संविधान निर्माताओं के द्वारा भारत में संसदीय शासन व्यवस्था को अपनाया गया है  । इस शासन प्रणाली को मंत्रिमंडलीय या वेस्टमिंस्टर मॉडल भी कहा जाता है । इस शासन प्रणाली के तहत दो प्रकार की कार्यपालिका होती है। एक नाम मात्र की कार्यपालिका है जिसका मुखिया राष्ट्रपति होता है तथा दूसरी वास्तविक कार्यपालिका जिसका मुखिया प्रधानमंत्री होता है जो शासनाध्यक्ष भी कहलाता है या यूं कहे कि प्रधानमंत्री ही  संपूर्ण शासन प्रणाली की  धुरी होता है जो कि सरकार व देश का वास्तविक प्रमुख  भी होता है । सर विलियम हॉट कोर्ट ने प्रधानमंत्री को तारों के बीच चंद्रमा की  संज्ञा दी है । इस  पद का उल्लेख भारतीय संविधान के अनुच्छेद 74 में  स्पष्ट रूप से है । इस अनुच्छेद में कहा गया है कि राष्ट्रपति को उसके कार्यों में सहयोग और सलाह देने के लिए एक मंत्री परिषद होगी उसका मुखिया प्रधानमंत्री होगा। 

देश के पहले आम चुनाव सर्वप्रथम 1952 में हुए तब से लेकर अब तक 17 वी लोक सभा के चुनाव जो कि  2019 में हुए तक 14 व्यक्ति अलग अलग कार्यकाल के लिये इस पद को सुशोभित कर चुके हैं । देखा जाए तो प्रधानमंत्रीयों के इस क्रम में कुछ प्रधानमंत्री ऐसे भी हैं जिन्होंने कार्यकाल की समाप्ति से पहले ही अपने पद से  त्यागपत्र दे दिया और कुछ ऐसे प्रधानमंत्री भी है जिनका कार्यकाल  पूरा होने से पूर्व ही उनकी मृत्यु हो गई । असामयिक मृत्यु के कारण रिक्त हुये पद पर उनकी जगह किसी और को देश के कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में भी कार्य किया। 


कौन है वह प्रधानमंत्री जिनकी पद पर रहते मृत्यु हुई


 देश के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तक देश में तीन बार ऐसी परिस्थितियां पैदा हुई । जिनमें कार्यकाल की समाप्ति से पूर्व ही असामयिक रूप से ही प्रधानमंत्री की मृत्यु हो गई और उनकी जगह किसी ने कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया हो । उन प्रधानमंत्रीयों और कार्यवाहक प्रधानमंत्रीयों के बार मे कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां कुछ इस प्रकार से है ।

1 पहले प्रधानमंत्री जिनकी पद पर रहते मृत्यु हुई


देश के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरूइन्होंने 16 अगस्त 1947 को प्रधानमंत्री पद सर्वप्रथम ग्रहण किया था। प्रथम आम चुनाव 1952 के बाद से लेकर लगातार 1957 व 1962 में तीन बार  प्रधानमंत्री बने।  लेकिन अपने तीसरे कार्यकाल के पूरा करने से पूर्व ही पद पर रहते हुए 27 मई 1964 को ही इनकी मृत्यु हो गई । इन्होंने इस पद पर कुल  16 वर्ष 9 माह 11 दिन कार्य किया । देश में अब तक के प्रधानमंत्रियों में यह सबसे अधिक अवधि तक  प्रधानमंत्री  रहने वाले व्यक्ति है ।


गुलजारी लाल नंदा बने पहले कार्यवाहक प्रधानमंत्री

 पंडित जवाहरलाल नेहरू की असामयिक मृत्यु के बाद पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री और कांग्रेस पार्टी के प्रति समर्पित  व्यक्ति गुलजारी लाल नंदा ने देश के पहले कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में पद ग्रहण किया । उन्होंने 27 मई 1964 को कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में पद ग्रहण किया तब से लेकर 9 जून 1964 तक कुल 13 दिन तक इस पद पर कार्य किया । 

