लोकतंत्र की प्रारंभिक पाठशाला कहलाने वाली पंचायती राज व्यवस्था/  ग्रामीण पंचायती राज व नगरीय पंचायतीराज  संस्थाओं का कार्यकाल सामान्यतः 5 वर्ष का होता है। झा तक ग्रामीण पंचायतीराज संस्थाओं की बात है तो 73 वे संविधान संशोधन अधिनियम 1993 के अंतर्गत संविधान के अनुच्छेद 243(E) के तहत ग्रामीण पंचायत राज संस्थाओं का कार्यकाल 5 वर्ष होता है। लेकिन कार्यकाल की समाप्ति के पूर्व ही भंग हो जाने या पद से त्यागपत्र देने से रिक्त हुए पद के लिए 6 माह के अंदर पुनः चुनाव करवाना आवश्यक होता हैं।

  • कार्यकाल या पहले ही पद रिक्त होना

पंचायतीराज संस्थाओं का कार्यकाल समान्यतया 5 वर्ष का होता है लेकिन कहा जाता है  कि राजनीति संभावनाओं का खेल है जहां कुछ भी निश्चित नही है।कभी  ऐसी कुछ परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती है, जिसके कारण इनका कार्यकाल 5 वर्ष पूर्व भी समाप्त  हो सकता है या ऐसी कोई स्थिति उत्पन्न हो सकती है कि इन्हें भंग किया जा सकता है या उन्हें निलम्बित किया जा सकता है ,अविश्वास प्रस्ताव द्वारा हटाया जा सकता है ।किसी भी प्रकार से पद रिक्त हो सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसी ही कुछ परिस्थितियां को और उस प्रक्रिया को ।

  • पद से  त्यागपत्र दिया जा सकता है ।

ग्रामीण पंचायत राज के निम्नतम स्तर ग्राम पंचायत के मुखिया सरपंच/उप सरपंच, पंचायत समिति के मुखिया प्रधान/उप प्रधान और जिला परिषद के मुखिया जिला प्रमुख/उप जिला प्रमुख अपने पद से कार्यकाल की समाप्ति से पूर्व भी त्यागपत्र दे सकते हैं।  सरपंच व उप सरपंच अपना त्यागपत्र खंड विकास अधिकारी को, पंचायत समिति का मुखिया प्रधान अपना त्यागपत्र जिला प्रमुख को और उप प्रधान अपना त्याग पत्र प्रधान को, जिला प्रमुख अपना त्यागपत्र संभागीय आयुक्त को  और उप जिला प्रमुख अपना त्याग पत्र जिला प्रमुख को दे सकता है। इसकी सूचना सरकार को प्रेषित की जाएगी।

  • अविश्वास प्रस्ताव द्वारा हटाया जा सकता हैं

पंचायतराज संस्थाओं चाहे वह ग्राम पंचायत, पंचायत समिति हो या फिर जिला परिषद उसके मुखिया और उप मुखिया को कार्यकाल की समाप्ति से पूर्व अविश्वास प्रस्ताव द्वारा हटाया जा सकता है और इस अविश्वास प्रस्ताव की एक निश्चित प्रक्रिया अपनाई जाती है । 

  • अविश्वास प्रस्ताव की यह है पूरी प्रक्रिया
  • ग्राम पंचायत

ग्राम पंचायत के सदस्य/वार्ड पंच अपने हस्ताक्षर से यह प्रस्ताव ला सकते हैं  लेकिन इसके लिए प्रस्ताव का ग्राम पंचायत के कुल सदस्यों के  1/ 3 सदस्यों द्वारा हस्ताक्षरित  प्रस्ताव ही लाया जा सकता है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि ऐसा प्रस्ताव/प्रार्थना पत्र जिला परिषद के कार्यकारी अधिकारी/ जिला कलेक्टर के समक्ष  प्रस्तुत किया जा सकता है।

  • पंचायत समिति

पंचायत समिति सदस्य/ CR अपने हस्ताक्षर से यह प्रस्ताव ला सकते हैं। जिसके अंतर्गत उस पंचायत समिति के कुल सदस्यों के  1/ 3 सदस्यों द्वारा ही अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि ऐसे प्रस्ताव की सूचना उपखंड अधिकारी के माध्यम से  जिला परिषद के कार्यकारी अधिकारी / जिला कलेक्टर के समक्ष  प्रस्तुत किया जा सकता है। 

  • जिला परिषद

जिला परिषद के कुल सदस्यों के 1/3 सदस्य/ DR अपने हस्ताक्षर से यह प्रस्ताव ला सकते हैं। ध्यान देने योग्य बात यह है कि ऐसा प्रस्ताव  जिला परिषद के कार्यकारी अधिकारी /जिला कलेक्टर के समक्ष  प्रस्तुत किया जा सकता है।

