उप प्रधानमंत्री

भारतीय संविधान के अनुसार देश में संसदीय शासन प्रणाली का प्रावधान किया गया है जिसमें वास्तविक कार्यपालिका और नाम मात्र की कार्यपालिका का भेद होता है। संविधान के अनुच्छेद 74 के अनुसार राष्ट्रपति को उसके कार्यों में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्री परिषद होगी जिसका मुखिया प्रधानमंत्री होगा और राष्ट्रपति उसी मंत्री परिषद की सलाह के अनुसार ही कार्य करेगा ।

केंद्रीय मंत्री परिषद में प्रधानमंत्री के अतिरिक्त (1) कैबिनेट मंत्री (2) राज्यमंत्री (१.स्वतंत्र प्रभार ,२.सहायक) (3) उप मंत्री होते है। इन सब के अतिरिक्त समय-समय पर भारतीय राज्य व्यवस्था में उप प्रधान मंत्री पद का भी अस्तित्व रहा है और नियुक्ति होती रही है। सच्चाई का दूसरा पहलू यह भी है कि उप प्रधानमंत्री का पद का प्रावधान संविधान के बाकी प्रावधानों से थोड़ा अलग है और थोड़ा हटकर है । आइए जानते हैं भारतीय उप प्रधानमंत्री के बारे में उन अनछुए पहलुओं को जिनको आप जानना चाहते हैं ।

संविधान में उप प्रधानमंत्री पद का उल्लेख

केंद्रीय मंत्री परिषद में प्रधानमंत्री, कैबिनेट मंत्री,राज्य मंत्री और उपमंत्री पद का प्रावधन संविधान में हैं लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि भारतीय संविधान में उप प्रधानमंत्री पद का कहीं कोई उल्लेख नहीं है ।अतः इस पद को हम गैर संवैधानिक पद भी कह सकते हैं । हर चुनाव के बाद जब सरकार का गठन होता है तो हर बार इस पद को भरने की कोई संवैधानिक अनिवार्यता भी नहीं होती फिर भी समय समय पर इस पद का अस्तित्व रहा है इस पद पर नियुक्ति होती रही है । यह कैबिनेट का वरिष्ठतम मंत्री होता है जिसे प्रधानमंत्री के बाद, सबसे वरिष्ठ माना जाता है।

उपप्रधान मंत्री की नियुक्ति

मंत्री परिषद के सदस्यों प्रधानमंत्री और अन्य मंत्रियों के बारे में प्रावधान है और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75 के अनुसार प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी तथा उनके परामर्श पर ही अन्य मंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा ही की जाएगी । आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि संविधान के किसी भी अनुच्छेद में उप प्रधानमंत्री की नियुक्ति का कोई प्रावधान नहीं है ।


सामान्यतया प्रधानमंत्री के द्वारा ही कैबिनेट स्तर के मंत्री को उप प्रधानमंत्री का दर्जा दिया जाता है । यह एक वरिष्ठतम मंत्री होता है । जब किसी पार्टी में प्रभावशाली व्यक्तित्व और राजनीतिक महत्वकांक्षा रखने वाले व्यक्ति एक से अधिक होते हैं या किसी भी प्रकार के राजनीतिक गठबंधन के परिणाम स्वरूप मंत्री परिषद के गठन के दौरान इस प्रकार की परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती है कि प्रधानमंत्री के द्वारा ऐसे व्यक्ति को उप प्रधानमंत्री का दर्जा देना पड़ सकता है। उप प्रधानमंत्री की नियुक्ति पूर्णतया तत्कालीन राजनीति, राजनीतिक समीकरण और परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

उप प्रधानमंत्री पद की शपथ ?

मंत्री परिषद के सदस्यों के द्वारा ली जाने वाली शपथ का प्रावधान भारतीय संविधान की तीसरी अनुसूची में उल्लेखित है। प्रधानमंत्री और अन्य मंत्रियों को राष्ट्रपति के द्वारा पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई जाती है लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा उप प्रधानमंत्री के रूप में शपथ का कोई प्रावधान संविधान में नहीं है। क्योंकि जब इस पद का उल्लेख संविधान में है ही नहीं तो शपथ का उल्लेख स्वाभाविक रूप से संविधान में नहीं होगा । सामान्यतया उप प्रधानमंत्री के पद पर नियुक्त होने वाला व्यक्ति उप प्रधानमंत्री पद की नहीं बल्कि एक कैबिनेट स्तर के मंत्री की शपथ लेता है ।

ध्यातव्य– भारतीय राजव्यवस्था के इतिहास में एक बार 1989 में वी पी. सिंह मंत्रि परिषद के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान जब तत्कालीन राष्ट्रपति आर. वेंकटरमन के द्वारा शपथ दिलाई जा रही थी तब चौधरी देवी लाल अपने द्वारा ली जाने वाली शपथ में कैबिनेट मंत्री शब्द का प्रयोग न करके उप प्रधानमंत्री शब्द का प्रयोग किया था जिस पर आपत्ति भी दर्ज हुई थी यह मामला कोर्ट तक भी चला गया था ।

उप प्रधानमंत्री किसके प्रति उत्तरदायी होता है ?

