किसी भी देश के राष्ट्र निर्माण में उस देश के महापुरुषों, समाज सुधारको और शिक्षकों का अहम योगदान होता है, विशेषकर ऐसे देश में जहां धर्म, जाति,परिपाटियों, परंपराओं के नाम पर गरीब और समाज की आधी आबादी पर अनेक प्रतिबंध हो, और समाज मे अनेक कुरीतियों ने जड़े जमा रखी हो, ऐसे मुश्किल दौर में समाज की परिपाटियों और संकीर्ण सोच से लड़कर कार्य करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है, विशेषकर महिलाओं के लिए । समाज मे ऐसे महापुरुषों को विस्मृत नहीं किया जा सकता ।


समाज के ऐसे ही समाज सुधारको ,शिक्षकों, महापुरुषों  के सम्मान में  समय समय पर उनकीं जयंतिया, उनके नाम पर सम्मान, पुरस्कार, सरकारी योजनाएं, और दिवस घोषित किया जाता रहा है, और मनाया जाता रहा है ताकि वर्तमान समाज ,वर्तमान पिढ्ढीयां उनसे प्रेरणा ले सके ।

जब समाज कुरूतियों  संकीर्ण सोच रूपी जाल में तड़प रहा था तब ऐसे ही दौर मे देश की पहली महिला शिक्षिका,समाज सुधारिका एवं मराठी कवयत्री सावित्री बाई फुले ने  समाज को एक नई राह दिखाने का कार्य किया था। उन्होंने अपने पति ज्योतिराव गोविंदराव फुले के साथ मिलकर स्त्री अधिकारों एवं शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए।। जिनके योगदान को कभी भुलाया नही जा सकता है। 

  • महिला शिक्षिका दिवस मनाये जाने का निर्णय

हाल ही में राजस्थान सहित देश के अनेक राज्यो में  देश की पहली महिला शिक्षिका और समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले की 3 जनवरी 2020 को 189 वीं और 3 जनवरी 2021 को 190 वी जयंती मनाई गई ।

पिछले वर्ष से राजस्थान में गहलोत सरकार के द्वारा देश की पहली महिला शिक्षिक सावित्रीबाई फुले के सम्मान में ऐतिहासिक निर्णय लिये भी जिंसके अनुसार

(1) सावित्री बाई फुले के जन्मदिन 3 जनवरी को प्रतिवर्ष महिला शिक्षिका दिवस मनाए जाएगा ।

(2) प्रत्येक जिले में एक राजकीय विद्यालय का नाम सावित्रीबाई  फुले के नाम पर रखा जाएगा, साथ ही सरकारी स्कूल, कॉलेज में इनकी प्रतिमा व तश्वीरें लगाई जाएगी  ।

(3) सरकारी स्तर पर शिक्षा के क्षेत्र में, किसानों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए चलाई जाने वाली योजनाओं के नाम ज्योतिबा फुले और सावित्री फुले के नाम पर रखे जाएंगे ।ज्ञात हो कि राजस्थान सरकार से पूर्व भी ऐसी शुरुआतदूसरे राज्य भी कर चुके है ।

  • विभिन्न संगठन कर रहे थे इसकी मांग 
    विभिन्न संगठनों द्वारा सावित्री बाई फुले के जन्मदिन को राष्ट्रीय महिला शिक्षिका दिवस के रूप में मनाये जाने की मांग सरकार से की जाती रही है । जयपुरी फुलेर माली समाज युवा संगठन व ऑल इंडिया सैनी सेवा समाज ने भी प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले के जन्म दिवस 3 जनवरी को महिला शिक्षिका दिवस के रूप में मनाने की मांग की थी । इसके लिए प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन भी सौंपा था ।
  • 2021 में मनाया गया पहला महिला शिक्षिका दिवस महिलाओं में शिक्षा की अलख जगाने वाली देश की पहली महिला शिक्षिका सावित्री बाई फुले के सम्मान में 3 जनवरी को महिला शिक्षिका दिवस मनाने की घोषणा के बाद 3 जनवरी 2021 को राजस्थान में पहली बार इसे मनाया गया ।
  • महिला शिक्षा को समर्पित था इनका जीवन

सावित्रीबाई फुले महिला शिक्षा का विस्तार कर समाज में एक बड़ा बदलाव लाना चाहते थी । उन्होंने 1948 में लड़कियों के लिए पहला स्कूल खोला था । जहां पर वह स्वयं पढ़ाया करती थी । उनके इस प्रयास का समाज के कुछ लोगों ने विरोध किया ,उनको परेशान किया, उन पर कीचड़ उछाला उन्हें रोकने का प्रयास किया जाता था,पर उन्होंने इस प्रकार के विरोध की परवाह नही करते  हुए 1848 से 1852 तक के वर्षों में लड़कियों के लिये  कई स्कूल खोल दिये । इस महान कार्य में उनको उनके पति महात्मा ज्योतिबा फुले का भी पूरा सहयोग मिला । 

  • कौन है ये सावित्री बाई फूले  ? 

महान व्यक्तिव और सामाजिक कार्यकर्ता,शिक्षिका, लेखिका और कवयित्री सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के सतारा जिले के एक छोटे से गांव नायगांव में  हुआ था। इनके पिता का नाम खन्दोजी  और माता का नाम लक्ष्मी बाई था। सावित्रीबाई फुले का विवाह मात्र 10 वर्ष की आयु में 1840 में ज्योतिबा फुले के साथ हो गया था ।


समाज सेवा और महिला शिक्षा का जज्बा उनके मन मे था। इसलिए उन्होंने अपनी छोटी सी उम्र में ही स्कूल भी खोले जहां खुद भी पढ़ाया करती थी । जिनका समाज के कुछ ठेकेदारों ने विरोध भी किया लेकिन वह अपने मकशद से नही हटी और अपना काम करती रही।  


सन 1897 के महामारी/ प्लेग के दौर में उन्होंने अपनी जान की  परवाह  भी नही की, और सेवा कार्य को नही छोड़ा। पीड़ितो की देखभाल के दौरान सावित्रीबाई स्वयं भी प्लेग / महामारी से संक्रमित हो गई थी जिसके  परिणामस्वरूप करीब 66 वर्ष की आयु में 10 मार्च 1897 को रात 9 बजे इस महान शख्सियत ने पुणे में इस दुनिया से विदा ली । 

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