देश के सबसे बड़े राज्य राजस्थान में फिलहाल एक सदनीय मंडल है लेकिन निकट भविष्य में और जल्दी ही इसके द्विसदनात्मक होने की संभावना व्यक्त की जा रही है, क्योंकि राजस्थान विधानसभा ने विधान परिषद के गठन की एक बार फिर से अपनी सहमति दे दी है । जहां तक राजस्थान विधानसभा का सवाल है तो 1952 के प्रथम आम चुनाव से लेकर वर्तमान 15 वी विधानसभा के चुनाव होने तक कभी कांग्रेस पार्टी  की तो कभी भारतीय जनता पार्टी की कभी जनता दल की सरकार बनी । सरकार के गठन के साथ-साथ विधानसभा का अपना एक प्रतिपक्ष नेता भी होता है जो विपक्षी दल का नेतृत्व करता है।

  • कौन होता है विधानसभा में प्रतिपक्ष/विपक्ष का नेता

विधानसभा के चुनाव में बहुमत प्राप्त दल के अतिरिक्त ऐसा दूसरा दल जिसने विधानसभा के चुनाव में दूसरी सर्वाधिक सीटों पर विजय प्राप्त की हो उसे  मान्यता प्राप्त विपक्षी दल  कहते है और उसके नेता को विपक्षी दल का नेता कहा जाता हैं। यह  विधानसभा में विपक्ष का नेतृत्व करता है और इसे कैबिनेट स्तर के मंत्री का दर्जा प्राप्त होता है ।  

  • मान्यता प्राप्त विपक्षी दल की यह है शर्त

विधानसभा के निर्वाचन में जिस दल ने विधानसभा के कुल सदस्य संख्या की कम से कम 10% सदस्य संख्या प्राप्त की हो उसे मान्यता प्राप्त विपक्षी दल का दर्जा  प्राप्त होता है। 

ध्यान देने योग्य बात है कि अगर किसी भी दल ने सदन के कुल सदस्य संख्या का कम से कम 10% सदस्य होने की शर्त पूरी नहीं करता है तो उससे मान्यता प्राप्त विपक्षी दल का दर्जा प्राप्त नहीं होता है। 

  • विपक्ष के नेता को कैबिनेट मंत्री का दर्जा  प्राप्त होता है

विधानसभा में मान्यता प्राप्त विपक्षी दल के नेता को कैबिनेट स्तर के मंत्री का दर्जा प्राप्त होता है । उसे वही सुविधाएं, वेतन, भत्ते प्राप्त होते हैं जो राज्य में एक कैबिनेट मंत्री को प्राप्त होते हैं ।

आइए जानते हैं राजस्थान की प्रथम विधानसभा से लेकर वर्तमान  पंद्रहवीं विधानसभा तक के विपक्षी दल के नेताओ के बारे में। 

  • प्रथम विधानसभा में विपक्ष का नेता

राजस्थान में प्रथम विधानसभा के लिए 4 जनवरी से 24 जनवरी 1952 तक आम चुनाव हुए और जिसका गठन 29  मार्च 1952 को हुआ था।  इस पहली विधानसभा का कार्यकाल 29 मार्च 1952 से लेकर 23 मार्च 1957 तक रहा। इस पहली विधानसभा में दो सदस्य कुंवर जसवंत सिंह और तान सिंह विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता रहे।

  • दूसरी विधानसभा में विपक्ष का नेता

24 अप्रेल 1957 को गठित होने वाली राजस्थान की दूसरी विधानसभा के लिए अप्रैल 1957 में आम चुनाव हुए । इस विधानसभा का कार्यकाल 24 अप्रैल 1957 से लेकर 01 मार्च 1962 तक रहा। दूसरी विधानसभा में सदस्य नरेंद्र सिंह विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता रहे

  • तीसरी विधानसभा में विपक्ष का नेता

3 मार्च 1962 को गठित राजस्थान की तीसरी विधानसभा जिसका कार्यकाल 3 मार्च 1962 से 28 फरवरी 1967 तक रहा और इस विधानसभा में महारावल लक्ष्मण सिंह मान्यता प्राप्त विपक्षी दल के नेता थे ।