मंत्री परिषद के सदस्य सामान्यतः सामूहिक रूप से लोक सभा के प्रति और व्यक्तिगत रूप से राष्ट्रपति के प्रति उत्तरदायी होते हैं लेकिन उप प्रधान जो कि एक कैबिनेट मंत्री ही है । एक कैबिनेट मंत्री के रूप में तो वह व्यक्तिगत रूप से राष्ट्रपति के प्रति ही उत्तरदायी होता है लेकिन उप प्रधान मंत्री के रूप में वह व्यक्तिगत रूप से प्रधानमंत्री के प्रति उत्तरदायी होता है।

अब तक कब और कितने रहे उप प्रधानमंत्री ?

निसंदेह भारतीय संविधान में उपप्रधानमंत्री पद का उल्लेख नहीं है फिर भी देश में पहली बार सरकार बनने से लेकर अब (2021) तक कुल 07 व्यक्ति 08 बार अलग-अलग प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में उप प्रधानमंत्री पद पर रहे हैं।

अब तक कौन और कब रहे देश के उपप्रधान मंत्री

सरदार वल्लभभाई पटेल

देश की स्वतंत्रता के पश्चात जब पंडित जवाहरलाल नेहरू देश के प्रधानमंत्री थे । उस समय देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल को देश का पहला उप प्रधानमंत्री बनाया गया था । जिनका कार्यकाल 15 अगस्त 1947 से 15 दिसंबर 1950 तक रहा ।

  • सरदार वल्लभ भाई पटेल का पूरा नाम सरदार वल्लभभाई झावेर भाई पटेल था । सरदार पटेल देश के उप प्रधानमंत्री बनने वाले पहले व्यक्ति थे ।

मोरार जी देसाई

स्वतंत्रता के बाद जब देश में पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी बनी थी तब उनके कार्यकाल में मोरारजी देसाई को देश का दूसरा उप प्रधानमंत्री बनाया गया था। उप प्रधानमंत्री के रूप में इनका कार्यकाल 13 मार्च 1967 से 19 जुलाई 1969 तक रहा । मोरारजी देसाई उप प्रधानमंत्री के रूप में कार्य करने वाले दूसरे व्यक्ति थे।

  • मोरारजी देसाई को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न तथा पाकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान निशा ए पाकिस्तान से सम्मानित किया गया था।
  • इन्होंने चेटफ़ील्ड नामक ब्रिटिश कलेक्टर (ज़िलाधीश) के अंतर्गत कार्य किया ।
  • यह ऐसे एकमात्र प्रधानमंत्री और उप प्रधानमंत्री है जिनका जन्म दिन 4 वर्ष में एक बार आता है क्योंकि इनका जन्म 29 फरवरी 1896 में हुआ था ।

जगजीवन राम

मोरारजी देसाई के प्रधानमंत्रीत्व कार्यकाल में पहली बार दो उप प्रधान मंत्री बनाए गए थे । जिनमें एक नाम जगजीवन राम जी का भी था उप प्रधानमंत्री के रूप में इनका कार्यकाल 24 जनवरी 1979 से 28 जुलाई 1979 तक रहा । जगजीवन राम उपप्रधानमंत्री के रूप में कार्य करने वाले देश के तीसरे व्यक्ति थे।

  • 5 अप्रैल 1908 को बिहार में जन्मे जगजीवन राम जी को बाबूजी के उपनाम से भी जाना जाता था ।
  • जगजीवन राम देश के प्रथम दलित उप प्रधानमंत्री थे।

चौधरी चरण सिंह

मोरारजी देसाई की प्रधानमंत्रीत्व में जो दो उप प्रधान मंत्री बनाए गए थे उनमे से एक बाबू जगजीवन राम जी थे तथा दूसरे उप प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह थे । इनका भी कार्यकाल जगजीवन राम जी की तरह ही 24 जनवरी 1979 से 28 जुलाई 1979 तक था । मोरारजी देसाई सरकार में दूसरे उप प्रधानमंत्री बनाए जाने वाले चौथे व्यक्ति थे ।

