नज़रिया क्या है

जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि की कहावत तो आपने सुनी ही होगी । आप की दृष्टि से ही आपका दृष्टिकोण बनता है और दृष्टिकोण का मतलब यहां किसी कार्य को करने उसके बारे में विचार रखने उस बारे मेें आपकी सोच से है। आपके नजरिये  से ही आपका दृष्टिकोण बनता है,और जैसा आपका नजरिया होगा नजारे वैसे ही होंगे । आपका नजरिया आपका दृष्टिकोण आपकी सोच ही यह तय करेगा कि आप कितने खुशहाल रहते हैं आप अपनी जिंदगी को कितने बेहतरीन तरीके से जीते हैं।अगर आप खुशहाल जिंदगी जीना चाहते हैं तो अपना नजरिया बदल लिजिए नजारे तो अपने आप ही बदल जाएंगे । नजरिये से जुड़ा एक प्रेरणादायक प्रसंग कुछ इस प्रकार है।

  • एक प्रेरणादायक प्रसंग


आज में अपनी बात एक प्रसंग के द्वारा आप तक पहुचाने की कोशिश करता हूँ। प्रसंग कुछ इस प्रकार है कि– एक समय की बात है लगभग 50 घरों की एक ढाणी/ बस्ती हुआ करती थी। शहर से बहुत दूर इस ढाणी/बस्ती में न तो लाइट की व्यवस्था थी और न सड़के थी, न किसी  प्रकार की कोई सुख और सुविधाएं । आधुनिकता से बहुत दूर इस गांव का एक व्यक्ति काम धंधे से कमाने खाने के लिए किसी बड़े शहर में गया और कुछ समय के बाद लौटते समय वह शहर से धूप से चार्ज होने वाली लाइट लेकर आया । उस लाइट को उसने अपने घर के मुख्य द्वार पर लगा दी। यह देखकर गांव के बाकी सभी व्यक्तियों ने जो कि अंधेरे में रहने के आदी  हो गए थे । उनकी अलग अलग प्रतिक्रिया हई।

  • नजरिया अपना अपना

गांव में पहली बार किसी के घर मे रोशनी हुई थी। उसके बारे में लोगो की क्या प्रतिक्रिया होगी । अब गांव वाले और उसके परिचित लोगो के सामने तीन रास्ते थे जो उनके नजरिये,उनकी सोच पर निर्भर करता है कि वो किस रास्ते को अपनाते है।
(1)पहला रास्ता तो यह था कि उस व्यक्ति से प्रेरणा लेकर  वह भी शहर जाए और अपने लिए भी चार्जेबल लाइट लेकर आए। 

(2) दूसरा रास्ता था कि उनको अपना काम करने दो और आप अपना काम करे,सब अपने अपने तरीक़े से अपना जीवन जीये। 

(3) समाज मे कुछ लोग ऐसे भी थे जो शहर जाकर धूप से चार्ज होने वाली लाइट लाने या अपना काम करने की बजाय उस व्यक्ति की आलोचना करने ,लाइट को तोड़ने फोड़ने व नुकसान पहुँचाने की सोच रखते थे। इसके लिए तरह-तरह के तरीके ढूंढने लगते है।

तीसरे रास्ते जैसा प्रयास वही लोग करते हैं जो किसी की बराबरी करने का साहस नहीं रखते या उनके मन मस्तिष्क में आवश्यकताओं औऱ क्षमता से अधिक अपेक्षाएं घर कर जाती है । बस यही वो लोग है जिनका नजरिया उनकी नकारात्मकता को दर्शाता है।

  • जैसा चश्मा होगा वैसी दिखेगी दुनिया

आप की नजरों, आपकी सोच, आपके दृष्टिकोण से ही आपका नजरिया बनता है । किसी ने सच ही कहा है कि जिस प्रकार का चश्मा आपकी आंखो पर चढ़ा है, दुनिया आपको वैसे ही नजर आएगी ,अगर आपकी आंखों पर काला चश्मा है, तो काली दुनिया नजर आएगी और अगर आपकी आंखों पर रंगीन चश्मा चढ़ा है,तो दुनिया रंगीन नजर आएगी । अब यह आप पर निर्भर करता है ,आपके नजरिए पर निर्भर करता है कि आप अपनी आंखों पर किस प्रकार का चश्मा चढ़ाना चाहते हैं।
यह आप पर निर्भर करता है कि आप भी किसी से प्रेरणा लेकर अपने उत्कृष्ट कार्यों से आगे बढ़ने का प्रयास करेंगे या किसी को गिराने की सोच रखकर उसकी नजरों में आप खुद गिरना चाहेंगे। 

  • नजरिया बदल लो नजारे अपने आप बदल जाएंगे

आपके नजरिये से किसी को कोई फर्क नही पड़ने वाला आपको यह सोचना होगा कि-  जब- जब आसमान में बिजलियां चमकती है तो गधे लात मारते हैं, अब उन गधो को यह सोचना चाहिये कि उनके लात मारने से बिजलियां चमकना बंद कर देगी क्या?  उनकी तो प्रकृति ही चमकना है,वह तो चमकेगी । 
नकारात्मक नजरिया रखने वाले व्यक्ति नकारात्मक कार्यों में ही अपनी ऊर्जा को नष्ट कर देते हैं । वह खुद भी अपना वक्त बर्बाद करते हैं। इसलिए आवश्यकता है कि ऐसा इंसान अपना नजरिया बदल ले । आपके नजरिए से आपके नजारे अपने आप ही बदल जाएंगे । हर व्यक्ति अपने प्रयासों से अपनी मेहनत से आगे बढ़ता है अगर आप भी आगे बढ़ना चाहते हैं तो अपना नजरिया बदल लीजिए । दुनिया वालों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने की सोच रखनी होगी।  यह सोच ही आपका भविष्य बना सकती है और आपका भविष्य बिगाड़ भी सकती है । किसी ने सच ही कहा है कि पैर की चोट, इंसान की छोटी सोच, नजरों में उसकी खोट, उसे कभी आगे बढ़ने नहीं देती है। अब यह आपके नजरिये पर निर्भर करता है कि आप किस रास्ते को अपनाते है ।

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