लांगड़िया व बावड़ीयां का शहर टोडा

धोरा की धरती ,वीर प्रसूता और आन- बान- शान और वैभव की धरती राजस्थान राज्य के टोंक जिले में संत पीपा की तपोभूमि टोडारायसिंह शहर में टोडारायसिंह-बघेरा-केकड़ी मार्ग पर स्थित एक ऐतिहासिक और विशाल बावड़ी है। जिसे हाडी रानी की बावड़ी कहा जाता है । ऐसा माना जाता है कि इसका निर्माण 1342 (14 वी शताब्दी)  में टोडारायसिंह के राजा ने करवाया था । इस बावड़ी केे निर्माण और इसे हाड़ी रानी की बावड़ी कहा जाने के पीछे भी एक ऐतिहासिक कहानी है। कहावत भी चली आ रही है कि टोडा की लांगड़िया (शिलाखंड) और बावड़ियां प्रसिद्ध है।

  • सौंदर्य,ऐतिहासिकता,कला,व प्रेम का प्रतीक है हाडी रानी की बावड़ी 

टोडारायसिंह की हाड़ी रानी का कुण्ड/बावड़ी अपने निर्माण, बेजोड़ता व वास्तुकला के लिए आज भी दूर-दूर तक प्रसिद्ध है।यह विशाल ,वास्तुकला का नमूना बड़े बड़े शिलाखण्डों जिन्हें स्थानीय भाषा मे लांगड़िया कहा जाता है उनको कलात्मक ढंग से एक दूसरे पर जमाकर निर्माण किया गया है ।यह लांगड़िया मजबूती के साथ साथ कला का बेजोड़ नमूना साबित करती है । 

यह बावड़ी विशाल आयताकार रूप में नजर आती  है । जिसमें बावड़ी में तीन तरफ सिंढीया और एक तरफ दो मंजिला गलियारे , कमरे हैं जिसमे मेहराब ,गलियारे, चौबारे बने हुए है । जिनमें से प्रत्येक में मेहराबदार द्वार बने है और निचली मंजिल के नीचे ब्रह्मा, गणेश और महिषासुरमर्दिनी के चित्र अंकित हैं। इस बावड़ी  में हमेेशा पानी भरा रहता है जो इसकी सुंदरता को और बढ़ा देती है । इस बावड़ी के बारे में बताया जाता है कि इसके तीन तरफ जो  सीढ़ियां बनी हुई है इनकी बनावट किसी भूल भुलैया से कम नही है। स्थानीय लोगो की माने तो सीढ़ियों से इस बावड़ी में उत्तरने के बाद उन्ही सीढ़ियों से वापस ऊपर की ओर नहीं जाया जा सकता ।

  • कौन थी हाडी रानी

राजस्थान राजा रजवाड़ो का क्षेत्र रहा है यहां की रियासतों, सामंतों,राजा महाराजो का अपना एक इतिहास रहा है । टोडारायसिंह की हाडी रानी के बारे में बताया जाता है कि यह राजस्थान के बूंदी रियासत की राजकुमारी और वहां के राजा देवा हाड़ा की पुत्री थी जो बहुत ही सुंदर थी । जिनका विवाह टोडा के राजा रुपाल सिंह के साथ होना था लेकिन उसी दौर में जेता मीणा नामक व्यक्ति ने  बूंदी के राजा देवा हाडा को युद्ध में पराजित कर दिया बताया जाता हैं कि जेता मीणा बूंदी की राजकुमारी से विवाह करना चाहता था लेकिन टोडारायसिंह के राजा रूपाल सिंह ने जेता मीणा को युद्ध में हराने के बाद ही बूंदी की राजकुमारी से लगभग 1342  में विवाह किया था।  

राजतंत्र में राजा महाराजाओं के समय राज परिवार के कुछ पलों को यादगार बनाने के लिए मंदिर ,महल, स्मारक, कीर्ति स्तंभ, विजय स्तंभ, महल ,छतरियां और राज परिवार की महिलाओं , रानी,महारानी, राजकुमारीयो और राज परिवार की महिलाओं के लिए नहाने और अपनी सहेलियों के साथ घूमने-फिरने और अठखेलियां करने के लिए बाग बगीचे और बावडिया बनाई जाती थी । राजस्थान में ऐसा इतिहास भी रहा है।  बताया जाता है की हाड़ी रानी के लिए इस बावड़ी का निर्माण करवाया गया था।