  • ये किसानो के सच्चे नेता थे जिनका जन्म 23 दिसंबर 1902 को उत्तर प्रदेश में हुआ था ।
  • इनकी लिखित पुस्तक ‘‘शिष्टाचार‘‘, भारतीय संस्कृति और समाज के शिष्टाचार के नियमों का एक बहुमूल्य औऱ जीवंत दस्तावेज है।

वाई.वी. चव्हाण

सन 1979 में जब चौधरी चरण सिंह देश के प्रधानमंत्री बने तब उन्होंने वाई.वी. चव्हाण को अपनी सरकार में उप प्रधानमंत्री बनाया था । उप प्रधानमंत्री के रूप में इनका कार्यकाल 28 अगस्त 1979 से 14 जनवरी 1980 तक रहा। तथा उप प्रधान मंत्री के रूप में ये पाँचवे व्यक्ति थे।

चौधरी देवी लाल

सन 1989 में जब केंद्र में वीपी सिंह सरकार थी तब चौधरी देवी लाल को देश का प्रधानमंत्री बनाया गया था । उप प्रधानमंत्री के रूप में पहला इनका कार्यकाल 2 दिसंबर 1989 से 1 अगस्त 1990 तक रहा । उप प्रधानमंत्री के पद को सुशोभित करने वाले छटवे व्यक्ति थे ।

चौधरी देवी लाल

सन 1990 में जब केंद्र में चंद्रशेखर प्रधानमंत्रीत्व मैं सरकार बनी तब चौधरी देवी लाल को दूसरी बार उप प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया गया था । दूसरे कार्यकाल में उप प्रधानमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल 10 नवंबर 1990 से 21 जून 1991 तक रहा

  • ज्ञात हो कि चौधरी देवीलाल एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जो अब तक देश में दो बार उप प्रधानमंत्री पद पर रहे ।पहली बार वी.पी .सिंह सरकार के कार्यकाल में और दूसरी बार चंद्रशेखर के प्रधानमंत्री कार्यकाल में ।

लाल कृष्ण आडवानी

जब केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी । उस दौरान जून 2002 में देश के तत्कालीन गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को उप प्रधान मंत्री का दायित्व सौंपा गया था । उप प्रधानमंत्री रूप में उनका यह कार्यकाल 29 जून 2002 से 22 मई 2004 तक रहा था। ज्ञात हो कि लालकृष्ण आडवाणी देश के सातवें ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने देश के उप प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया।

इस राज्य से रहे सर्वाधिक उप प्रधानमंत्री

स्वतंत्रता के बाद जब केंद्र में पहली बार सरकार गठित हुई तब से लेकर वर्तमान समय तक सात व्यक्तियों ने देश के उप प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया है । उनमें से गुजरात राज्य से सर्वाधिक तीन उप प्रधानमंत्री रहे हैं । जिनमें सरदार वल्लभ भाई झावेर भाई पटेल , मोरारजी देसाई तथा लालकृष्ण आडवाणी रहे हैं ।

सर्वाधिक और न्यूनतम कार्यकाल वाले उप प्रधानमंत्री

देश मे पहली बार सरदार वल्लभ भाई पटेल को उप प्रधानमंत्री बनाए जाने से लेकर अब (2021) तक के अंतिम उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी में से सर्वाधिक लंबे कार्यकाल के लिए उप प्रधानमंत्री रहने वाले व्यक्ति सरदार वल्लभ भाई पटेल हैं जिन्होंने लगभग 3 वर्ष 4 माह तक इस पद पर कार्य किया तथा जहां तक न्यूनतम कार्यकाल वाले उपप्रधानमंत्री की बात है तो अब तक के प्रधानमंत्रियों में से सबसे न्यूनतम कार्यकाल मोरारजी देसाई का रहा है जिन्होंने लगभग 5 माह 6 दिन तक इस पद पर कार्य किया था ।

ध्यातव्य

  • देश में अब तक 7 प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में उप प्रधानमंत्री पद का सृजन किया गया ।
  • मोरारजी देसाई और चौधरी चरण सिंह ऐसे उप प्रधानमंत्री है जो आगे चलकर देश के प्रधानमंत्री भी बने।
  • चौधरी देवीलाल देश के एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने दो प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में उप प्रधानमंत्री के रूप में काम किया ।

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published.

You cannot copy content of this page