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  • अपना अस्तित्व खोने को मजबूर है बघेरा की अजंता एलोरा कलाकृतियां


    राजस्थान के अजमेर जिले में केकड़ी तहसील में बघेरा के नाम से प्रसिद्ध एक छोटा सा कस्बा जो किसी परिचय का मोहताज नहीं है प्राचीन कला संस्कृति और सभ्यता को अपने में समेटे हुए यह छोटा सा कस्बा ऐतिहासिक प्राचीन और पुरातात्विक दृष्टि से एक अलग ही महत्व और स्थान रखता है बघेरा के नाम से जाने जाने वाला यह कस्बा  कभी व्याघ्र पुर नाम से जाना चाहता था जिसका वर्णन आज से करीबन 5000 वर्ष पूर्व भी मिलता है इससे इस कस्बे की प्राचीनता ऐतिहासिकता का अंदाज और अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है l  कस्बे में ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व की इमारतों और कलाकृतियां आज भी अपना ध्यान सहज आकर्षित करती है

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  • अस्थल की ऐतिहासिक  कलाकृतियां

    ऐसी ही एक  इमारत कस्बे में विस्तृत वराह सागर के उत्तर पश्चिम में एक ऊंचे पठार पर प्राकृतिक जल कुंड के समीप वाम अस्थल नामक मंदिर स्थित था जो कि आज खंडहर अवस्था में पहुंच गया है और अपने अस्तित्व के लिए आज भी संघर्षशील है।

कहा जाता था कि यह सनकादिक ऋषि का आश्रम हुआ करता था आज भी इस स्थान पर आश्रम के अवशेष दिखाई देते जिसका पौराणिक और पुरातात्विक दोनों ही दृष्टिकोण से बड़ा महत्वपूर्ण स्थान है। यह स्थान 10 वीं सदी के किसी वाममार्गी मंदिर के पुराने खंडहर है इस खंडर में अपने महत्व और इतिहास को आज भी समेटे हुए कलात्मक खंबे अपना महत्व बयान करते हैं इन खंबों की कलाकृति पर रेंगते हुए सर्प ,कच्छप, छिपकली और बिच्छू की कलाकृतियां उत्कीर्ण है ।

इसके अतिरिक्त इन खंभों पर उत्कीर्ण की गई घंटियों की एक कड़ी स्पष्ट रूप से नजर आती है हर किसी का  ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती हैं इन खंबों की खुदाई की समानता खजुराहो के स्तंभों पर की गई खुदाई से लगाई जाती है इन खंबों के अलावा इसी शैली के अनेक खंबे खंडित मूर्तियां और प्राचीन अवशेष इस खंडित परिसर में यहां वहां बिखरी पड़ी है इससे इसके  महत्व प्राचीनता  का अनुमान लगाया जा सकता हैकस्बे की ऐसी ही अनेक ऐतिहासिक धरोहरो को इंतजार है कि कोई। आए और इतिहास में सिमट रही इन धरोहरों को बचाने  का एक भागीरथ प्रयास करें ।

  • युवा आगे आये

 इस लेख के माध्यम से सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा कि वह इस धरोहर को उजड़ने से बचाने के लिए इसका संरक्षण करे प्रयास करे  साथ कि में सभी धर्म प्रेमियो, इतिहासकारो, ओर क्षेत्रवासियों , स्थानीय प्रशासन से  विशेषकर युवा शक्ति से भी अपील करता हूँ कि वो आगे आये ओर गांव की इस धरोहर, कलाकृति जो हमारा गौरव ओर इतिहास है बचाने ,इसका  पुनरुत्थान करने का प्रयास करे ।    आवश्यकता है की कस्बे की आज युवा पीढ़ी आगे आए और अपनी रचनात्मक और क्रियात्मक सोच के साथ  राजनीतिक नुमाइंदो से भी सरकारी योजनाओं के तहत मदद ली जाए तो निश्चित रूप से ऐतिहासिक धरोहरों को बचाया जा सकता है।

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