स्वर्ग से सुंदर हो परिवार हमारा

स्वर्ग से सुंदर हो घर अपना एक ऐसा काम तुम जरूर करना और किसी भी परिवार को स्वर्ग से सुंदर और मंदिर जैसा बनाया जा सकता है बस आवश्यकता होती है तो उस मंदिर का पुजारी बनने की । स्वर्ग से सुंदर घर होने से तात्पर्य यह है कि जिस परिवार में सुख, शांति, समृद्धि, परिवार के सदस्यों के आपसी प्रेम भाव का होने से है। 

जिस घर में निब्बे वर्ष से अधिक उम्र का बुजुर्ग भी भगवान से यही प्रार्थना करे कि कुछ दिनों के लिए और जीवन मिल जाए  वह स्वर्ग और जिस घर में अशांति, क्लेश हो और जिस घर में 20 वर्ष का युवा भी आत्महत्या की कोशिश करने लगता है उस घर को नरक बताया जाए  तो कोई अतिश्योक्ति नही।बस यही फर्क होता है स्वर्ग और नरक जैसे परिवार का । परिवार के सदस्य और उनकी सोच ही किसी परिवार को स्वर्ग और नरक बनाती है।

  • दादी की यादगार कहानी

सनातन संस्कृति वाले भारतीय समाज में कहावतें,परिपाटियां, संस्कारों ,दादी -नानी की कहानीयां, दादी- नानी के किस्सो का भी महत्व है । सामाजिक सरोकार से जुड़ी हुई कहानियां ही हमारे परिवार का समाजीकरण करती है।  कहांनियो से याद आया दादी एक कहानी सुनाया करती थी वह प्रेरणादायक कहानी में आपके साथ साझा करता हूँ।।  कुछ इस प्रकार से थी  दादी की कहानियां जो हमें जीवन मे मार्गदर्शन करती है।

  • सेठ के घर का नारकीय था माहौल

एक समय की बात है किसी कस्बे में एक धनी सेठ रहा करता था । घर में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं थी । सेठ के 4  पुत्र थे जिनमे से  तीन पुत्रों की बड़े धूमधाम से शादी भी कर दी थी । परिवार की तीनों बहुएँ आधुनिक होने के साथ-साथ धनाढ्य परिवार से थी। लेकिन समय के साथ परिवार में कुछ बदलाव आया । मानो परिवार को किसी की नजर लग गई हो । उस धनाढ्य सेठ के परिवार में सुख,शांति कही गुम हो गई सब लोग अपने आप तक सीमित होने लगे थे । 

परिवार में एक दूसरे के प्रति लगाव, संवेदना खत्म सा हो रही थी । परिवार में पारिवारिक कार्यों में सहयोग के भाव खत्म होने , हर कोई घरेलू कार्य से जी चुराने लगे थे । सब कुछ होते हुए भी परिवार एक नरक की तरह लगने लगा था। घर के कामकाज को लेकर भी घर की बहुओं में अक्सर बहस हो जाया करती थी ।एक दूसरे का काम नहीं करती थी । सास ने व्यवस्था बनाए रखने के लिए तीनों बहुओं  को 2- 2 दिन के लिए घर के  कार्य का बंटवारा कर दिया, लेकिन दुर्भाग्य था कि सातवें दिन बूढ़ी सास को घर का सारा काम करना पड़ता था।

  • घर मे आई नई बहू और बदलने लगा घर का माहौल

कुछ दिन बाद सेठ ने अपने सबसे छोटे बेटे की शादी की नई नवेली बहू आई जो कि धार्मिक प्रवृत्ति की एक समझदार और धर्म -कर्म में विश्वास करने वाली लड़की थी।  पहले ही दिन जो घर का माहौल देखा उसे देख कर उसे पीड़ा हुई । उसने कुछ सकारात्मक सोचा और अपने परिवार स्वर्ग से सुंदर बनाने का योजना बनाई । घर परिवार में अपने कार्य, व्यवहार समझदारी और सूझबूझ से ऐसे कार्य किए कि कुछ ही दिनों में परिवार का खोया हुआ चेन व शांति का माहौल वापस लौटने लगा, घर में वापसी प्रेम, सहयोग, सद्भाव पटरी पर आने लगा था।

