काव्य – अब जमाना बदल गया
तंग गलियां तन पे बेहया लिबास देख रहा हूँ ,सच जमाना बदल गया आँखों देख रहा हूं ! प्यासी नदियां बिलखती नग जमी दोख हुए ,मधुवन में दावानल सुलगती आंखों…
मजदूर दिवस पर विशेष- वो बेचती लकड़ियाँ
@ गोविन्द नारायण शर्मा वो जंगल से लकड़ियाँ बेचकर घर चलाती हैं,पालने को बच्चे मालिक की चक्की चलाती हैं ! छाले पड़े हाथों से लकड़ियाँ काटने जाती है ,बूढ़े कन्धों…
प्रणय मिलन
@ गोविन्द नारायण शर्मा ख्वाब मल्लिका सुखद प्रणय दीदार कब होगा,ओ मेरी हृदेश्वरी तेरा ये शृंगार कब पूरा होगा! तेरे माथे की बिंदियां प्राची में उदित भानु सी,मुखचन्द्र बिखरी अलकें…
मुकम्मल नफ़रत
@ गोविन्द नारायण शर्माछोटी छोटी बातों में मुझे पड़ना नही आता ,तू ये न समझ की मुझे लड़ना नही आता! बेकार है तमाम तालीम उस जनाब की,गमजदा लोगो के चेहरे…
काव्य – बावरा मन !
दिल भरा सा है फिर भी तेरे बिन खालीपन,अज़ीब सन्नाटा ना जाने क्या चाहे यह मन! रोना बहुत चाहता बैचेन उद्विग्न नादाँ मन ,क्या खता हुई हमसे ना समझे बावरा…
भूली बिसरी बातें -गांव में अब यह नही
गाँवां में वो पहले जैसी चौपाल अब नही,बरगद छांव नीचे ठहरती अब बारात नही! बींद बिंदोला जिमें नी जुआजुई खेल नही,बींदणी न लेबा पहला पावणां आवे नही! पनघट पर पनिहरिणों…
काव्य – तुझ बिन विरहन
तेरी चाहत दिल मे दबी पालूँ सेजाँ मिलन री प्रीत,खेलूँ तुझ संग बाजी प्रेम की तू हारे मैं जाऊं जीत! चाहत में तेरी सजन बंधी मन मिलन एक तरंग,तू कब…
काव्य – ज़ालिम यादें
तड़पती मेरे ख़ातिर पर मुझे खबर होने नही देती,वो मेरी उल्फत में हैं पर उजागर नही होने देती! ज़ालिम ऐसी सजाएँ कौन देता हैं आशिकों को ,जिसकी ताउम्र अदालत में…
विद्रोह
सर्वहारा की बात जब अनसुनी की जाये !बहरो के आगे ढोल नगाड़े बजाये जाये !! अमीरों की कोठियों से धन निकाला जाये!भूखों को उनके हक को उकसाया जाये !! कब…
काव्य – मावठ की बूंदे
शिशिर मावठ ठिठुरन हाड़ कँपाती लहूँ जमाती,खुले अम्बर के नीचे चिथड़ों में गरीबी रात बिताती! डगमग डगमग गरदन हाले दांत बजे ज्यों खरताल,नासा रन्ध्र जम गई मुखविवर भट्टी सा सुलगे…