संविधान निर्माण में आधी आबादी की भागीदारी

        किसी ने क्या खूब कहा है की धन के रूप में लक्ष्मी है नारी ,विद्या के रूप में सरस्वती है नारी , माँ भी है नारी, बहन भी है नारी, बहु भी नारी, बेटी भी है नारी ,जिस रूप में देखो बड़ी महान है नारी । प्राचीन समय से ही विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय समाज की महिलाओं ने भी अपनी प्रतिभा का लोहा बनाया है। धर्म आध्यात्मिक सामाजिक सरोकार राजनीति खेलकूद जिस क्षेत्र में  महिलाएं कई क्षेत्रों में पुरुषों से भी आगे बढ़कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनाया हैं ।जो यह साबित कर रहा है कि महिलाएं भी किसी से कम नहीं  भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में भी महिलाओं ने कंधे से कंधा मिलाकर कार्य किया था अनेक महिलाएं इतिहास में अमर हुई है जिनका नाम आज भी बड़े सम्मान के साथ एक आदर्श के रूप में लिया जाता है ।

 स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं की भागीदारी सर्वप्रथम एक सहयोगी के रूप में हुई थी लेकिन आगे चलकर वह कंधे से कंधा लगाकर स्वतंत्रता संग्राम में आगे बढ़कर प्रत्यक्ष रूप से भूमिका निभाने लगी थी न केवल स्वतंत्रता संग्राम  में ही नही बल्कि  देश के संविधान निर्माण में भी भारतीय महिलाओं ने बढ़ चढ़कर भाग लिया और अपनी प्रतिभा का लोहा मनाया लंबे  समय के पश्चात जब भारतीय संविधान और संविधान सभा के निर्माण की मांग को स्वीकार किया गया ।

  • संविधान सभा गठन और महिलाये

कैबिनेट मिशन योजना के तहत पर सविधानसभा का गठन हुआ  जिस में भी भारतीय महिलाओं की भागीदारी रही  संविधान निर्माण की बात आती है तो शायद ही हम आदरणीय डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी का नाम सत्य ही मन मस्तिष्क पर आ जाता है जुबान पर आ जाते हैं जो कि संविधान प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे और उनका सदा निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान था लेकिन प्रधान का निर्माण सिद्धांत सभा ने किया था और उस संविधान सभा में नारी शक्ति का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है जिनको शायद हम भूल जाते हैं या उसको याद करने की जहमत ही नहीं उठाते ।

केबिनेट मिशन योजना 1946 के तहत संविधान सभा के गठन के लिए जुलाई अगस्त 1946 को संविधान सभा के 389 सदस्यो के  चुनाव हुए लेकिन विभाजन के पश्चात 299 सदस्य ही रह गए ।  जिनमें 15 महिलाएं सदस्य के रूप में निर्वाचित हुई थी । 299 से 15 महिला सदस्य जिनका जीवन तपा तपा या था जीवन में इन्होंने बड़ा उतार-चढ़ाव देखा था कुछ महिलाएं अभिजात वर्ग से थी और कुछ महिलाएं दलित वर्ग से थी । 

 इन चुनावों में  मुस्लिम महिला बेगम एजाज रसूल जुलाई 1946 में मुस्लिम लीग की तरफ से संविधान सभा के सदस्य निर्वाचित हुई थी बनी थी लेकिन मुस्लिम लीग के द्वारा संविधान सभा का बहिष्कार किए जाने के कारण वह बैठक में नहीं आई भारत विभाजन के पश्चात बेगम एजाज रसूल फिर से संविधान सभा के सदस्य बने यही एकमात्र मुस्लिम महिला थी जिन्होंने संविधान निर्माण में भाग लिया था।

इसके अतिरिक्त मुस्लिम लीग की तरफ से ही पंजाब से निर्वाचित होने वाली महिला सदस्य बेगम जहांआरा शाहनवाज और बंगाल से निर्वाचित होने वाली महिला बेगम साहिबा सुहरावर्दी ने संविधान सभा में भाग नहीं लिया था क्योंकि यह विभाजन के पश्चात यह क्षेत्र पाकिस्तान में चले गए थे इसलिए बेगम एजाज रसूल एकमात्र मुस्लिम महिला थी जिन्होंने संविधान निर्माण में भाग लिया था ।आपको यह जानकर भी  आश्चर्य होगा कि देशी रियासतों से प्रतिनिधित्व करने वाली एकमात्र महिला एंटीमस्करीनी थी ।

  •  संविधान सभा की 15 महिला सदस्य

1 अम्मू स्वामीनाथन  (मद्रास)

2 दाक्षायानी वेलायुदन   (मद्रास)

3 जी दुर्गाबाई   (मद्रास)

4  हँसा  मेहता (बम्बई )

5 माधवी चौधरी (उड़ीसा)

6 सुचेता कृपलानी (संयुक्त प्रांत ) 

7 पूर्णिमा बनर्जी (सयुक्त प्रांत )

8 कमला चौधरी (  संयुक्त प्रांत )

9 विजय लक्ष्मी पंडित (  संयुक्त प्रांत )

10 बेगम एजाज रसूल (  संयुक्त प्रांत )

11 राजकुमारी अमृत कौर ( मध्य प्रान्त बरार )

12 सरोजनी नायडू ( बिहार )

13 लीला रे ( प.बंगाल ) 

14 रेणुका रे (प.बंगाल )

15  एनी मस्करीनी ( त्रावनकोर व कोच्ची संंघ ).

