राजस्थान के टोंक जिले में मालपुरा …जयपुर रोड पर डिग्गी ग्राम में कल्याण मंदिर जन-जन की आस्था का केंद्र बना हुआ है जो न केवल राजस्थान बल्कि भारत में भी अपनी अलग ही पहचान रखता है और यहां आयोजित होने वाले मेले को लक्खी मेले के नाम से जाना जाता है । आम जनता में इसे “डिग्गी कल्याण” के नाम से जाना जाता है।  

डिग्गी ग्राम से करीब 59 किलोमीटर टोडा केकड़ी मार्ग पर टोंक जिले और अजमेर जिले की सीमा पर बसे बघेरा में स्थित कल्याणं मदिर अपनी प्राचीनता, ऐतिहासिकता और मंदिर निर्माण में चित्रशैली,कांच की मीनाकारी के कारण अपनी अलग पहचान रखता है, जिसे आमजन में बघेरा कल्याण के नाम से जाना जाता है। 

कैसे पहुंचा जा सकता है बघेरा

बघेरा जयपुर से करीब 145 KM और अजमेर से 80 KM , टोंक से 65 KM दूरी पर केकड़ी टोडारायसिंह मार्ग पर स्थित है।  जहा बस द्वारा पहुंचा जा सकता है। इस क्षेत्र / रूट पर पुष्कर,अजमेर,सरवाड़, बघेरा, बीसलपुर, टोडरायसिंह,टोंक,सवाईमाधोपुर,करोली,जैसे धार्मिक और पर्यटन क्षेत्र आते है।

यहां है कल्याण मंदिर                                            

बघेरा कस्बे के सदर बाजार में भगवान कल्याण का एक प्राचीन मंदिर  स्थित है । इस मंदिर के गर्भगृह में श्वेत संगमरमर की भगवान कृष्ण की एक सुंदर प्रतिमा विराजमान है और इस विशाल मंदिर में उत्तर दिशा की तरफ देखता मुख्य द्वार है। मंदिर के मुख्य द्वार और पश्चिम में झरोखे मंदिर की विशालता को खुद ब खुद बयां करते है। इसके अतिरिक्त मंदिर के चारो कॉर्नर पर चार विशाल और कलात्मक छतरिया हर किसी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर ही लेती है। 

कल्याण मंदिर बघेरा

श्वेत पाषाण की है सुंदर प्रतिमा

मंदिर में श्वेत पाषाण  श्री कल्याण की प्राचीन प्रतिमा विराजमान है जिसका आकार  लगभग 2.1/2 फीट लंबी और 1.1/2 फीट चौड़ी है।  जिसकी बनावट और सुंदरता देखते ही बनती है ।

बघेरा राजपरिवार के समंधियो ने करवाया था मंदिर का निर्माण

इस ऐतिहासिक मंदिर का निर्माण जनश्रुति के अनुसार राजपरिवार के संबधी/ रिश्तेदार ठाकुर साहब ने अपनी पुत्री जो कृष्ण भक्त थी उनके पूजा पाठ के लिए अपने आराध्य देव के इस मंदिर का निर्माण करवाया था।इस बात की ऐतिहासिकता बघेरा के राज परिवार के द्वारा भी बताई जाती है।

ध्यातव्य  निर्माणकर्ता ठाकुर साहब की फोटो आज भी कल्याण मुख्य मंदिर  के गर्भगृह की दीवार की शोभा बढ़ा रही है। ज्ञात हो कि ठाकुर साहब की पुत्री का विवाह  बघेरा राठौड़ परिवार के ठाकुर साहब के साथ हुआ था।

मंदिर निर्माण कब और किस सन में करवाया था इसका प्रमाणित आंकड़े तो उपलब्ध नही है।

इस शैली में बना है बघेरा कल्याण मंदिर

बघेरा राजपरिवार संबंधियों के द्वारा निर्मित इस मंदिर की शैली मारवाड़ शैली थी और इसके झरोखे तथा चित्रकारी और कांच की जड़ाई मंदिर के मुख्य द्वार पर की शोभा बड़ा रही है। इसके अतिरिक्त यह मंदिर शैखावाटी की प्राचीन हवेलीयो की तर्ज पर बना हुआ है। आज देख रेख के अभाव में इसकी चित्रकारी  कांच की नकाशी अपना अस्तित्व खोती जा रही है। 

भाटो की पोथियों के अनुसार

भाटों की माने तो बघेरा कल्याण मंदिर और राज परिवार का  कोई न कोई संबंध डिग्गी के कल्याण मंदिर और राजपरिवार से जरूर ही रहा है। 

One thought on “बघेरा कल्याण: बघेरा का कल्याण मंदिर अपनी ऐतिहासिकता, प्राचीनता और मीनाकारी की वजह से आज भी अपनी अलग पहचान रखता है।”

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