constitution and government · September 29, 2021 0

जिला प्रशासन व उसकी सरंचना : भारत मे पहला जिला कलेक्टर कौंन था ?

जिला प्रशासन
  • जिला (District)

किसी भी राज्य और राज्य सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था को सुगमता पूर्वक संचालन के लिए प्रशासन की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है । राज्य प्रशासन को विभिन्न संभागों और संभागों को जिलों में विभाजित किया गया है । जिला शब्द लेटिन भाषा के शब्द ‘डिस्ट्रिक्ट’ ( District) का प्रायवाची शब्द है जिसका अर्थ होता है न्यायिक प्रशासन के उद्देश्य से बनाया गया क्षेत्र या एक इकाई । यह जिला प्रशासन राज्य सरकार के सचिवालय और तहसील प्रशासन के बीच समन्वय/ तालमेल बनाए रखने का कार्य करता है और किसी भी राज्य की सुरक्षा व विकास में जिला प्रशासन की परिधि में ही आते हैं।

  • जिला प्रशासन 

जिला प्रशासन भले ही आधुनिक समय की देन मानी जाती हो लेकिन भारत में प्राचीन समय से ही जिला प्रशासन जैसी इकाइयां कार्य करती रही है। भले ही उनका नाम और उनके मुखिया, प्रशासक का पद नाम कुछ भी रहा हो ।

  • मौर्यकाल में जिला प्रशासन

जिला प्रशासन जैसी व्यवस्था का सर्वप्रथम इसके संकेत मौर्य काल में भी देखने को मिलता था । जहां जिले को अहारा और जिला प्रशासन के मुखिया को राजूका  व जिला कलेक्टर को स्थानिक के नाम से भी पुकारा जाता था ।

  • गुप्तकाल में जिला प्रशासन


जहां तक गुप्त काल की बात की जाए तो जिले को विषय और जिला कलेक्टर जैसे पद को विषयपति के नाम से जाता था। 

  • मुगलकाल में जिला प्रशासन

गुप्त काल में जिले प्रशासनिक व्यवस्था की एक इकाई जिला था जिसको सरकार के नाम से जाना जाता था और जिले के मुखिया को  जैसे नाम से जाना जाता रहा। 

  • अंग्रेजी काल और जिला प्रशासन

 भारत में सर्वप्रथम आधुनिक जिला प्रशासन जैसी प्रशासनिक इकाइयों की शुरुआत की बात की जाए तो प्लासी के युद्ध के पश्चात जब बंगाल पर अंग्रेजी हुकूमत का अधिकार हुआ और प्रशासनिक व्यवस्था को बनाए रखें के लिए सर्वप्रथम 1772 में तत्कालीन गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स ने बंगाल में कलेक्टर जैसे पद का सर्वप्रथम सजन किया था और इसी पद के सर्जन के साथ आधुनिक युग में जिला प्रशासन का एक नया अध्याय एक नया युग एक नया रूप शुरू होता है।

  • कलेक्टर पद का सृजन

जिला के शासन और प्रशासन को सुदृढ़ और व्यवस्थित करने के लिए रेगुलेटिंग एक्ट लाया गया था। उसके पश्चात 1773 में ही कलेक्टर के पद को समाप्त कर दिया गया लेकिन कुछ ही समय के पश्चात 1781 में एक बार फिर से इस पद की आवश्यकता महसूस की गई परिणाम स्वरूप इस पद का पुणे सृजन किया गया।

ब्रिटिश शासन काल में सर्वप्रथम 1776 में पहली बार डिस्ट्रिक्ट शब्द का प्रयोग किया और इसके मुखिया को जो कि कोलकाता के दीवान थे उनके लिए डिस्टिक कलेक्टर जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया था ।

ध्यातव्य:- ब्रिटिश सरकार के द्वारा भारत में कलेक्टर जैसे पद पर सर्वप्रथम रोल सेल्डन लिफ्ट किया था ।

