कोई भी शासन हो, कोई भो देश और प्रान्त हो, न्याय और न्याय के मंदिर न्यायपालिका का अपना महत्व रहा है  । न्यायपालिका की कार्यप्रणाली और उसकी स्वतंत्रता के आधार पर ही किसी देश में  व्यक्तियों के अधिकार और स्वतंत्रता का अंदाज लगाया जा सकता है  । जब – जब भी  व्यक्ति के अधिकारो का उल्लंघन हुआ है उसके साथ अन्याय हुआ है  तो  न्याय के लिये उसकी निगाहें  स्वतंत्र न्यायपालिका की ओर  ही देखती है  । समाज का हर व्यक्ति यही अपेक्षा करता है कि  उसे समय पर, सस्ता और सुलभ न्याय मिले ।  हमारी न्यायपालिका में विक्रमादित्य के आसन पर बिराजमान हमारे  न्यायाधीश  स्वतंत्रतापूर्वक निष्पक्षता से  अपने न्यायिक कार्य को अंजाम देते हैं  ।  जहाँ तक  वर्तमान समय की बात है  न्याय प्राप्त करना  मुश्किलों भरा  कार्य  हो गया हैं क्योंकि  न्यायालय के सामने दिनों- दिन बढ़ते मामले  लंबे समय तक सुनवाई का मोका/तारीख  ही नही मिलना ,दूसरी ओर  अधिवक्ताओं की मोटी फ़ीस , वर्षो  तक चलने वाली हमारी न्यायिक प्रक्रिया इन सबसे  व्यक्ति व्यथित जरूर  होता है  । आज  जहां एक तरफ पूरा देश कोरोना से लड़ रहा है लॉक डाउन जैसी व्यवस्था का पालन कर रहा है ।

न्यायिक कार्यो में  आया नवाचार———————————-
  लॉक डाउन  के चलते  जहाँ आज पूरे देश व प्रदेश के सभी विभागों में लगभग काम ठप्प सा पड़ा है । लोगों के कार्य करने के तरीके बदले हैं, लोगों की सोच बदली है ,लोगो ने  जीवन शैली बदली है और इस बदलाव से  हमारी सोच और कार्यो में नवाचार हुआ है और सकारात्मक  पहल हुई है ।  लॉक डाउन की वजह से  हम सब अपने घरों में बैठकर ही अपना काम कर रहे हैं। पुलिस,प्रशासन, डॉक्टर्स, टीचर्स, मीडियाकर्मी, सफाईकर्मी जहां कोरोना वॉरियर्स बनकर फील्ड में काम कर रहे हैं। वहीं हमारी न्याय व्यवस्था में भी इन दिनों नवाचारों के साथ कार्य करने के तरीकों में सकारात्मक बदलाव आया है  इस दौर में भी हमारी न्याय पालिकाये बहुत ही निष्ठापूर्वक अपना कार्य संपादित कर रही हैं। सस्ता सुलभ  और समय पर न्याय मिले इसी सोच के आधार पर  सोशल डिस्टेंस , फिजिकल डिस्टेंस  का पालन करते हुए   अपने कार्य करने के तरीकों में  काफी सकारात्मक बदलाव किए हैं । इसी नवाचार के आधार पर समय की मांग को देखते हुए  लॉक डाउन के इस दौर में हमारे  देश , प्रदेश की सभी अदालतें नई तकनीकी के आधार पर ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ़्रेंस  , एप्लिकेशन स्वीकार करते हुए ऑनलाइन बहस सुन रही है।ऑनलाइन ही मेल पर ऑर्डर ट्रांसफर कर रही है।यही नहीं ऑनलाइन स्टे एप्लिकेशन्स पर बहस हो रही है।स्टे ऑर्डर दिए जा रहे हैं। जमानतें स्वीकार हो रही है।रिविजन्स डिसाइड हो रही है। 

सर्वोच्च न्यायालय ने रचा  इतिहास


सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा भी लॉकडाउन के दौर में एक इतिहास कायम किया है लगभग 56 दिनों के समय में 6000 मामलों की सुनवाई कर एक उदाहरण पेश किया है ऐसा दुनिया की  किसी भी न्याय व्यवस्था में देखने को नहीं मिलता।

अधिवक्ता कर सकेंगे कही से भी पैरवी

हर  व्यक्ति को  बिना भागदौड़ के समय पर न्याय मिले  बिना किसी भागदौड़ के  अधिवक्ताओं को अपने मवकिल की पैरवी करने का मौका मिलेगा।  इससे  अधिवक्ताओं की इस भाग दौड़ की ज़िंदगी से निजात मिलेगी। वे घरों , कार्यालयों में बैठकर इत्मीनान से पैरवी कर सकेंगे। 

सस्ता,सुलभ ओर समय पर न्याय का होगा सपना साकार


मेरा तो ये मानना है कि इस लॉक डाउन की वजह से हमारी न्यायिक व्यवस्थाओं में जो नवाचार हुआ है,  प्रक्रिया में जो क्रांतिकारी परिवर्तन आया है।अगर यही व्यवस्थाएं हमेशा  अपनी कार्यप्रणाली में अपना ले  तो निश्चित रूप से  सस्ते व सुलभ न्याय की परिकल्पना जो हमारे संविधान में अंकित है,साकार हो सकेगी।  कारण जो कुछ भी हो लेकिन आज जहां दूसरे विभागों में आम आदमी जितना परेशान हो रहा है उतनी ही आसानी से अदालतों में न्याय हो रहा है।

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