  • कैसे पहुँचा जा सकता है टोडारायसिंह

टोडारायसिंह राजस्थान के टोंक जिले में स्थित है । जहां जयपुर, टोंक, अजमेर जिला मुख्यालय से अपने निजी वाहन,राजस्थान पथ परिवहन निगम की बसों या निजी बसों से आसानी से पहुंचा जा सकता है । टोडारायसिंह अजमेर-टोंक मार्ग पर अजमेर जिले के अंतिम छोर के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक कस्बे बघेरा से मात्र 15 km दूरी पर है।  यहां पहुँचने के लिए टोंक, जयपुर, मालपुरा, अजमेर ब्यावर,केकडी और बघेरा से हर वक्त निजी बस और राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम की बसें उपलब्ध रहती है। यह कस्बा जयपुर सेे करीब 145 km, टोंक से 45 km,अजमेर से 120 km, की दूरी पर है। 

  • पहेली फिल्म की हुई थी शूटिंग

सन 2004 में अनमोल पालेकर के निर्देशन में शाहरुख खान और रानी मुखर्जी की एक बहुत ही उम्दा फिल्म आई थी जिसका नाम था पहेली । आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि इस फिल्म की शूटिंग टोडारायसिंह की इसी ऐतिहासिक हाडी रानी की बावड़ी पर ही हुई थी। इसी पहेली फिल्म की शूटिंग के पश्चात ही यह बावड़ी बड़ी चर्चा में आई थी। ज्ञात हो कि राजस्थान के जाने-माने साहित्यकार विजयदान देथा की एक रचना जिसका नाम था दुविधा  । इसी रचना की कहानी के आधार पर ही इस फिल्म का निर्माण हुआ था।

  • राष्ट्रीय स्मारक है यह बावड़ी
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग का शिलालेख

हाडी रानी की यह बावड़ी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा सरंक्षित स्मारक घोषित किया हुआ है । यहां पर इसका शिलालेख लगा हुआ हैं । सन 2004 में पहेली फिल्म के निर्माण के पश्चात चर्चा में आई थी और इस बावड़ी की फिर से सौन्दरीकरण और संरक्षण एक नई पहल हुई थी। । फ़िल्म की शूटिंग किए जाने के कारण ही यहां पर्यटक और दर्शकों का तांता लगा रहता है । वर्तमान समय में बावड़ी के आस पास एक बहुत ही सुंदर पार्क है जो बावड़ी के साथ-साथ पर्यटकों की पसंद बना हुआ है ।

  • लांगडियो व बावड़ियों का शहर हैं टोडा

टोडारायसिंह के बारे में आज भी कहांवते चली आ रही है कि टोडा की लांगडिया (पत्थर के शिलाखण्ड) और बावडिया तथा घट्टी (हाथ आए आटा पीसने की चक्की) और पट्टी (मकान की छत को ढकने के लंबे चौड़े प्लेन पत्थर) बड़ी प्रसिद्ध है।

  • टोडारायसिंह के आस पास के अन्य पर्यटन स्थल

० हाड़ी रानी की बावड़ी के अलावा कई और बावड़ीया भी है शहर में।

० टोडारायसिंह के पास ही पहाड़ीयो के बीच बना हुआ बीसलपुर बांध ।
इसके अतिरिक्त बीसलपुर बांध के पास ही प्राचीन शिव मंदिर ।इस मंदिर के साथ भी एक किवदंती जुड़ी है।

० अजमेर चौहान वंश के राजा बीसलदेव का प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर ,यहां आज भी विशाल आकार का शिव लिंग हैं । बांध के भर जाने पर यह मंदिर पानी मे डूब जाता है। 

० वर्षा काल मे पहाड़ी से गिरते हुए झरने, पर्यटकों को सहज की आकर्षित करते है।

० टोडारायसिंह के पास ही बीसलपुर बांध में डाई, बनास और खारी नदियों का त्रिवेणी संगम।

० टोडारायसिंह के पास ही टोंक जिले की सीमा से सटा हुआ ऐतिहासिक, आध्यात्मिक बघेरा कस्बा जहां राजस्थान के अमर प्रेमी ढोला मारु के प्रेम का प्रतीक ऐतिहासिक तोरण द्वार है।

०.बघेरा के वराह सागर किनारे विश्व प्रसिद्ध शुर वराह का अद्वितीय प्राचीन मंदिर है।

० बघेरा में ही SH 116 पर पहाड़ी पर उज्जैन की राजा और महान तपस्वी राजा भृतहरि की गुफा, आदि पर्यटक स्थल हैं जो सहज ही पर्यटकों का ध्यान आकर्षित करते हैं।

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