2  दूसरे प्रधानमंत्री जिनकी पद पर रहते हुए मृत्यु हुई

 देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जो कार्यकाल की दृष्टि से चौथे प्रधानमंत्री और व्यक्ति के रुप मे दूसरे व्यक्ति थे ।  पंडित जवाहरलाल नेहरु की मृत्यु के बाद ये ऐसे दूसरे ऐसे प्रधानमंत्री है जिनकी पद पर रहते हुए कार्यकाल के दौरान असामयिक मृत्यु हुई । इन्होंने 9 जून 1964 को प्रधानमंत्री पद ग्रहण किया था तथा  इनका कार्यकाल 09 जून 1964 से लेकर 11 जनवरी 1966 तक रहा ।  प्रधानमंत्री के रूप में इनका कार्यकाल  1 वर्ष 7 माह और 2 दिन तक  ही रहा ।  भारत- पाकिस्तान के बीच 1965 के युद्ध के पश्चात ताशकंद में समझौते/ संधि के लिए की गई विदेश यात्रा के दौरान 11 जनवरी 1966 को  ताशकंद में ही इनकी मृत्यु हो गई ।

गुलजारीलाल नंदा फिर से बने दूसरे कार्यवाहक  प्रधानमंत्री


सादगी के प्रति मूरत लाल बहादुर शास्त्री की ताशकंद में असामयिक मृत्यु होने के पश्चात एक बार फिर से प्रधानमंत्री का पद रिक्त हो गया गुलजारी लाल नंदा  फिर से देश के कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने । लगातार दूसरी बार देश के कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में पद ग्रहण करने वाले अब तक यह एकमात्र व्यक्ति है । इस बार  इन्होंनेे 11 जनवरी 1966 को कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रुप में  पद ग्रहण किया और 24 जनवरी 1966 तक  इन्होंने  इस पद पर कार्य किया । ऐसे संयोग कहां जाए या कुछ और एक बार फिर से इन्होंने कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में 13 दिन कार्य किया  ज्ञात हो कि पिछली बार भी पंडित जवाहरलाल नेहरु की मृत्यु के बाद उन्होंनेेे कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप मेंउनका कार्यकाल 13 दिन ही रहा था ।

3 तीसरे प्रधानमंत्री जिनकी पद पर रहते मृत्यु हुई

देश की एकमात्र महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1966 से लेकर 1977 तक 2 बार प्रधानमंत्री रही । इसके बाद अपने तीसरे कार्यकाल के लिए इन्होंने 14 जनवरी 1980 को प्रधानमंत्री पद ग्रहण किया तब से लेकर 31 अक्टूबर 1984 तक इन्होंने इस पद पर कार्य किया लेकिन कार्यकाल समाप्ति से पूर्व ही 31 अक्टूबर 1984 को इनके दो अंग रक्षक बेअंत सिंह और केहर सिंह ने इनकी हत्या कर दी गई । अपने तीसरे कार्यकाल के दौरान इनका कार्यकाल 4 वर्ष 9 माह और 17 दिन तक रहा। इंदिरा गांधी तीसरे ऐसे प्रधानमंत्री हैं ।जिनकी पद पर रहते हुए मृत्यु हुई।

राजीव गांधी बने तीसरे कार्यवाहक प्रधानमंत्री

देश की पहली महिला प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 31 अक्टूबर 1984 को हत्या के बाद अचानक आई इस अस्थिरता को खत्म करने के लिए राजनीति से कोसों दूर रहने वाले एक पायलट उनके पुत्र राजीव गांधी ने 31 अक्टूबर 1984 को ही कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में जिम्मेदारी दी गई । इन्होंने 31 दिसंबर 1984 तक जब लोकसभा विघटित हुई तब तक इस पद पर कार्य किया । इस पद पर इनका कार्यकाल 2 माह तक रहा ।

इंदिरा गांधी की हत्या के पश्चात राजीव गांधी को कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में शपथ दिलाने वाले राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह थे


कार्यवाहक का अर्थ

शाब्दिक अर्थ से देखा जाये तो कार्यवाहक का मतलब  किसी भी पदाधिकारी के अवकाश पर चले जाने या  अचानक ही पद रिक्त हो जाने की स्थिति में उसके स्थान पर अस्थाई रूप से कार्य करने वाला व्यक्ति या पदाधिकारी ही कार्यकारी या कार्यवाहक कहलाता है ।  इसी आधार पर कार्यवाहक प्रधानमंत्री के बारे में कहा जा सकता है की देश के प्रधानमंत्री के पद के अचानक रिक्त हो जाने या प्रधानमंत्री के अवकाश पर चले जाने की स्थिति में किसी व्यक्ति को कार्यकारी या कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार सौंपा जाता है ।

