जादूगर के नाम से प्रसिद्ध श्री अशोक गहलोत के पिछले कार्यकाल (2008 – 2013)  के दोहरान तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती 2012 पंचायती राज के माध्यम से की गई थी । यह भर्ती न केवल स्वयं उलझी है वरन इस भर्ती ने न जाने कितने बेरोजगारों की जिंदगी को भी उलझाकर रख दिया । आज भी मामला जस का तस है।

1 तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती 2012 और विवाद  का नाता

तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती 2012 और विवादों का मानो चोली- दामन का साथ हो कभी प्रश्न पत्रों पर हुआ विवाद, तो कभी त्रुटिपूर्ण प्रश्नोत्तर का रहा विवाद, न्यायालय  के हस्तक्षेप से बार-बार रिवाइज रिजल्ट जारी हुआ ,तो कभी विद्यार्थियों ने अपने हितों की मांग को पूरा करने के लिए धरना प्रदर्शन का सहारा लिया, कभी आउटर्स को समायोजित किया, तो कभी मुकेश कुमार टेलर और रामधन कुमावत बनाम राजस्थान राज्य मामले में कोर्ट की आदेश की पालना करते हुए कुछ जिला परिषदों में नियुक्तियां दी, अब एक बार फिर यह कार्मिक विभक्त के आदेश से चर्चा में है।

2. तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती 2012 रही हमेशा चर्चा में 

 
कभी मीटिंग, कभी आश्वाशन, कभी कोई आदेश आए दिन कुछ न कुछ है, कभी कुछ घटनाएं होती रहती है तो भी कुछ और …. । कहा जा सकता है कि यह भर्ती परीक्षा 2012 से लेकर 2021 वर्तमान समय तक हमेशा किसी न किसी प्रकार से किसने किसी मुद्दे के आधार पर चर्चाओं में रही है । परिणाम यह हुआ कि यह  प्रदेश की सबसे अधिक चर्चित भर्ती में से एक भर्ती  गिनी जाने लगी है। 

3. कार्मिक विभाग के आदेश ने बढ़ाई चिंता


तृतीय  श्रेणी शिक्षक भर्ती से प्रभावित लोगों की चिंता बढ़ाने वाली ऐसे ही घटना पिछले दिनों राजस्थान सरकार के कार्मिक विभाग द्वारा जारी एक आदेश एफ 913(43) पराप्राशि/2018/ पार्ट 1/ 59 के तहत सुर्खियों में बनी । कार्मिक विभाग ने  मुकेश कुमार टेलर और रामधन कुमावत मामले में कुछ जिला परिषद (प्रतापगढ़, जालौर) के द्वारा दी गई नियुक्तियो को सेवा नियमों के खिलाफ मानते हुए नियुक्त हुए व्यक्तियों को तुरंत प्रभाव से हटाए जाने का आदेश जारी कर दिया ।

4. वर्षो के बाद भी अनिश्चितता का माहौल

 अब क्या सोचा और क्या समझा जाए और क्या किया जाए कि नोकरी करते किसी को 9 वर्ष हो गए, तो किसी को 5 वर्ष , किसी को 4 वर्ष ।  लेकिन यह भर्ती परीक्षा आज भी चर्चा का विषय बनी हुई है ।राजस्थान सरकार के कार्मिक विभाग ने 16 जून 2021 को जारी आदेश (आदेश एफ 913(43) पराप्राशि/2018/ पार्ट 1/ 59 ) में ऐसे आदेश जारी किए जो हर किसी के लिए चिन्ता और चर्चा का विषय बना हुआ है । वही दूसरी ओर यह आदेश इस भर्ती में नियुक्ति पा चुके लोगो की चिन्ताओ और अनिश्चितता को बढ़ाती है ।

