अक्सर यह देखा जाता है कि देश मे चुनाव के दौरान देश की विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियां मतदाताओं को लुभाने के लिए उन्हें मुक्त उपहार  के वादे करती है और लोक लुभावने वादे किए जाते हैं। मतदाताओं को लुभाने के लिए उन्हें फ्री में लैपटॉप,टीवी जैसे कई उपहार बिजली, पानी ,चिकित्सा सुविधा मुफ्त उपलब्ध करवाए जाने के वादे किए जाते रहे हैं। जनता से चुनाव के समय लोक लुभावने वादे किए जाने और उन्हें गुनाह किए जाने के संबंध में एक चुनाव सुधार की पहल करने का प्रयास देश के जाने-माने अधिवक्ता अश्वनी कुमार उपाध्याय ने करने की कोशिश की थी।

  • अश्वनी कुमार उपाध्याय ने की थी याचिका दायर 


चुनाव से पहले और चुनाव के पश्चात उपहार देने और देने के वादे करना एक इस प्रकार की परंपरा सी बन गई है। पिछले दिनों भाजपा के एक वरिष्ठ नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने  इन सब पर यानी चुनाव से पहले और चुनाव के बाद इस प्रकार दी जाने वाली सुविधा देने और देने के वादों के संबंध में चिंता व्यक्त करते हुए राजनीतिक पार्टियों की मान्यता रद्द करने की मांग को लेकर इस संबंध में एक याचिका दायर की थी। 

  • भारतीय चुनाव आयोग ने दिया यह जवाब 


इस याचिका का जवाब देते हुए भारतीय निर्वाचन आयोग ने एक हलफनामा प्रस्तुत किया…..जिसमें कहा कि वर्तमान व्यवस्था में  चुनाव से पहले व पश्चात राजनीतिक पार्टियों के फ्री में उपहार देने और देने के वादे करने पर रोक लगाया जाना उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। चुनाव आयोग में इस संबंध में कहा है कि अगर न्यायपालिका इस संबंध में कोई दिशा निर्देश जारी करती हैं  तो चुनाव आयोग उन्हें लागू कर सकता है। ज्ञात हो कि पिछले दिनों अश्वनी कुमार उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में इन पर रोक लगाए जाने की याचिका दायर की थी । अब यह देखना है कि देश की सर्वोच्च न्यायपालिका है इसमें क्या कुछ निर्देश देती है गाइड लाइन जारी करती हैं।

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