किसी शायर ने क्या खूब कहा है–दर्द का हर लम्हा वक्त के साथ गुजर जाता है,बे-दर्द लम्हा वक्त के साथ निशान छोड़ जाता है जीवन में कुछ घटनाएं कुछ लम्हे कुछ वक्त ऐसा होता जिनसे उभरने के पश्चात भी वह अपने निशान बाकी छोड़ जाते है जिसे योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर ही मिटा सकते है रणनीति का शाब्दिक अर्थ है किसी भी स्थिति से निपटने के लिए योजना बनाना । वर्तमान में न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर कोरोना जैसी महामारी का दौर भी वैसा ही हैं भारत में कोरोना योद्धाओ की कर्मशीलत,त्याग और राजनीतिक इच्छाशक्ति के परिणामस्वरूप गुजर जाएगा पर अपने निशान जरूर छोड़ जाएगा जिनका सामना हर आम और खास आदमी ओर पूरे देश की सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था को करना पड़ेगा ।    लॉकडाउन की समाप्ति के पश्चात कैसी होगी आम आदमी की जिंदगी,क्या होगी समस्याये कैसे होगा उनका समाधान । क्या होगी उसके लिए रणनीति/ कार्ययोजना यह एक विचारणीय बिंदु है ।सर्वप्रथम  लॉकडाउन के तहत लगाई गई पाबन्दियों पर विचार व मूल्यांकन करने की आवश्यकता है एक कार्ययोजना बनाकर चरणबद्ध तरीके से पाबंदियों का मूल्यांकन करना होगा । जिन क्षेत्रों में इसका प्रभाव कम है और जो क्षेत्र  हॉटस्पॉट बने है उनमें विशेष परिस्थितियों के ध्यान रखना होगा है । लोक डाउन में रियायत मिल भी जाती है तो भी   हमे सावधानी रखनी है  नही तो अब तक कि सारी मेहनत  और प्रयास बेकार हो सकते है क्योकि कोरोना अभी खत्म नही हुआ है   ओर संक्रमित लोगो की संख्या में वृद्धि हो रही है आवश्यकता हुई तो हॉट स्पॉट/रेड जॉन  क्षेत्रों में इसे बढाया जाना भी उचित होगा ।

सामाजिक क्षेत्र मे आई  चुनोतियाँ


 सामाजिक क्षेत्र की बात कर तो समस्याएं बाहें फैलाए खड़ी है महामारी के दौरान कोरोना योद्धाओं पर जो हमले हुए उनके साथ जो मारपीट या दुर्व्यवहार किया गया कोरोना को लेकर जमात के बारे में जो बाते की जाती है  सोसियल डिस्टेंस की वजह से समाज के जीवन यापन में कोई बदलाव नहीं आने वाला है क्योकि  सामाजिकता भारत की रगों में रमी है लेकिन  कही  कोरोना दो संप्रदायों के बीच दूरी  पैदा ना कर दे यह चिंता का विषय है इसके समाधान के लिए सामाजिक संगठनों और सरकार को एक कार्ययोजना बनाकर  समाधान किए जाने की आवश्यकता होगी यह राजनीतिक स्वार्थपूर्ति का मुद्दा न बने हम सब एक है ।

 आर्थिक क्षेत्र में आई चुनोतियाँ 

आर्थिक क्षेत्र की बात करे तो न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व स्तर पर आर्थिक मंदी का दौर होगा  एक्सपर्ट की IMF को सलाह हैं कि अगर कोरोना वायरस का कहर लंबे समय तक जारी रहा तो आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो सकती है।भारत भी इस आर्थिक मंदी के दौर से बच नहीं पाएगा संगठित ओर असंगठित क्षेत्रो में बेरोजगारी,आर्थिक विकास की दर में गिरावट,लोगों की क्रय शक्ति में गिरावट होगी विशेषकर आम नागरिक,मजदूर और मध्यम वर्ग इससे अधिक प्रभावित होंगे । लघु और मध्यम उद्योगों को वापस पटरी पर लाने के लिए उन्हें विशेष कार्य योजना बनाने की आवश्यकता रहेगी।रोजगार का सृजन करना होगा। मंदी और आर्थिक संकट के दौर से उभरने के लिए योजनाबद्ध तरीके से एक लॉंगटर्म रणनीति/कार्य योजना(लगभग 3 से 4वर्ष ) बनाने की आवश्यकता है मोदी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के तहत वित्त मंत्री की अध्यक्षता में एक कार्यबल का गढ़न किया जायेगा यह कार्य बल लगातार सभी हितधारकों के संपर्क में रहेगा,उनसे प्रतिक्रिया लेगा और उसके मुताबिक फैसले करेगी ।हर नागरिक हर छोटे बड़े उद्योग और प्रांतीय ओर केंद्र सरकार को अपने अपने स्तर पर प्रयास की भी आवश्यकता है समय की आवश्यकता ओर मांग को देखते हुए सरकार आर्थिक नीतियों में बदलाव करना होगा कोरोना संकट मे आम नागरिक और सरकार दोनों ने कंधे से कंधा मिलकर काम किया है उसी प्रकार के प्रयास की आवश्यकता आर्थिक संकट के दौर में भी है । 

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