  सविधान सभा और संविधान निर्माण  में शामिल होने वाली इन 15 महिलाओं में से मद्रास से 3 महिला सदस्य, मुंबई से, एक महिला उड़ीसा से ,एक महिला संयुक्त प्रांत से, पांच मध्य प्रांत  से एक, बिहार से एक, पश्चिमी बंगाल से दो और त्रावणकोर एवं कोच्चि संघ से एक महिला सदस्य थी  लेकिन 9 दिसंबर 1946 को संविधान सभा की पहली बैठक में जिन कुल 211 सदस्यों ने भाग लिया था इनमें से अम्मू स्वामीनाथन, दाक्षायानी वेलायुदन,जी दुर्गाबाई,हंसा मेहता , लीला रे, पूर्णिमा बनर्जी, सुचेता कृपलानी, कमला चौधरी ,सरोजिनी नायडू और मालती चौधरी  आदि 10 महिला सदस्यों ने संविधान सभा की पहली बैठक में हिस्सा लिया था ।  इन्हीं 10 महिलाओं का भारतीय संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान रहा यही अधिक भागीदार रही थी

  • विभिन्न समितियों की सदस्य भी रही महिलायें

इन महिलाओं ने न केवल सविधान सभा के सदस्य के रूप में  थी ।  बल्कि संविधान निर्माण से संबंधित अनेक समितियों से यह जुडी हुए भी थी । कुछ महिलाएं जो संविधान सभा के सदस्य होने के साथ-साथ संविधान  निर्माण समितियों के सदस्य भी रहे और कुछ महिलाएं ऐसी थी जो सविधान सभा का सदस्य के रूप में नहीं थी लेकिन उन्होंने ऐसी समितियों के सदस्य के रूप में अपना योगदान दिया था । जिसे भारत सरकार में पहली कैबिनेट मंत्री रही राजकुमारी अमृत कौर मौलिक अधिकार उप समिति एवं अल्पसंख्यक उप समिति के सदस्य भी रही थी ।

  • महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान और तथ्य

एकमात्र मुस्लिम महिला सदस्य बेगम एजाज रसूल ने विधानसभा में बहस के दौरान बढ़कर हिस्सा लिया था और मौलिक अधिकारों पर युक्तियुक्त प्रतिबंध लगाए जाने का उन्होंने समर्थन किया  । भारतीय संविधान की प्रस्तावना और उसकी भाषा भले ही हमने अमेरिका और आयरलैंड से ली गई हो लेकिन भारतीय संविधान की प्रस्तावना में हम भारत के लोग शब्द पूर्णिमा बनर्जी की सलाह पर ही शामिल किया गया था ।

मद्रास से सविधान सभा में निर्वाचित महिला सदस्य दाक्षायानी वेलायुदन सविधान सभा की दलित महिला सदस्य थी साथ में  ये संविधान सभा  की सबसे कम उम्र (34 वर्ष ) की सदस्य थी । इन्होंने छुआछूत  का करारा विरोध किया था । जी दुर्गाबाई  ने संविधान सभा में  अपने विचार व्यक्त करते हुए पैतृक संपत्ति में महिलाओं को हिस्सा का भरपूर समर्थन किया साथ ही इन्होंने संविधान सभा में लगभग 750 संशोधन के प्रस्ताव प्रस्तुत किए थे ।

इसके अतिरिक्त संयुक्त प्रांत से संविधान सभा के सदस्य विजय लक्ष्मी पंडित लगभग 8 माह तक ही संविधान की सदस्य के रूप में रही क्योंकि स्वतंत्रता के पश्चात  इनको संयुक्त राष्ट्र संघ में राजदूत के रूप में   भेज दिया गया था । इन सब की अतिरिक्त हंसा मेहता ने समान नागरिक सिविल संहिता पर अपनी राय संविधान सभा में प्रस्तुत की थी हालांकि इस बात का विरोध हुआ था लेकिन इस प्रावधान को राज्य नीति के निदेशक तत्व में शामिल कर लिया गया था

इस प्रकार कहां जा सकता है किस संख्या बल के दृष्टिकोण से भले ही संविधान सभा में महिलाओं की संख्या कम हो लेकिन उनके योगदान को नकारा नहीं जा सकता । संविधान सभा हो या संविधान सभा में विभिन्न समितियों के सदस्य के रूप में सब ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था । महिला सदस्यो के द्वारा अपने ओजस्वी भाषण, विचारों, मतों से सविधान सभा को प्रभावित किया  था और अपनी प्रतिभा का लोहा मनाया था और उनके  परामर्श के अनुसार ही के अनुसार संविधान में अनेक प्रावधान जोड़े गए । 

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