधियों की समस्या है । यह सरकार और विभाग पर ही छोड़ देना चाहिए ।

  • जितना जरूरी चिकित्सालय,उतना ही जरूरी बालिका स्कूल 

समाज और आमजन के लिए जितना जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होना है,उतनी ही जरूरत बालिका शिक्षा की भी है। बालिकाओं को शिक्षा का उचित वातावरण मिले, उचित शिक्षा मिले, आवागमन में किसी प्रकार की समस्याओं का सामना ना करना पड़े, इन सबके लिए एक उचित जगह की आवश्यकता है। अब इस जरूरत और उस आवश्यकता के बारे में आम जनता,अभिभावकों ,स्थानीय प्रशासन, जन प्रतिनिधियों को ही सोचना है । 

अगर आम जनता वर्तमान अस्पताल भवन में या इसी प्रकार के कोई उचित स्थान पर बालिका स्कूल के नवीन भवन निर्माण की मांग करें तो रास्ता मुश्किल नहीं है बस आवश्यकता है तो इच्छाशक्ति की है । एक उचित सोच के साथ आगे बढ़ने की। 

  • आपका निर्णय ही दशा व दिशा निर्धारित करेगा 


गांव की लंबे समय से मांग थी कि बालिका स्कूल को सीनियर स्कूल में क्रमोनत किया जाए । लंबे इंतजार के बाद वह फल मिला है । अगर नवीन भवन के लिए उचित निर्णय नहीं होता है तो यह अंदेशा है  कि कहीं यह स्कूल फ्लॉप ना हो जाए । ऐसा की आज कई भवन उचित जगह पर नही होने से खाली औऱ बेकार पड़े है । जिस उद्देश्य से स्कूल बननी है उस उद्देश्य को मध्य नजर रखते हुए  निर्णय हो । बालिकाओं के लिए पृथक सीनियर सेकेंडरी स्कूल के सपने सजाए थे कहीं बस सपने चकनाचूर ना हो जाए । बालिका स्कूल का नया भवन जहां कहीं भी बने पर स्थान उचित हो ।

  • एक विनम्र अपील 

विद्यालय भवन, उसके लिये जगह के बारे में जो कुछ भी निर्णय हो वह आम जनता,जनप्रतिनिधियों और प्रशासन निर्णय होगा लेकिन इस संवेदनशील मुद्दे पर एक बार विचार जरूर करना।  यह समाज के एक मार्मिक पहलू से जुड़ा हुआ सवाल है । बड़ी संजीदगी से इस पर विचार करना । आखिर सवाल गांव का है, सवाल गांव के विकास का है, सवाल गांव की बहन- बेटियों का है , सवाल बालिका शिक्षा का है। 

By admin

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