  • इन पांच कार्यों से नई नवेली बहू घर को स्वर्ग बना दिया ।

नई नवेली बहू ने ऐसे  पाँच कार्य किये कि देखते ही देखते घर स्वर्ग से सुंदर हो गया ।आइए जानते हैं उस नई नवेली बहू ने कौन से पांच कार्य किए।

  • बहु ने किया यह पहला काम

परिवार के सदस्य आज अपने आप तक सीमित होने लगे हैं,वक्त नहीं है उनको साथ मिलकर बैठने, साथ मिलकर बातें करने और साथ मिलकर खाना खाने का । जब साथ नहीं बैठेंगे,साथ नहीं खाना खाएंगे, जब साथ मिलकर बातें नहीं करेंगे तो दूरियां बढ़ना स्वाभाविक है।अपनापन कहीं खो जाना स्वाभाविक है। सबसे छोटी और नई नवेली बहू ने पहले ही दिन दहेज में मिली अपनी टी. वी.(टेलीविजन) को अपने कमरे में न लगाकर ..हॉल में लगवा दिया । शायद इसके पीछे उसका एक उद्देश्य था । आज के इस युग में घर में जितने सदस्य हैं सभी सदस्यों के अपने अपने शयनकक्ष / बेडरूम में अलग टी. वी लगा होता है अगर परिवार के सदस्यों को साथ बैठने साथ खाना खाने का वातावरण देना है तो बहु के इस कदम को अपनाना होगा।

  • बहु ने किया यह दूसरा काम

नई नवेली बहू ने दूसरे दिन रसोई में जाकर घर के सभी सदस्यों के लिए नाश्ता बनाने का कार्य शुरू कर दिया , यह देखकर सास ने कहा कि अरे बहू अभी तो आज ही आई है और आते ही रसोई में खाना बनाने लगी हो, पड़ोसी -रिश्तेदारो ने देख लिया तो क्या कहेंगे।नई नवेली बहू ने बड़ी सहजता से अपनी सासू मां से कहा कि माँ जी आप ही बताइए कि किसी भूखे व्यक्ति को खाना खिलाना पुण्य का काम है या नहीं । सासू मां ने बड़ी शालीनता से कहा कि भूखे को खाना खिलाना तो सबसे बड़ा कार्य है। बहू ने बड़ी सहजता से जवाब दिया कि मेरे परिवार के सदस्य पिछले 12 घंटों से भूखे हैं, उनके लिए खाना बना कर खिलाना पुण्य का काम होगा और इस पूण्य  के काम को में करना चाहूंगी। इस बात को घर परिवार कि तीनो बड़ी बहू  ने भी सुन लिया और पूण्य का फायदा लेने के लिए अगली सुबह सबसे पहले रसोई में जाकर खाना बनाने के काम मे लग गई ।

  • बहु ने किया यह तीसरा काम

अगले दिन नई नवेली बहू ने सुबह सुबह जल्दी उठकर घर में झाड़ू लगाना और साफ सफाई का काम शुरू कर दिया । सास ने देखा तो उससे कहने लगी कि अरे बहु ये क्या कर रही हो अभी नई बहू हो मोहल्ले वालों ने झाड़ू लगाते देख लिया तो क्या कहेंगे हमारी बदनामी हो जाएगी । नई नवेली / सबसे छोटी बहू ने बड़ी सहजता से कहा कि मां जी हम त्योहारों के दिन साफ सफाई करते हैं ताकि घर में लक्ष्मी आएगी, मंदिरों में जाते हैं साफ सफाई का ध्यान रखते हैं, मंदिर में साफ सफाई करने में सहयोग करते हैं ताकि कुछ पूण्य का काम हो सके।  इसलिए मैं हर रोज सबसे पहले उठकर साफ सफाई करना पसंद करूंगी । छोटी बहू की यह बात घर की बाकी तीन बहू ने सुन लिया और उन्होंने सोचा कि यह अकेली ही पुण्य का कार्य करके फायदा ले रही है । अगली सुबह जल्दी उठ कर  तीनो बहुओं ने साफ सफाई का काम सबसे पहले शुरू कर दिया ताकि उन्हें भी कुछ पुण्य मिल सके उनके घर में भी लक्ष्मी का वास हो सके।

