अक्सर हम जीवन में “सावधानी हटी दुर्घटना घटी” , “सावधानी ही सुरक्षा है”- जैसी कहावतें सुनते और पढ़ते आए  है  जब बचपन में साइकिल चलाना सीखा करते थे तब घर वाले कहां करते थे कि बेटा साइकिल सावधानी से चलाना जब बचपन था बचपन में किसे समझ होती है कि सावधानी किसे कहते हैं, जब चोटिल होकर घर पहुंचते थे तब सावधानी का एहसास हुआ करता था l जब बड़े हुए यातायात के नियमों को जाना ओर समझा,आज भी जब घर से निकलते हैं घर के बड़े बुजुर्ग कहते हैं कि बेटा सावधानी से जाना, आज कोरोना वैश्विक महामारी के दौर में ये कहावते  फिर चरितार्थ हो रही है  ओर अधिक सार्थक नजर आ रही हैं,जिंदगी का कोई भी दौर हो हमें समाज, घरवाले ओर सरकार  सावधान करती हैं  देश के प्रधानमंत्री भी अपने संबोधन में सावधानी अपनाने और लोक डाउन का प्रयोग करने के लिए आव्हान करते हैं अतः  हमे सावधानी का महत्व एक बार फिर  समझना होगा ।

 सावधानी का अर्थ क्या है ? 


    सावधानी से  यहाँ तात्पर्य सतर्क, होशियार ,सचेत रहने से है l आखिर यह सावधानियां सतर्कता होशियारी किसके लिए है । स्वयं व्यक्ति के लिए ,जब हर व्यक्ति सचेत,सावधान,होशियार,जागरूक होगा  तभी समाज और देश इस संकरण से सुरक्षित होगा, जब -जब भी कोई विपदा कोई समस्या आती है तो हम अपनी जिम्मेदारी छोड़कर इसके लिए हम कभी समाज को- तो कभी सरकार को ज़िम्मेवार ठहराते हैं, अब प्रश्न यह उठता है की हमारी स्वयं की सुरक्षा का दायित्व किसका है ? समाज, सरकार या स्वयं हमारा, आज इस माहामारी के दौर में हर  नागरिक इस  बात  समझ ले  कि उसकी स्वयं की  ओर परिवार की सुरक्षा उसकी स्वयं की  सावधानी में ही निहित है ।इससे ना केवल वह स्वयं को  वरन अपने परिवार, समाज और देश को कोरोनो जैसी वैश्विक माहमारी से  बचा सकता है क्योकि  ” सावधानी  में ही हमारी सुरक्षा है ” इस बात को समझना होगा, तभी हम, सरकार एवं समाज के साथ कंधे से कन्धा मिला कर  महामारी को पराजित कर सकते है।      किसी भी प्रकार की बीमारी, महामारी विशेषकर संक्रमण से फैलने वाली बीमारियों को दूर करने के लिए, उससे अपने आप को बचाने के लिए दो चरण होते हैं- पहला चरण कि हम सावधानीपूर्वक ,सचेत रहकर उस संक्रमण से अपने आपको, परिवार और समाज को बचाएं और दूसरा चरण होता है संक्रमण फैल जाने के बाद उसका उपचार करवाना l पहले हमें प्रथम चरण पर ही ऐसी महामारी को पराजित करना  बेहतर होगा और यह हम अपने आपको सावधान रखकर ही कर सकते हैं l            

आपकी सावधानी में ही आपका बचाव


कोई भी बीमारी महामारी तभी बनती है,जब लोगों को बीमारी की वजह और उससे बचाव के तरीकों का ज्ञान न हो या इसके संक्रमण से अपने आपको बचने में गैरजिम्मेदारी पूर्ण व्यवहार करते हो । कुछ ऐसा ही फिलहाल कोरोना वायरस को लेकर भी है। यह वैश्विक महामारी बन चुकी है ऐसे दौर में हम सावधान,सचेत रहे क्योंकि हमारी सावधानी में ही हमारी सुरक्षा निहित है l सरकार भी अपने स्तर पर इस महामारी के बचाव के लिए गाइडलाइन जारी की है, लोगों को जागरूक रहकर अपने घर में ही रहने की सलाह  दे रही है  सभी सरकारी और गैर सरकारी संगठन अपने अपने दायित्व निभा रहे हैं लेकिन अभी भी कुछ ना समझ लोग इसकी गंभीरता को नही समझ रहे है और अपनी ओर अपने परिवार की सुरक्षा स्वयं खतरे में डाल रहे है l क्या ? ऐसे लोग अपने आपकी अपने परिवार की सुरक्षा नही चाहते  चाहते है तो फिर क्यों वो  सावधान नही है  क्यो सरकार के गाइड लाइन का पालन नही करते, क्यो गैरजिम्मेदाराना व्यवहार कर रहे है क्यो ” आ बैल मुझे मार ” वाली कहावत को अपना रहे है । सरकार के बताए हुए रास्तों ,निर्देशो  का पालन करने में ही सावधानी है और यह सावधान ही हमारी सुरक्षा है यह बात जितना जल्दी हो समझ लेना चाहिये l    जब हर नागरिक स्वयं अपनी सुरक्षा के महत्व को समझते हुए अपनी सुरक्षा स्वयं करेगा तो निश्चित रूप से वह दौर दूर नहीं जब हम सब मिलकर इस महामारी को कह सकते हैं  ” कोरोना गो बैक ” ।   

आप एक पहल अपने आप से ही करें


यह वायरस सेकुलर /धर्म निरपेक्ष है जो जात ओर धर्म नही देखता यह किसी को भी  संक्रमित कर सकता है, उन लोगों को सोचना होगा जो यह समझते हैं कि मेरे अकेले से घर में रहने से क्या होगा तो उन्हें  यह समझना होगा की ” भले ही एक बूंद से घड़ा नहीं भरता लेकिन एक- एक बूंद से घड़ा जरूर भरता है ” इसीलिए सावधान रहें , सतर्क रहें ,होशियार रहें , सरकार के निर्देश का पालन करें और सुरक्षित रहें क्योंकि सावधानी में ही सुरक्षा है । निश्चित रूप से हमारे चिकित्सक हमारे पुलिसकर्मी कोरोना योद्धा की भूमिका निभा रहे हैं और आप भी सावधानी सतर्कता और होशियारी को अपनाकर कोरोना योद्धा बन सकते हैं क्योंकि सावधानी में ही सुरक्षा है ।

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