Category: Religious , Cultural & historical Issues

केकड़ी जिले के बघेरा गांव में भी है अजंता एलोरा जैसी कलाकृतियां (अस्तल मंदिर)

    राजस्थान के केकड़ी जिले मे बघेरा तहसील में बघेरा के नाम से प्रसिद्ध एक छोटा सा कस्बा जो किसी परिचय का मोहताज नहीं है प्राचीन कला संस्कृति और सभ्यता…

ब्रह्माणी माता मंदिर कहा है ? ऐतिहासिक व पौराणिक महत्व रखता है बघेरा का ब्रह्माणी माता मंदिर धाम

राजस्थान के अजमेर जिले में केकड़ी तहसील में बघेरा के नाम से प्रसिद्ध एक कस्बा जो किसी परिचय का मोहताज नहीं है प्राचीन कला संस्कृति और सभ्यता को अपने में…

केकड़ी जिले का बघेरा गाँव जहाँ ढोला मारू की प्रेम गाथा आज भी जीवंत हैं

    राजस्थान की वीर प्रसूता धरा शौर्य के साथ प्रेम और बलिदान की गाथाओं से भी भरी है। प्रेमी युगल ढोला-मारू के प्रेम और समर्पण   की कथा राजस्थानी लोक गीतों…

बघेरा में विष्णु के दशावतार भगवान वराह की अद्वितीय प्रतिमा है

हमारा  देेश और प्रदेश आध्यात्मिकता, पौराणिकता और ऐतिहासिकता को समेटे हुए है  हजारों- वर्षो  से  यही परंपरा  चली आ रही है युगों- युगों  से धर्म ओर आध्यात्मिकता तथा धार्मिक ओर…

केकड़ी जिले के इस गांव में है,सूर वराह और नर वराह की अद्वितीय और ऐतिहासिक प्रतिमायओ का अनूठा संगम।

राजस्थान के केकड़ी जिला मुख्यालय से करीब 18 किलोमीटर दूर स्थित और ऐतिहासिक,पौराणिक धार्मिक कस्बा जो किसी परिचय का मोहताज नहीं है बल्कि इसकी ऐतिहासिकता, आध्यात्मिकता, और पौराणिकता को अपने…

केकड़ी जिले के इस गांव में है “राजा भर्तृहरि की गुफ़ा”

  “वीरो ओर पीरो की खान”  राजस्थान राज्य के अजमेर जिले  के अंतिम छोर पर बसा आज का बघेरा कस्बा  न केवल अपने विश्व प्रसिद्ध शूर वराह मंदिर ओर प्रेम…

व्याघ्रपदपुर से बघेरा तक की यात्रा का पूरा इतिहास

हमारे गौरव ,शौर्य और स्वामीभक्ति की अमर कथाओ की  पर्याय हमारी धरा अपने आंचल में अनेक सभ्यताओं संस्कृतियों और इतिहास को  समेटे हुए हैं यह समय की गति ही कही…

जैन अतिशय क्षेत्र बघेरा जहां धरती की कोख से निकलती है प्रतिमाएं

इतिहास और पौराणिकता की दृष्टि से बघेरा ओर जैन धर्म का  संबध       केकड़ी जिले का बघेरा कस्बा पौराणिकता, आध्यत्मिकता, ऐतिहासिकता के दृष्टिकोण से अपनी अलग ही पहचान रखता है ।…

बघेरा में प्रेम का प्रतीक ढोला मरु का तोरण द्वार रखता है अलग ही पहचान ।

         एक किंवंदती के अनुसार ढोला-मारू का विवाह केकड़ी जिले में जिला मुख्यालय से कर 18 किलो मीटर दूर बघेरा कस्बे में हुआ था जहां आज भी…

बघेरा में है “मौलश्री का ऐतिहासिक पेड़” इसका धार्मिक महत्व क्या है?

ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्व वाला बघेरा कस्बा जो कि केकड़ी जिले में ऐतिहासिक और आध्यात्मिक इमारतों /मंदिरों/स्मारक  के दृष्टिकोण से महत्व  रखने वाला कस्बा है आज हम बात करते है…

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