समस्याओं से घबराकर भाग जाने से अच्छा है जरूरत पड़ने पर सामना करें lसमस्या किसके जीवन में नहीं आती है इस संसार में हर व्यक्ति कहीं ना कहीं किसी न किसी समस्या से ग्रसित हैं। चाहे राजा हो या रंक समस्याओं का सामना सभी को करना पड़ता है।
समस्याओं में समाधान ढूंढना एक सृजनात्मक प्रक्रिया है जिसके लिए मूल कारण को समझना होगा ऐसे में सभी विकल्पों का गहराई से मूल्यांकन करना और धीरे के साथ सही निर्णय लेने की आवश्यकता होती है।
किसी ने ठीक कहा कि – मुसीबतें जिंदा लोगों के नसीब में होती है मुर्दों के लिए तो लोग रास्ता छोड़ देते हैं l
जो लोग नौकरी कर रहे हैं वे सोचते हैं कि रिटायरमेंट में आकर मजे करूंगा जबकि रिटायरमेंट के बाद अलग ही समस्या है वे अब अकेलापन महसूस कर रहे हैं अब सोच रहे हैं कि ,नौकरी कर लू । बताएं कहां समस्या नहीं है।
सबके पास अपनी-अपनी प्रॉब्लम है सच यह है कि सफलता समस्याओं को खत्म नहीं करती बल्कि नई प्रॉब्लम को जन्म देती है सफल लोगों के पास प्रॉब्लम ज्यादा होती है।
गुरु नानक देव कहते हैं की ” नानक दुखिया सब संसार “अर्थात कोई भी समस्याओं से मुक्त नहीं है।
समस्या सदा रहने वाली भी नहीं है इसकी भी एक निश्चित अवधि होती है जैसे हर पर्वत की सबसे ऊपर चोटी होती है वही घाटी का निचला बिंदु भी होता है ,जीवन में भी उतार-चढ़ाव चलता रहता है कोई इंसान हमेशा शिखर पर नहीं होता है और ना ही इंसान हमेशा गर्त में रहता है समस्या रहित जीवन सिर्फ वहम है। समस्याओं का अंत जरूर निश्चित है । रात कितनी भी अँधेरी क्यों ना हो सवेरा जरुर होता है , हर तूफान के बाद सूरज जरूर निकलता है।
विशेष बात यह है कि हर समस्या में एक बड़ा फायदा भी छुपा रहता है ,बस आपको वह नजर आना चाहिए – जैसे चूहा सारी दुनिया के लिए एक समस्या है उनकी वजह से कितना नुकसान होता है पर कई कंपनियां इतनी बड़ी हो गई कि उन्होंने चूहे पकड़ने वाली मशीन बनाना शुरू कर दिया हजारों लोगों को रोजगार मिला ,चूहों को घर से भगाने वाली दवाई से करोड़ों की कमाई हो रही है।
इसे कहते हैं आपदा में अवसर ढूंढना।
किसी भी समस्या में कोई ना कोई संभावना जरूर होती है बस जरूरत है उसे शांत मन से पहचान की, कई बार प्रॉब्लम सोल्व नहीं होती है तो उसे मैनेज करें । ऐसे में कुछ सिद्धांत का अनुपालन निश्चित रूप से करना चाहिए।
- किसी भी प्रॉब्लम को हल्के में ना ले । उसे तुरंत प्रभाव से सॉल्व करें।
- अपनी किसी भी समस्या को बड़ा चढ़ा कर ना बताएं, राय का पहाड़ ना बनाएं प्रॉब्लम बड़ी हो तो उसे मामूली मानकर उपाय करना चाहिए। नौकरी छूट भी गई हो तो दुनिया समाप्त नहीं हुई है दुकान नहीं चल रही है तो परिवर्तन कर ले।
- हाथ पर हाथ रखकर कभी मत बैठो प्रॉब्लम कभी अपने आप खत्म नहीं होती है , नौकरी नहीं लग रही है तो वह घर चलकर नहीं आएगी उसके लिए आपको बाहर निकलना ही पड़ेगा इंटरव्यू देना पड़ेगा किसी मंत्री जी का फोन नहीं आएगा कि आ बेटा देश को तेरी जरूरत है।
- याद रखो हरकत में बरकत है जितना हो सके हाथ पैर मारना सीखो।
- असल में समस्या का समाधान करना चाह रहे हो तो किसी से उम्मीद मत रखो समस्या समाधान नहीं ढूंढते बल्कि हमें ही समाधान ढूंढना पड़ता है।
- अपनी प्रॉब्लम के लिए किसी को दोष मत देना । यदि आपका वजन बढ़ा है तो निश्चित ही ज्यादा खाया होगा , अधिकांश लोगों का समय दोष देने में ही निकल जाता है कि उसकी वजह से ऐसा हो गया वैसा हो गया।
ऐसे में गालिब ने कहा “ता उम्र ग़ालिब यही भूल करता रहा धूल चेहरे पर थी आईना साफ करता रहा।” - मदद मांगने में कभी कंजूसी मत करना , अपने ईगो को साइड में रख देना और मदद मांग लेना क्योंकि आपको इसकी जरूरत है और यह कोई गुनाह नहीं है देखो भगवान श्री राम ने भी माता सीता को खोजने के लिए सुग्रीव से मदद मांगी थी , केवट से मदद मांग ली नदी पार करने के लिए, आपको किस बात घमण्ड है ।मैं फिर बता रहा हूं किसी से मदद लेना और अपनी समस्या से बाहर निकल जानाl
उसके घर में देर जरूर है पर अंधेर नहीं यह हमेशा ध्यान रखना दुनिया को आपकी जरूरत है कोई समस्या हमेशा के लिए नहीं होती है.........डॉ रामबाबू सोनी केकड़ी
“न हीं कल्याणमर्थाय काचित दोषाय कल्पते”