  • प्रस्ताव पारित होने के लिए यह बहुमत जरूरी

ग्राम पंचायत हो,पंचायत समिति हो या फिर जिला परिषद प्रस्ताव की प्रक्रिया पूरी होने के पश्चात तीनो ही स्तर की पंचायतीराज संस्थाओं के संबंधित अधिकारी ऐसा प्रस्ताव लाये  जाने हक़ी सूचना दी जाएगी (धारा37)  । इसके पश्चात एक निश्चित समय सीमा जी की सामान्तया एक माह होता है एक बैठक बुलाएगा और उस बैठक में गुप्त मतदान के द्वारा  3/4 बहुमत से उस प्रस्ताव को पारित कर दिया जाता है तो मुखिया/सरपंच,उप सरपंच/प्रधान,उप प्रधान/जिला प्रमुख, उप जिला प्रमुख को अपना पद छोड़ना पड़ता है । 
ध्यान देने योग्य बात यह है कि अगर ऐसा कोई भी प्रस्ताव 3/4  बहुमत से पारित नहीं होता है या अविश्वास प्रस्ताव खारिज हो जाता है, तब उसी प्रकार का प्रस्ताव दुबारा एक वर्ष के भीतर नहीं लाया जा सकता । 

  • अविश्वास प्रस्ताव से सम्बधित महत्वपूर्ण तथ्य

अविश्वास प्रस्ताव के बारे में एक सबसे महत्वपूर्ण बात यह है की पंचायत राज संस्था के गठन के प्रारंभिक 2 वर्षों में मुखिया, उप मुखिया के खिलाफ किसी प्रकार का अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता ।

अगर उस संस्था के कार्यकाल की समाप्ति के अंतिम 6 माह शेष बचे हो तब भी  उनके खिलाफ किसी प्रकार का अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता।
अविश्वास प्रस्ताव की सूचना या हटाया जाने की सूचना सम्बधित अधिकारी  द्वारा सरकार या सम्बधित विभाग तक पहुंचायी जाती है।
ध्यातव्य– अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ न्यायालय में अपील की जा सकती है। 

  • मुखिया/उप मुखिया को निलंबन किया जा सकता है

राजस्थान पंचायत राज अधिनियम 1994 की धारा 38 के तहत कार्रवाई करते हुए राज्य सरकार पंचायती राज संस्था के किसी सरपंच/उपसरपंच ,प्रधान/उपप्रधान, जिला प्रमुख/उप जिला प्रमुख को सुनवाई का मौका देते हुए पद से हटाया या निलंबित किया जा सकता है ।जैसे पद का दुरुपयोग, भ्रष्टाचार, कूट रचित दस्तावेजों से चुनाव लड़ना,पद का दुरुपयोग, अपना कर्तव्य वहन न करना, देश द्रोह आदि कई और कारणों से निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए निलंबित किया जा सकता है । इस बारे अधिनियम की  धारा 38 में विस्तृत व्याख्या की गई है । निलंबन के खिलाफ न्यायालय में अपील की जा सकती है।

  • इन परिस्थितियों में पद रिक्त मान लिया जाता है

यदि कोई सदस्य पंचायत राज संस्था की लगातार तीन बैठकों में  बिना किसी पूर्व सूचना के अनुपस्थित रहता है तो वह इस आशय का कोई संकल्प पारित करेगी तथा राज्य सरकार के समक्ष अपनी सिफारिश सहित प्रस्तुत करेंगे । ऐसी परिस्थिति में नियमानुसार कार्रवाई के पश्चात उसका पद रिक्त माना जा सकता है

ऐसी किसी पंचायत राज संस्था के किसी सदस्य के बारे में पंच, सरपंच के मामले में मुख्य कार्यपालक अधिकारी और अन्य मामलों में राज्य सरकार को निमानुसार धारा 23 के अधीन अधिसूचना की तारीख से 3 माह के अंदर यदि शपथ नहीं लेता है तो राजस्थान पंचायत राज अधिनियम 1994 के अंतर्गत निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए उस पद को रिक्त माना जा सकता है ।

  • ध्यातव्य

ध्यान देने योग्य बात यह है कि किसी भी माध्यम से अगर अध्यक्ष/ मुखिया,उप मुखिया का पद रिक्त हो गया है चाहे उसने त्यागपत्र दिया हो, चाहे उसे अविश्वास प्रस्ताव से हटाया गया हो या फिर उसे पद से बर्खास्त कर दिया हो, पद से हटाए जाने के पश्चात अगर वह अपने कब्जे में रिकॉर्ड व संपत्ति का चार्ज नही देने का दोषी पाया जाता है तो उसे एक वर्ष तक का कारावास या नियमानुसार उसे आर्थिक दंड से दंडित किया जा सकता है ।

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