  • बहु ने किया यह चौथा काम

घर में आई हुई नई बहू शालीन स्वभाव की थी उसकी दिनचर्या का हिस्सा था सुबह उठते ही घर के बड़े बुजुर्गों को प्रणाम करना, उसके इस कार्य से परिवार के बच्चे, और तीनों बहुवो ने मजाक उड़ाया और उसे कहा कि आज कौन ऐसा व्यक्ति है जो प्रातः उठते ही अपने परिवार के बड़े बुजुर्गों का प्रणाम करते हैं, उनके चरण छूते हैं।  यह सब गए जमाने की बातें हो गई । बहू ने बड़ी शालीनता से जवाब दिया कि जब तक घर के बुजुर्ग माता पिता की सेवा नहीं करेंगे तब तक मंदिर जाकर पूजा पाठ करने से कोई मतलब नहीं और हमारे बच्चे भीहमारे साथ वही व्यवहार करेंगे जैसा हम करते हैं या वे परिवार में देखते है ।  कुछ दिन इस प्रकार से चलता रहा घर के बुजुर्ग नई नवेली बहू के इन कार्यों से खुश होकर उसे उपहार में कीमती वस्तु दी और  पड़ोसी के सामने अपनी नई नवेली बहू की बधाई करते नहीं थकते थे । यह सब कुछ जब घर की बाकी तीन बहुवो ने देखा तो उनको इस बात का एहसास हुआ कि यही घर परिवार की लाडली बहू बन रही है । पड़ोसीयो के सामने, रिश्तेदारों के सामने उसकी बढ़ाई की जाती है। कई हम बुरे ना बन जाए इसीलिए उन्होंने भी छोटी बहू का अनुसरण करना शुरू कर दिया।  देखते ही देखते यह परिवार में एक परिपाटी बन गई और बच्चों ने देखा तो उन्होंने भी इसे अपना लिया ।

  • बहु ने किया यह पांचवा काम

नई नवेली बहू का व्यक्तित्व धर्म -कर्म में विश्वास करने वाला, शालीन, सौम्यता का पर्याय और प्रेम तथा सहयोग की भावनाओं से सराबोर था । उसका सबसे बड़ा गुण था उसकी सहनशीलता ।  परिवार है परिवार में छोटी मोटी बातें होती रहती है लेकिन उसने कभी किसी को पलट कर जवाब नहीं दिया और हर उस समस्या का समाधान  आपसी प्रेम और सहयोग से किया ।

नई नवेली बहू ने अपनी जेठानीयो के कार्यों की कभी बुराई नहीं की बल्कि उनके कार्यों की बढाई ही किया करती थी । इसलिए बहुत ही जल्दी घर- परिवार ,आस-पड़ोस रिश्तेदारों में उस बहू ने एक जगह बना ली । प्रेम और आपसी सहयोग से उस बहू ने बाकी तीन बड़ी बहूओ का भी दिल जीत लिया इस कदम ने अपने और पराए कि जो भावना परिवार में पनप रही थी उसे खत्म कर दिया और अपने बिखरते परिवार को बचा लिया । नई नवेली बहू ने प्रेम ,शालीनता और सहयोग की नीति को अपना हथियार बनाया । 

कुछ ही दिनों बाद घर परिवार का माहौल कुछ बदला-बदला सा नजर आने लगा था और यह सब कुछ हुआ सूज भुज और सहनशीलता प्रेम और सहयोग की भावनाओं से । आखिर अपने तो अपने होते हैं ।

आखिर परिवार तो परिवार होता है, अपने तो अपने होते परिवार में सदस्यों के बीच कुछ मतभेद हो सकते हैं लेकिन उन मतभेदों को मनभेद ना बनाया जाए क्योंकि जब मन भेद बढ़ने लगता है तो परिवार को नरक बनते वक्त नहीं लगता है। छोटी मोटी बातों को दिल से लगाए ,एक दूसरे की भावनाओं को समझें और एक दूसरे का सहयोग करे।

By admin

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