एच.सी मुखर्जी  संविधान सभा के न तो पहले और न एकमात्र उपाध्यक्ष थे ।
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     अगर आप ये सोचते है कि एच. सी.मुखर्जी भारतीय संविधान सभा के पहले और एकमात्र उपाध्यक्ष है तो आपका सोचना गलत है क्योंकि एच. सी मुखर्जी न तो संविधान सभा के पहले और न  एकमात्र उपाध्यक्ष  है  । 

 सविधान किसी भी देश की स्वतंत्रता का प्रतीक होता है ।यह एक मौलिक कानून होता है जिसके आधार  पर यह निर्धारित किया जाता है कि किसी भी उस देश की सत्ता किसके हाथ में होगी और शासन व्यवस्था का रूप कैसा होगा । भारतीयों के द्वारा भी लंबे समय से संविधान और स्वतंत्रता की जब मांग की जा रही थी । हालांकि अप्रत्यक्ष रूप से संविधान सभा की मांग को अगस्त प्रस्ताव 1940 के माध्यम से लार्डलिनलिथगो  के द्वारा स्वीकार कर लिया गया था लेकिन क्रिप्स मिशन योजना 1942 के द्वारा औपचारिक रूप से संविधान निर्माण की मांग को स्वीकार किया था । ब्रिटिश सरकार के द्वारा संविधान निर्माण के प्रयोजन से ही तीन सदस्यसदस्यीय मिशन  मार्च 1946 को भारत भेजा था जिसका नाम था कैबिनेट मिशन योजना  ।

 केबिनेट मिशन योजना 1946 (तीन सदस्यीय आयोग)   के तहत  भारतीय संविधान सभा का निर्माण/ गठन  किया गया था इस संविधान सभा के चुनाव जुलाई- अगस्त 1946 में हुये थे औऱ  जिसका उद्देश्य भारत का संविधान निर्माण करना था । भारतीय संविधान सभा की पहली बैठक दिसंबर 1946 को नई दिल्ली में हुई थी। इस  बैठक में डॉ सच्चिदानंद सिन्हा को सभा के अंतरिम /अस्थायी अध्यक्ष बनाया गया था। सिन्हा संविधान सभा के वरिष्ठ सदस्य थे । ( फ्रांसीसी परंपरा वरिष्ठता के आधार पर इसे अपनाया गया था । )  10 दिसंबर 1946 को सविधान सभा के स्थाई अध्यक्ष पद हेतु  नामांकन पत्र भरवाए गए थे जिनमें से  दो नामांकन पत्र नियमानुसार नही होने के कारण रद्द हो गए  अब केवल एक ही नाम डॉ राजेंद्र प्रसाद  शेष रह गया था ।  अगले दिन 11 दिसंबर, 1946 को  डॉ राजेन्द्र प्रसाद (बिहार से).को निर्विरोध रूप से संविधान सभा के  स्थायी अध्यक्ष निर्वाचित किया गया।

  • कौन थे  ? संविधान सभा के पहले उपाध्यक्ष

अक्सर यह बताया जाता है और लिखा जाता है कि हरेन्द्र कोमार मुखर्जी (बंगाल)  संविधान सभा के पहले उपाध्यक्ष थे लेकिन आपको  यह जानकर आश्चर्य होगा कि संविधान सभा के गठन के पश्चात जिस प्रकार से डॉक्टर सच्चिदानंद सिन्हा को पहले अस्थाई अध्यक्ष मनोनीत किया गया था उसी प्रकार   संविधान सभा के पहले उपाध्यक्ष के रूप में फ्रैंक एंथोनी को मनोनीत किया गया था । 9 दिसंबर 1946 को ही संविधान सभा के अस्थाई अध्यक्ष डॉ सच्चिदानंद सिन्हा के आग्रह पर इनको उपाध्यक्ष मनोनीत किया गया था  ।  यह भी एक सत्यता है कि फ्रैंक एंथोनी निर्वाचित नहीं बल्कि मनोनीत उपाध्यक्ष थे।