कार्यवाहक प्रधानमंत्री का पद और संविधान

पंडित जवाहरलाल नेहरु और लाल बहादुर शास्त्री की असमायिक मृत्यु के पश्चात भले ही गुलजारी लाल नंदा ने  दो बार देश के कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में कार्य संभाला हो लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि भारतीय संविधान के किसी भी अनुच्छेद में कार्यवाहक प्रधानमंत्री पद का उल्लेख नहीं है । बल्कि यह तो एक  परिस्थितियों की उपज है जब अचानक कोई अस्थिरता आ जाये तो उसको संभालने के लिये या चुनाव के पश्चात जब तक सदन अपना नेता नहीं चुन लेता है तब तक के लिए अस्थाई रूप से कार्यवाहक प्रधानमंत्री चुन लिया जाता है और ज्यों ही सदन अपना नेता चुनता है कार्यवाहक प्रधानमंत्री को अपना पद त्यागना पड़ता है।


कौन है गुलजारी लाल नंदा ? 


गांधीवादी विचारधारा के समर्थक और कांग्रेस के कर्मठ कार्यकर्ता गुलजारी लाल नंदा का जन्म 4 जुलाई 1898 को सियालकोट जो कि वर्तमान में पाकिस्तान में है में हुआ था । अपनी दीर्घायु लगभग 100 वर्ष की आयु पूरी करने के पश्चात 15 जनवरी 1998 को उनकी मृत्यु हो गई । इनके पिता का नाम बुलाकी राम नंदा तथा माता का नाम श्रीमती ईश्वर देवी नंदा था।  गुलजारी लाल नंदा स्वतंत्रता सेनानी थे स्वतंत्रता के साथ ही यह राजनीति में सक्रिय भी थे । आम जनता में एक गांधीवादी नेता के रूप में इनकी पहचान थी इसीलिए प्रथम आम चुनाव में यह लोकसभा के सदस्य निर्वाचित हुए थे तथा लगातार प्रथम पांच आम चुनाव में यह लोकसभा के सदस्य चुने गए थे। 
1960 से 1965 तक योजना आयोग के उपाध्यक्ष भी रहे । इसके अतिरिक्त लेखन कार्य में इनकी विशेष रूचि थी । उन्होंने अपने जीवन में अनेक पुस्तकों की रचना की जैसे आस्पेक्ट्स ऑफ़ खादी, अप्रोच टू द सेकंड फ़ाइव इयर प्लान, गुरु तेगबहादुर, संत एंड सेवियर, हिस्ट्री ऑफ़ एडजस्टमेंट इन द अहमदाबाद टेक्सटाल्स, फॉर ए मौरल रिवोल्युशन तथा सम बेसिक कंसीड्रेशन।

कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में गुलजारी लाल नंद का रहा 13 -13 दिन का कार्यकाल

पंडित जवाहरलाल नेहरु की मृत्यु के बाद कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में पद ग्रहण करने की बात हो या लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु के बाद कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में कार्य करने की बात यह एक संयोग की बात है या  परिस्थितियों की उपज या कुछ और कि दोनों ही बार गुलजारी लाल नंदा ही देश के कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने और दोनों ही बार इन्होंने 13-13 दिन इस पद पर कार्य किया ।

एक ही राष्ट्रपति ने दिलाई दोनों ही बार गुलजारी लाल नंदा को शपथ


प्रथम बार पंडित जवाहरलाल नेहरु की मृत्यु के बाद और दूसरी बार लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु के बाद  दो बार जब गुलजारी लाल नंदा ने कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में कार्य संभाला तब दोनो ही बार  गुलजारी लाल नंदा को शपथ देश के राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन के द्वारा दिलाई गई थी ।


ध्यातव्य- 

  • प्रधानमंत्रियों में कार्यकाल की अवधि की दृष्टि से देखा जाए तो अटल बिहारी वाजपेयी सबसे कम अवधि के लिए प्रधानमंत्री रहे  उन्होंने 16 मई 1996 से 1 जून 1996 कुल 16 दिन इस पद पर कार्य किया था ।
  • कार्यवाहक प्रधान मंत्रियों में सबसे अधिक लंबा कार्यकाल राजीव गांधी का रहा था जिन्होंने 31 अक्टूबर 1984 से लेकर 31 दिसंबर 1984 तक कार्य किया।

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