  • जिला और जिला कलेक्टर 

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 233 में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति के क्रम में जिला शब्द का प्रयोग किया गया जिला कलेक्टर जिला कलेक्टर को जिलाधीश या जिला अधिकारी जिला दंड नायक उपायुक्त आदि नाम से भी जाना जाता रहा है इस की नियुक्ति संघ लोक सेवा आयोग के द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से की जाती है । जिला कलेक्टर को जिला  दण्डाधिकारी भी कहा जाता है, जो कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी होते हैं|

यह कलेक्टर राज्य सरकारों के लिए कार्य करता है।  इसीलिए इनका वेतन भी राज्य सरकार द्वारा ही दिया जाता है।

  • जिला प्रशासन की संरचना

० जिला प्रशासन के प्रशासनिक मुखिया जिला कलेक्टर जो कि  दो महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एक  राजस्व विभाग के सर्वोच्च अधिकारी के रूप में और जिले के एक प्रशासक के सर्वोच्च अधिकारी के रूप में । 

० जिला प्रशासन के मुखिया जिला कलेक्टर को जिला स्तरीय विभागीय अधिकारी, अतिरिक्त जिला कलेक्टर (प्रशासन ) और अतिरिक्त जिला कलेक्टर( विकास ) तीन अलग-अलग विभागों जिम्मेदारी है।

० जहां तक प्रशासन का सवाल है तो जिला प्रशासन को तीन विभाग जेल प्रशासन,कानून व्यवस्था, पुलिस प्रशासन तथा राजस्व प्रशासन है।

० जेल प्रशासन का जिला स्तरीय मुखिया जिला जिला अधिकारी तथा कानून और व्यवस्था पुलिस प्रशासन में पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, उप पुलिस अधीक्षक, सर्किल निरीक्षक, निरीक्षक, उप निरीक्षक,हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल स्तरीय अधिकारी और कर्मचारी होते हैं।

० राजस्व (प्रशासन) जिले का सर्वोच्च राजस्व अधिकारी जिला कलेक्टर होता है उसके पश्चात उपखंड स्तर पर उपखंड अधिकारी, तहसील स्तर पर तहसीलदार, कानूनगो और ग्रामीण स्तर व राजस्व गांव पर पटवारी होता है।
जिला कलेक्ट, जिला अधिकारी पुलिस अधीक्षक, भारतीय संघ लोक सेवा आयोग से चयनित अधिकारी होते हैं।

० उपखंड स्तर के प्रशासनिक और राजस्व सर्वोच्च अधिकारी उपखंड अधिकारी होता है जिसकी दोहरी भूमिका होती है ।उपखंड अधिकारी और उपखंड मजिस्ट्रेट यह राज्य सेवा का अधिकारी होता है।

० तहसीलदार तहसील स्तरीय सर्वोच्च राजस्व अधिकारी होता है।  इसके अतिरिक्त यह कानून और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को भी देखता है। यह राज्य प्रशासनिक सेवाओं का अधिकारी होता है।जिसका चयन राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा किया जाता है।

० ग्राम पंचायत और राजस्व गांव का राजस्व अधिकारी पटवारी होता है जो राज्य सरकार का एक कर्मचारी होता है।             

  •   जिला प्रशासन की सरंचना
  • जिला कलेक्टर के अधिकार और शक्तियां  
  • 1 जिले के मुखिया के रूप में कार्य 
  • 2 वितीय अधिकारी के रूप में कार्य 
  • 3 जिला प्रशासन प्रशासक के रूप में कार्य 
  • 4 कर संग्रहक के रूप में कार्य 
  • 5 जिला मजिस्ट्रेट के रूप में कार्य 
  • 6 जिला निर्वाचन अधिकारी के रूप में 
  • 7 दंड नायक के रूप में 
  • 8 आपदा निवारक के रूप में 
  • 9 ग्रामीण विकास अभिकरण का पदेन अध्यक्ष के रूप में 
  • 10 कानून व्यवस्था बनाए रखना 
  • 11 पुलिस पर नियंत्रण 
  • 12 विदेशियों के परिचय पत्र की जांच करना।