  • चतुर्थ विधानसभा में विपक्ष का नेता

1 मार्च 1967 को गठित राजस्थान की चतुर्थ विधानसभा का कार्यकाल 1 मार्च 1967 से लेकर 15 मार्च 1972 तक का था।  लक्ष्मण सिंह महारावल एक बार फिर और लगातार दूसरी बार मान्यता प्राप्त रक्षा दल के नेता चुने गए।

  • पांचवीं विधानसभा में विपक्ष का नेता

राजस्थान की पांचवीं विधानसभा जिसका कार्यकाल 15 मार्च 1972 से लेकर 30 अप्रैल 1977 तक रहा । इस विधानसभा में दो सदस्य महारावल लक्ष्मण सिंह और परसराम मदेरणा अलग-अलग कार्यकाल के लिए विपक्षी दल के नेता रहे । ध्यान देने योग्य बात यह है कि कि महारावल लक्ष्मण सिंह तीसरी बार विधानसभा के विपक्षी दल के नेता चुने गए थे ।

  • छठी विधानसभा में विपक्ष का नेता

22 जून 1977 से लेकर 17 फरवरी 1980 तक के कार्यकाल वाली राजस्थान की छठी विधानसभा जिसके तीन सदस्य अलग-अलग कार्यकाल के लिए विपक्षी दल के नेता रहे । जिसमें परसराम मदेरणा, रामनारायण चौधरी और लक्ष्मण सिंह थे । परसराम मदेरणा लगातार दूसरी बार तथा महारावल लक्ष्मण सिंह लगातार चौथी बार विधानसभा में विपक्षी दल के नेता चुने गए थे

  • सातवी  विधानसभा में विपक्ष का नेता

6 जून 1980 से लेकर 9 मार्च 1985 तक के कार्यकाल वाली राजस्थान की सातवीं विधानसभा में राजस्थान के बाबोसा के नाम से प्रसिद्ध भैरों सिंह शेखावत मान्यता प्राप्त विपक्षी दल के नेता चुने गए थे ।

  • आठवीं विधानसभा में विपक्ष का नेता

9 मार्च 1985 को गठित राजस्थान की आठवीं विधानसभा जिसका कार्यकाल 9 मार्च 1985 से लेकर 1 मार्च 1990 तक रहा । इस विधानसभा में दो व्यक्ति अलग-अलग कार्यकाल के लिए विपक्ष का नेता रहे जिनमें भैरों सिंह शेखावत और प्रोफेसर केदारनाथ शर्मा थे ।

  • नवीं विधानसभा में विपक्ष का नेता

नवीं विधानसभा का कार्यकाल 2 मार्च 1990 से लेकर 15 दिसंबर 1992 तक रहा था। इस विधानसभा में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत प्राप्त नहीं हुआ और भारतीय जनता पार्टी ने जनता दल के सहयोग से राज्य में दूसरी बार गैर कांग्रेसी सरकार बनाई थी। इस विधानसभा में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरिदेव जोशी विपक्ष के नेता थे ।

  • दसवीं विधानसभा में विपक्ष का नेता

राजस्थान में दसवीं विधानसभा का कार्यकाल 4 दिसंबर 1993 से लेकर 30 नवंबर 1998 तक जहां विधानसभा में परसराम मदेरणा एक बार फिर से प्रतिपक्ष के नेता चुने गए थे ध्यान देने योग्य है बात है कि परसराम मदेरणा दसवीं विधानसभा में तीसरी बार प्रतिपक्ष के नेता चुने गए हैं । इससे पूर्व पांचवीं और छठी विधानसभा में भी वे विपक्ष के नेता चुने गए थे। 

