काव्य/मुक्तक/कविता: “ऋतु राज बसंत”
खेतों में सरसों लहराये आई ऋतु बसन्त। पीले परिधान सजी धरा दुल्हन दिगन्त।। मरु माटी टेसू पल्लव जगे उल्लास लिए। बल्लरी उलसित आलम्बन आस लिए।। हरित रंग पहर घाघरा पीली…
(M.A. B.ED, NET, SET, Ph.d, LL.B)
खेतों में सरसों लहराये आई ऋतु बसन्त। पीले परिधान सजी धरा दुल्हन दिगन्त।। मरु माटी टेसू पल्लव जगे उल्लास लिए। बल्लरी उलसित आलम्बन आस लिए।। हरित रंग पहर घाघरा पीली…
समस्याओं से घबराकर भाग जाने से अच्छा है जरूरत पड़ने पर सामना करें lसमस्या किसके जीवन में नहीं आती है इस संसार में हर व्यक्ति कहीं ना कहीं किसी न…
ख़ुश्क आंखों में नए ख़्वाब सजाने आई , पलके नींद से बोझिल हुई तेरी याद आई ।। वक्त की धूप ने झुलसा दिया जब चेहरा मेरा। काली घटा सी तेरी…
26 जनवरी गणतन्त्र दिवस महान।। चहुंओर तिरंगा लहराए आसमान, सब जन मिल गाए पावन राष्ट्रगान।। वीरों ने हंसते हुए अपने प्राण गंवाएं, संविधान से अधिकार हमें दिलाएं।। हम सब मिलकर…
शंभू कंठ सम सागर नीला आकाश , उभय मिलन मानो क्षितिज अभ्यास! श्वेत पट्टिकाएं सोहे ज्यों निहारिकाएँ अम्बर भाल त्रिपुण्ड विलसती उल्काएँ! अम्बर मेघ मल्हार उमड़ घुमड़ आये, सखि पिया…
वो महकती ज़ुल्फ़ घनेरी कजरे गहरे नयन,सुर्ख गुलाबी होंठ धवल चांदनी गोरा बदन ! तारों भरी रात मलयज महकी बहती बयार,उसकी पायल की रुनझुन वीणा की झंकार! कस्तूरी मृग सा…
इतरा रहा है गेसुओं की खुशबू पाकर खत तेरा,गेसुओं को खुला रख लिखा होगा खत तूने! चाय सी गुनगुनी गर्माहट है तेरे इन लबों में ,जाड़े का मौसम हैं जरा…
विद्या ददाति विनियम …. केवल श्लोक नहीं वरन जीवन निर्वाह का सूत्र,संस्कृत का यह उद्धरण एक श्लोक नहीं वरन जीवन के क्रमिक निर्वाह की अवधारणा का एक सार सारगर्भित लेख…
बड़ी सीधी साधी पर कमाल की रूपसी थी वो , बिन शृंगार ही जन्नत की हूर लगती थी वो!!१ कतरा भर पढा था उसकी कातिल निगाहों को , नश्तर सी…
यूँ चुप न रहोअच्छा बुरा चाहे कुछ तो बोलो,मेरी खता नादानियां शिकवे कुछ तो बोलो ! सनम गम नाजुक जहन में दबाकर न रखो,कोई सुन न ले होले होले से…
You cannot copy content of this page