  • कौन थे फ्रैंक एंथोनी :-  

   फ्रेंक एंथोनी  एंग्लो इंडियन समुदाय से थे जिनका जन्म 25 सितंबर 1908 को जबलपुर, मध्य प्रदेश हुआ था । अपनी कॉलेज शिक्षा पूरी करने के पश्चात कानून/लॉ की पढ़ाई के लिए ये लंदन चले गए   । जहां से लॉ की डिग्री करने के पश्चात जबलपुर में अपनी प्रैक्टिस शुरू की । एंथोनी “ऑल इंडिया एंग्लो इंडियन एसोसिएशन” के मुखिया भी रहे थे । संविधान सभा में  एक सदस्य के रूप में  इन्हीं के प्रयासों से भारतीय संविधान में एंग्लो इंडियन समुदाय के लिए विशेष प्रावधान जोड़े जाने की मांग की । ज्ञात हो कि फ्रैंक एंथोनी संविधान सभा के पहले अस्थाई मनोनीत उपाध्यक्ष रहे थे ।  स्वतंत्रता के पश्चात फ्रैंक एंथोनी संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत के पहले प्रतिनिधि भी बने ।

  • विभाजन से संख्या में आया बदलाव

   24 जनवरी 1947 को संविधान सभा ने अपना एक उपाध्यक्ष चुनने का फैसला किया और उसके अगले ही दिन यानी कि 25 जनवरी 1947  को डॉ. एस. सी.मुखर्जी (हरेंद्र कोमार मुखर्जी) को  उपाध्यक्ष पद पर निर्विरोध रूप से निर्वाचित किया गया । इस प्रकार एच.सी. मुखर्जी संविधान सभा के पहले निर्वाचित उपाध्यक्ष थे। विभाजन केेेे परिणामस्वरुप पंजाब और बंगाल की प्रांतीय सभाओं द्वारा संविधान सभा के लिए निर्वाचित कुछ  सदस्य संविधान सभा के सदस्य नहीं रहे । जिसमें सविधान सभा के उपाध्यक्ष हरेंद्र कुमार मुखर्जी भी शामिल थे ।  इन प्रांतों के  निर्वाचन क्षेत्रों ने सविधान सभा के लिए नए सिरे से अपने प्रतिनिधि चुने गये। एच.सी मुखर्जी सविधान सभा के पुनः निर्वाचन में फिर से सदस्य बन गए ।  विभाजन के कारण संविधान सभा में जो परिवर्तन हुए उसी के तहत संविधान सभा ने अपने नियमों में कुछ परिवर्तन किए और उन परिवर्तनों के तहत   अब एक नहीं बल्कि दो उपाध्यक्ष   बनायेे जाने का प्रावधान किया गया । अलवर से संविधान सभा के सदस्य एन बी खरे ने सुझाव दिया था कि दो उपाध्यक्ष में से एक उपाध्यक्ष देशी राज्यों के प्रतिनिधियों में से होना चाहिए ।

  • एक नही दो उपाध्यक्षो का किया गया प्रावधान

 16 जुलाई 1947 को संविधान सभा के दो उपाध्यक्ष बनाए गए जिनमें एक हरेंद्र कुमार मुखर्जी , दूसरे वी.टी.कृष्णामाचारी  (सर वंगल तिरुवेंकटाचारी कृष्णमाचारी ) थे  । बी. एन खरे (अलवर से संविधान सभा में सदस्य) ने जो सुझाव दिया था । उन्ही के सुझाव के तहत राजस्थान से संविधान सभा के सदस्य वी.टी कृष्णामाचारी को दूसरा उपाध्यक्ष बनाया गया था  आपको यह जानकर आश्चर्य होगा  कि वी. टी. कृष्णामाचारी राजस्थान से संविधान सभा के सदस्य  थे ।

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