दुनिया की सबसे ऊंची प्रमुख मूर्तियों /स्टेच्यू में भारत के स्टैचू ऑफ यूनिटी का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है।  प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा 31 अक्टूम्बर 2018 को इस विशालकाय स्टेच्यू का उद्घाटन और लोकार्पण भी हुआ था। भारत अब एक बार फिर से दुनिया की सबसे ऊंची हिंदू मूर्ति बनाकर एक नया इतिहास रचने को तैयार है । यह स्टेच्यू न केवल दुनिया का ध्यान अपनी और आकर्षित करेगा बल्कि भारतीय संस्कृति और सभ्यता को हमेशा हमेशा के लिए अमर कर देगा और समाज को दुनिया को एक इक्वलिटी/समानता का संदेश देगा । 

चौंकिए मत यह एकदम सत्य है। यह कोई काल्पनिक कहानी या कोई काल्पनिक सोच नहीं है । इस  ऐतिहासिक कार्य को साकार रूप दिया जा चुका है जिससे दुनिया जल्दी ही रूबरू होगी और इस सोच को साकार रूप देने में करीब 6 वर्षों की कठोर मेहनत लगी है। 

  • हैदराबाद में शमताबाद में है यह 216 फ़ीट का स्टेचू

हैदराबाद के पास शमताबाद में 11 वीं शताब्दी के वैष्णव संत/हिंदू संत श्री रामानुजाचार्य स्वामी की एक विशालकाय प्रतिमा वाला स्टेचू निर्मित हुआ है।  जिसकी ऊँचाई  216 फीट की है । हिंदू संत के इस विशालकाय स्टेच्यू को  “स्टेच्यू ऑफ इक्वलिटी”  के नाम से जाना जाता है । ज्ञात हो कि यह दुनिया की सबसे बड़ी हिंदू मूर्ति है,। जानकारों की माने तो इस विशालकाय स्टेच्यू को बनाने में करीब 1000 करोड़  से भी अधिक का खर्च आया है।  हिंदू संत की इस विशालकाय मूर्ति को निर्मित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था इस प्रतिमा के अलग-अलग पार्ट्स बनाकर इसे असेंबल किया गया है इसके बारे में बताया जाता है कि इस विशालकाय प्रतिमा के करीब 1600 पार्ट्स चीन में तैयार होकर आए हैं और यहां बड़ी बारीकी कार्य से इसे असेंबल किया है । 

इस स्टेच्यू के आकार और कलाकृति ,इसको बनाए जाने में लगा लंबा वक्त , इस पर आने वाले खर्च से इसके आकार इसके महत्व का अनुमान लगाया जा सकता है । स्टेच्यू ऑफ़ इक्वलिटी में रामानंदचार्य की विशालकाय प्रतिमा को हैदराबाद के शमताबाद में असेंबल करने में करीब 9 माह से भी अधिक समय लगा । इसके अतिरिक्त इस प्रतिमा को बनाने में करीब 120 किलो सोने का उपयोग भी हुआ है। 

  • कौन है रामानंदचार्य 


रामानंदचार्य वैष्णव परंपरा के संत थे जिनको लक्ष्मण के नाम से भी जाना जाता था । इनका जन्म वर्तमान तमिलनाडु में (श्रीपेरंपुदुर चोल साम्राज्य में)  हुआ था। उनकी माता का नाम का कान्तिमथी और पिता का नाम केशव सोमाजी था। ये यमुनाचार्य / यादव प्रकाश के शिष्य  बताये जाते है।  ये चरित्र बल भक्ति में अद्वितीय थे और इनके द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत विशिष्टद्वैतवाद कहलाता है।

  • कमल के सिंहासन पर विराजमान है रामानुजाचार्य की प्रतिमा 

216 फीट ऊंचाई वाले इस स्टैच्यू ऑफ इक्वलिटी की विशालकाय प्रतिमा में तरेंदम 135 फुट का तथा 27 फुट पदमपीठ और 108 फीट का रामानुजाचार्य का स्टेच्यू है जो कि कमल की 54 पंखुड़ियों की आकृति वाले आसन पर विराजमान है । इस विशाल आकार वाले आसन में 36 हाथी, 18 शंख और 18 चक्र बने हुए हैं। कलाकृतियां  ऐसी मानो कि दांतों तले अंगुली दबाने को मजबूर हो जाते हैं। स्टेच्यू में जो कमल की 54 पंखुड़ियों के साथ जुड़े हुए 36 हाथियों की सूंड़ से पानी का झरना निकलता हुआ एक अलग ही मनोरम दृश्य नजर आता है। 

  • दुनिया की दूसरी सीटिंग स्टेच्यू/ प्रतिमा है 

स्टैच्यू ऑफ इक्वलिटी दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सीटिंग स्टेचू हैं। ज्ञात हो कि दुनिया की सबसे विशाल सीटिंग स्टेच्यू/प्रतिमा ग्रेट बुद्धा की है जो कि थाईलैंड में स्थित है,। ग्रेट बुद्धा स्टैचू की ऊंचाई 302 फीट बताई जाती हैं।

इसके अतिरिक्त जानकारों की मानें तो राजस्थान के नाथद्वारा में 351 फीट की सीटिंग शिव प्रतिमा/ स्टैच्यू बनकर तैयार हो रहा है लेकिन अभी तक इसका अनावरण नहीं हुआ है। 

  • चीन की एरोसन कॉरपोरेशन कंपनी ने की है तैयार

स्टेच्यू ऑफ इक्वलिटी में रामानंदचार्य की विशाल प्रतिमा चीन की एरोशन कॉरपोरेशन कंपनी के द्वारा तैयार की गई है।  इस प्रतिमा के अलग-अलग पार्ट्स जिनकी संख्या करीब 1600 बताई जाती है, चीन में भारतीय इंजीनियरों और अधिकारियों और जानकारियों की एक टीम की देखरेख में तैयार किए गए थे।प्रतिमा तैयार करने वाली इस कंपनी के साथ 14 अगस्त 2015 को एग्रीमेंट हुआ था। ज्ञात हो कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी में सरदार वल्लभभाई पटेल की विशालकाय प्रतिमा भी चीन के सहयोग से ही तैयार की गई थी।
रामानंदचार्य की  इस प्रतिमा में कॉपर, सिल्वर, टाइटेनियम, ब्रास, सोना जैसे तत्व शामिल किए गए हैं।

  • विशाल परिसर में फैला है आश्रम जिसमें 108 मंदिर भी है

शमताबाद में  निर्मित इसी “स्टैच्यू ऑफ इक्वलिटी” की परिसर करीब 200 एकड़ के क्षेत्रफल में आश्रम और 108 मंदिरों का भी निर्माण किया गया है ,जिसमे मंदिरों में की गई कारीगरी हर किसी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती है इसके खंभे , मूर्तियां  इतनी बारीकी से तराशे गए है कि यह विशालकाय खंभे, प्रतिमाएं, तरह-तरह की आकृतियां हर किसी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर ही लेती है दक्षिण भारत और राजस्थान के कलाकारों ने इन्हें बड़ी बारीकी से तराशा  है । इस आश्रम और मंदिरों के निर्माण में राजस्थान, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के पत्थरों को काम में लिया गया है। 

  • 6 वर्षों का समय लगा है इसे बनाने में 

इस स्टेच्यू का निर्माण सन 2016 में शुरू हुआ था जो कि करीब 6 वर्षों की कठोर मेहनत के बाद बनकर तैयार हुआ है।  बताया जाता है कि फरवरी 2022 में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा इसका लोकार्पण किया जाएगा। 

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