  • ग्यारहवीं विधानसभा में विपक्ष का नेता

11 वीं विधानसभा जिसका कार्यकाल 1 दिसंबर 1998 से लेकर 5 दिसंबर 2003 तक रहा । इसकी पहली बैठक 4 जनवरी 1999 को हुई  और इस विधानसभा में दो सदस्य अलग-अलग कार्यकाल के लिए विधानसभा में विपक्षी दल के नेता रहे । इन दो सदस्यों में भैरों सिंह शेखावत जो दूसरी बार विधानसभा में विपक्ष के नेता चुने गए इसके अतिरिक्त गुलाबचंद कटारिया भी  गयारहवी विधानसभा में विपक्षी दल के नेता चुने गए थे।

  • बारहवीं  विधानसभा में विपक्ष का नेता

पहली बार भारतीय जनता पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलने वाली राजस्थान की 12 वीं विधानसभा का कार्यकाल 6 दिसंबर 2003 से लेकर 10 दिसंबर 2008 तक रहा और 15 जनवरी 2004 को इस विधान सभा की पहली बैठक आयोजित हुई थी । कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बी.डी.कल्ला ,रामनारायण चौधरी और हेमाराम चौधरी इस विधानसभा में विपक्ष दल के नेता चुने गए थे।

  • तेरहवीं विधानसभा में विपक्ष का नेता

200 सदस्यों वाली राजस्थान की तेरहवीं विधानसभा जिसका कार्यकाल 11 दिसंबर 2008 से लेकर 10 दिसंबर 2013 तक रहा। इसके गठन के पश्चात 01 जनवरी 2009 को इसकी पहली बैठक आयोजित हुई थी । कांग्रेस की बहुमत वाली इस विधानसभा में वसुंधरा राजे सिंधिया और गुलाबचंद कटारिया मान्यता प्राप्त विपक्षी दल के नेता चुने गए थे । ध्यान देने योग्य बात यह है कि राजस्थान की किसी भी विधानसभा में पहली बार एक महिला विपक्षी दल की नेता चुनी गई थी।

  • चौदहवी विधानसभा में विपक्ष का नेता

11 दिसंबर 2013 से लेकर 16 दिसंबर 2018 तक के कार्यकाल वाली राजस्थान की 14 वीं विधानसभा की पहली बैठक 21 जनवरी 2014 को आयोजित हुई थी । इस विधानसभा में  कांगेस के वरिष्ठ नेता श्री रामेश्वर डूडी सदन में विपक्षी दल के नेता चुने गए थे।

  • पंद्रहवीं विधानसभा में विपक्ष का नेता

7 दिसंबर 2018 को हुए 15 वी विधानसभा के निर्वाचन में कांग्रेस पार्टी को बहुमत मिला । दूसरे स्थान पर भारतीय जनता पार्टी रही जिसके वरिष्ठ नेता गुलाबचंद कटारिया सदन में विपक्षी दल के नेता और राजेंद्र सिंह राठौड़ विपक्षी दल के उप नेता है।

  • यह रहे सर्वाधिक बार विपक्ष के नेता 

महारावल लक्ष्मण सिंह चार बार राजस्थान विधानसभा में विपक्षी दल का नेता चुने गए थे पहली बार तीसरी विधानसभा में उसके पश्चात चतुर्थ ,पाँचवी, छटवी विधानसभा मैं विपक्ष के नेता रहे ।

  • राजस्थान विधानसभा की एकमात्र महिला विपक्ष की नेता

राजस्थान विधानसभा की अब तक की एकमात्र महिला विपक्षी दल की नेता वसुंधरा राजे सिंधिया रही है।  यह राजस्थान की तेरहवीं विधानसभा में विपक्षी दल की नेता रही थी। 

  • इस विधानसभा में रहे सर्वाधिक विपक्ष के नेता

छठवीं और बारहवीं विधानसभा में सर्वाधिक 3-3 विपक्ष के नेता रहे है । छटवी विधानसभा में  परसराम मदेरणा, रामनारायण चौधरी और लक्ष्मण सिंह कथा 12वी विधानसभा में बीडी कल्ला, रामनारायण चौधरी ,हेमाराम चौधरी विपक्ष के नेता रहे ।

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