5. यह लिखा है कार्मिक विभाग के आदेश में 

  • कार्मिक विभाग ने अपने आदेश में लिखा है कि ...तृतीय श्रेणी  शिक्षक  प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय अध्यापक की सीधी भर्ती प्रतियोगी परीक्षा 2012 के अंतर्गत माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा सिविल रिट याचिका संख्या 750/  2017 मुकेश कुमार टेलर बनाम राजस्थान राज्य व अन्य में पारित निर्णय दिनांक 9 /2/ 2017 स्थित निर्णय दिनांक 6 /3/ 2017 की पालना के निर्देश विभागीय आदेश क्रमांक 641 दिनांक 15 2017 द्वारा जारी किए गए हैं। इस संबंध में माननीय शिक्षा राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार की अध्यक्षता में दिनांक 23/ 8 /2017 को आयोजित बैठक के कार्यवाही विवरण पत्रक 919 दिनांक 4 /9/2017 द्वारा निर्देश दिए गए थे कि मुख्य सूची अर्थात विज्ञापित पदों की सीमा तक ही पद भरे जाने की प्रक्रिया में कार्मिक विभाग के परिपत्र दिनांक 19 /7/ 2001 के प्रावधान बाधक नहीं है 
  • इस प्रकार इस भर्ती के अंतर्गत माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा एसबी सिविल रिट याचिका संख्या 10622/ 2014 रामधन कुमावत व अन्य बनाम राजस्थान राज्य में पारित निर्णय दिनांक 18 /11/ 2014 के अंतर्गत पूर्व में कार्य ग्रहण कर चुके अध्यापक जो पुनः संशोधित परिणाम की वरीयता से बाहर हो गए थे । उन्हें सेवा से पृथक नहीं कर उन्हें समायोजित करने के उपरांत उनसे अधिक प्राप्तांक वाले अभ्यर्थियों से संबंधित उत्पाद करण मुकेश टेलर प्रकरण के अंतर्गत उपलब्ध रिक्त पदों पर लेते दी जानी थी ।
  • इन निर्देशों के विपरीत जिला परिषद प्रतापगढ़ व जालौर द्वारा 58 एवं 16 अभ्यार्थियों को परिशिष्ट-1 के अनुसार प्रतीक्षा सूची ऑपरेट कर नियुक्तियां दी गई । प्रश्नगत प्रकरण से संबंधित अभ्यर्थीगण न तो परिणामो में मुख्य सूची के अंतर्गत थे और न ही संशोधित परिणाम में मुख्य सूची के अंतर्गत आते हैं ।
  • इस प्रकार किसी पद पर नियुक्ति उपरांत कार्य ग्रहण करते ही वह पद भरा हुआ मान लिया जाता है और कार्य ग्रहण उपरांत उस पद के रिक्त होने  पर उस पद पर नियुक्ति प्रदान किया जाना नियम विरुद्ध है।
  •  ऐसी नियुक्तियों पर कार्मिक विभाग के परिपत्र दिनांक 19/07/ 2001 परिशिष्ठ -2 के  प्रावधान स्वतः ही लागू है । जिला परिषद जालौर एवं प्रतापगढ़ द्वारा उक्त अनुसार दी गई नियुक्तियां नियम विरुद्ध ,कार्मिक विभाग के निर्देशों के विपरीत एवं अनियमित है ।

6 तुरन्त निरस्त किये जाने का आदेश


अतः नियमानुसार प्रक्रिया का पालन करते हुए इन अनियमित नियुक्तियों को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाना सुनिश्चित करावे।

7. ध्यातव्य

कार्मिक विभाग ने 16 जून 2021 को जारी अपने आदेश की प्रति संबंधित विभागों -संयुक्त सचिव (एल.टी) माननीय मुख्यमंत्री ,राजस्थान सरकार जयपुर, निजी सचिव, प्रमुख शासन सचिव स्कूल शिक्षा राजस्थान ,जयपुर , निजी सचिव ,शासन  सचिव, पंचायत राज विभाग ,राजस्थान, जयपुर निदेशक ,प्रारंभिक शिक्षा राजस्थान, बीकानेर,  निजी सचिव ,निदेशक, पंचायत राज विभाग राजस्थान ,जयपुर ,मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद राजसमंद( प्रभारी अधिकारी ) विचाराधीन एसएलपी संख्या 13102- 109 / 2020 राजस्थान राज्य बनाम नमो नारायण शर्मा व अन्य को प्रेषित किए हैं ।

8. मामला फिर कोर्टपहुँचने का अंदेशा

कार्मिक विभाग के द्वारा जारी इस आदेश के परिणामस्वरूप लगता है यह भर्ती परीक्षा एक बार फिर चर्चा में होगी । जिन लोगों के हित इस आदेश से प्रभावित होंगे या उनको हटाया गया तो वह न्यायालय की शरण में जा सकते हैं । इस प्रकार यह भर्ती एक बार फिर उलझ कर रह जाएगी फिर तारीख पर तारीख…..

9 ध्यातव्य

कार्मिक विभाग ने आदेश भले ही जारी कर दिया हो लेकिन यह तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती 2012 है सरकार की राह इतनी आसान नहीं होगी के आसानी से नियुक्ति पा चुके लोगों को हटा दिया जाए । बार-बार जिस प्रकार के आदेश जारी हो रहे हैं इससे मामला और अधिक उलझता जा रहा है । निश्चित रूप से न्यायपालिका सरकार से जवाब मांगेगी ।

By admin

One thought on “तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती 2012- पहले दी नियुक्ति अब कार्मिक विभाग ने दिया हटाने का आदेश !”
  1. विभाग ने जिस विभागीय परिपत्र 919 दिनांक 4 /9/2017 के कार्मिक विभाग के प्रावधानों का उल्लेख किया है वो तो सही है मगर कुछ तथ्यों को छिपाने का प्रयत्न किया जिसमें
    परिपत्र 919 के बिंदु संख्या 2 के तहत मुकेश कुमार टेलर प्रकरण में कार्मिक विभाग की सहमति से शिक्षा विभाग के खाली पदों पर नियुक्ति देने का निर्णय लिया गया था परंतु विभागीय अधिकारियों की हठधर्मिता से अधिक प्राप्तांक प्रकरण में अब तक नियुक्ति नहीं दी गई ।

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