काव्य/मुक्तक/कविता: “ऋतु राज बसंत”
खेतों में सरसों लहराये आई ऋतु बसन्त। पीले परिधान सजी धरा दुल्हन दिगन्त।। मरु माटी टेसू पल्लव जगे उल्लास लिए। बल्लरी उलसित आलम्बन आस लिए।। हरित रंग पहर घाघरा पीली…
(M.A. B.ED, NET, SET, Ph.d, LL.B)
खेतों में सरसों लहराये आई ऋतु बसन्त। पीले परिधान सजी धरा दुल्हन दिगन्त।। मरु माटी टेसू पल्लव जगे उल्लास लिए। बल्लरी उलसित आलम्बन आस लिए।। हरित रंग पहर घाघरा पीली…
समस्याओं से घबराकर भाग जाने से अच्छा है जरूरत पड़ने पर सामना करें lसमस्या किसके जीवन में नहीं आती है इस संसार में हर व्यक्ति कहीं ना कहीं किसी न…
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