तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती 2012 और विवादों का मानो चोली- दामन का साथ हो ,अब एक बार फिर यह कार्मिक विभक्त के आदेश के कारण चर्चा में है। 


आदेश के अनुसार तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती 2012 में न्यायालय के आदेश से विभाग ने नियुक्तियां दी थी  अब अचानक का फिर सोच समझकर उन नियुक्त व्यक्तियों को हटाने का आदेश जारी किया है ।

अब कार्मिक विभाग जिला परिषद जालौर एवं प्रतापगढ़ द्वारा उक्त अनुसार दी गई नियुक्तियो को नियम विरुद्ध ,कार्मिक विभाग के निर्देशों के विपरीत एवं अनियमित मान रहा है उसके अनुसार  जिला परिषद प्रतापगढ़ व जालौर द्वारा 58 एवं 16 अभ्यार्थियों को परिशिष्ट-1 के अनुसार प्रतीक्षा सूची ऑपरेट कर नियुक्तियां दी गई प्रश्नगत प्रकरण से संबंधित अभ्यर्थीगण न तो परिणामो में मुख्य सूची के अंतर्गत थे और न ही संशोधित परिणाम में मुख्य सूची के अंतर्गत आते हैं ।

इस कारण  कार्मिक विभाग ने अपने आदेश में  नियमानुसार प्रक्रिया का पालन करते हुए इन अनियमित नियुक्तियों को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाने का आदेश दिया था।

राजस्थान उच्च न्यायालय ने आदेश पर लगाई रोक

कार्मिक विभाग के द्वारा भले ही ऐसे व्यक्तियों को हटाने का आदेश जारी कर दिया है लेकिन  सरकार की राह आसान नही है । मुकेश कुमार टेलर  पुत्र श्रीं राम प्रसाद टेलर  निवासी धमोतर जिला प्रतापगढ़ ने राजस्थान के जाने-माने अधिवक्ता तंवर सिंह राठौड़ के माध्यम से राजस्थान उच्च न्यायालय में याचिका दायर की जिसके परिणामस्वरूप जोधपुर उच्च न्यायालय ने 25 जून 2021 को कार्मिक विभाग राजस्थान सरकार के आदेश पर अपने आदेश (CW 8052/2021)  के माध्यम से  रोक लगा दी है  ।


इन्हें बनाया पार्टी

जोधपुर उच्च न्यायालय के द्वारा जारी रोक के आदेशानुसार  इस मामले में –  सचिव ग्रामीण विकास एंड पंचायत राज विभाग राजस्थान सरकार , डायरेक्टर पंचायत राज ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज विभाग राजस्थान सरकार, मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद  , जिला प्रतापगढ़  , जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक ) प्रतापगढ़ को पार्टी बनाया है । 


अधिवक्ता श्री तंवर सिंह राठौड़ ने बताया कि लंबे समय से नौकरी कर रहे व्यक्तियों को इस प्रकार हटाए जाने के आदेश से उनके हित प्रभावित हुए हैं । इसलिए माननीय उच्च न्यायालय से कार्मिक विभाग के आदेश पर रोक लगाने की प्रार्थना की थी जिसे स्वीकार कर लिया और इस पर रोक  का आदेश 25 /06/2021 को जारी कर दिया ।

इस भर्ती से जुड़े हुए व्यक्तियों  की माने तो मुकेश कुमार टेलर बनाम राजस्थान राज्य मामले के आधार पर ही वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय में एक प्रकरण विचाराधीन है और अब अचानक कार्मिक विभाग द्वारा इस प्रकार के आदेश से सरकार की मंशा स्पष्ट होती है । लगता हैं सरकार  इस मामले को लंबा खींचना चाहती है ।

ध्यातव्य– पिछले दिनों राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ के अध्यक्ष उपेन यादव के माध्यम से  बेरोजगारों की विभिन्न मांगों पर जो सहमति बनी थी उसमें मंत्री  सुभाष गर्ग ने बेरोजगारों के हितों में निर्णय लेने और उन्हें नौकरी देने का आश्वासन दिया था लेकिन अचानक इस प्रकार के आदेश से सरकार की मंशा स्पष्ट होती है यह बेरोजगारों के हितों पर कुठाराघात है।

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