मेरा बचपन मुझे लौटा दो

@ गोविन्द नारायण शर्मा कोई मुझे पुराना जमाना फिर लाकर दे दो ,काली मिट्टी से बनी बैलों वाली गाड़ी दे दो ! सीखने को मिट्टी वाली तख्ती कहीं खो गयी…

काव्य-‘ ईर्ष्या तू नही गयी ‘

@ गोविन्द नारायण शर्मा ईर्ष्या बहुत हो गयी मन का मेल निचोड़ दो,दिली अदावद खूब हैं अब मेल निचोड़ दो ! घाव अब पक गया मवाद को निकाल दो,ठीक करना…

शायरी/काव्य – जमाना बदल गया

@ गोविन्द नारायण शर्मा तंग गलियां तन पे बेहया लिबास देख रहा हूँ ,सच जमाना बदल गया आँखों देख रहा हूं ! प्यासी नदियां बिलखती नग जमी दोख हुए ,मधुवन…

काव्य : बेकसूर-बेगुनाह

@ गोविन्द नारायण शर्मा हर बार बेकसूर रहा कोई गुनाह रह गया,सारे तीर्थ नहाये पर एक तेरा दर रह गया! जिस जिस से भी मिला मुझे वो भूलते गये,बस जहन…

सन्त वाणी – मीठे वचन

@ गोविन्द नारायण शर्मा साधु गाँठि न बाँधई उदर समाता लेय,आगे पीछे हरि खड़े जब मांगे तब देय! कहता तो बहुता मिला गहता मिला न कोय,सो कहता नही जान दे…

अश्क को हलक में उतार लिया

@ गोविन्द नारायण शर्मा तेरे अक्ष से निकले हर अश्क को हलक में उतार लिया ,ज्यों समुद्र मन्थन से निकले गरल को शम्भू ने पी लिया ! खुली अलकों से…

तपती धरती करें पुकार

@ गोविंद नारायण शर्मा तपती धरती करें पुकार सुनो नर और नार,वृक्ष लगाकर तपती धरती का करो शृंगार! तुझको बचाने की भरसक कोशिश करता हूँ,हरपल तेरे जलते दामन की चिंता…

करना जरा सोच विचार

@ गोविन्द नारायण शर्मा बैठो जो खाली कभी, करना सोच विचारखुराफात मत सोचना, जायेगा बेकार। कलियुग का यह श्राप है, भागेगा मन तेजरोक सको तो रोक लो, इतना हो परहेज।…

शायरी/काव्य – पंछी/ पखेरू

@ गोविन्द नारायण शर्मा भोर भई चमका पूरब दिशि में शुक्र तारा,पखेरुओ ने आंखे खोली छोड़ा रेन बसेरा! आपस में बतियाते सुबह सुबह दो परिन्दे ,इंसान हो गये कितने बेशर्म…

काव्य / शायरी – निग़ाहें क़त्ल !!

@ गोविंद नारायण शर्मा ग़म का ये आलम कोई खबर नही,तू कब रुख़सत हुई कोई खबर नही! जाम गटके गिनती नही की रात से ,बोतलें कितनी रीती कोई खबर नही!…

You cannot copy content of this page