काव्य/मुक्तक/कविता: ऐसी थी वो…..
बड़ी सीधी साधी पर कमाल की रूपसी थी वो , बिन शृंगार ही जन्नत की हूर लगती थी वो!!१ कतरा भर पढा था उसकी कातिल निगाहों को , नश्तर सी…
(M.A. B.ED, NET, SET, Ph.d, LL.B)
बड़ी सीधी साधी पर कमाल की रूपसी थी वो , बिन शृंगार ही जन्नत की हूर लगती थी वो!!१ कतरा भर पढा था उसकी कातिल निगाहों को , नश्तर सी…
यूँ चुप न रहोअच्छा बुरा चाहे कुछ तो बोलो,मेरी खता नादानियां शिकवे कुछ तो बोलो ! सनम गम नाजुक जहन में दबाकर न रखो,कोई सुन न ले होले होले से…
रंग बिरंगी होली आयी,गोरी सतरंगी बनठन आयीगुब्बारे में प्रेमरंग भरके लायीमस्तानो की टोली आयी, क़ातिल निगाहे गजब डाहे,गोरी रंग मलती बाहँ उठायेभीगी चुनरी चोली खेलो होली नैन नशीले बदन गठीला,पिया…
चाहत दिलों में हो तो झलकती जरुर है!!खिलती है जब कली तो महकती जरुर है!! रखिये हज़ार बंदिशें अमानत को इश्क की,लेकिन ये अश्क बन के छलकती जरुर है !…
हर मुलाकात पर वक्त का तकाज़ा हुआ,हर याद पे दिल का दर्द ताजा हुआ!सुनी थी सिर्फ हमने गज़लों मे जुदाई की बातें,अब खुद पे बीती तो हकीकत का अंदाजा हुआ।…
शब्द ब्रह्म हूँ अजर अमर स्फोट अविनाशी ,परा पश्यंती मध्यमा बेख़री व्योम का वासी! बादलो की गरजन वेणु की मधुर धुन में हूँ ,तबले की थाप में गायक की हर…
शब्द ब्रह्म हूँ अजर अमर स्फोट अविनाशी ,परा पश्यंती मध्यमा बेख़री व्योम का वासी! बादलो की गरजन वेणु की मधुर धुन में हूँ ,तबले की थाप में गायक की हर…
एक पल का एहसास बन कर आती हो तुम ,दूसरे ही पल ख़्वाब बन उड़ जाती हो तुम ! जानती हो लगता हैं डर मुझे तन्हाइयों से ,फिर भी हर…
एक बार सभी आइने अपनी उपेक्षा से दुखी होकर मृत्यु लोक से विदा लेकर स्वर्ग लोक में चले गए ! वहां सृष्टी के निर्माता ब्रम्हा जी को अपनी व्यथा सुनाने…
रात रुक जाने की फरियाद करते रह गये, वो अनमने से भाव लिए सुबकते रह गये! दिल में बड़ी ख्वाहिशें संजोये उनकी तरफ से, हम से बेहतर कोई मिला शायद…
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